झारखंड : बोकारो-हजारीबाग में 20 करोड़ से ज्यादा की अवैध निकासी, पुलिस मुख्यालय ने मांगी 7 दिन में रिपोर्ट
झारखंड में बोकारो और हजारीबाग से करोड़ों की अवैध निकासी का बड़ा खुलासा हुआ है। CAG रिपोर्ट के बाद पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों से 7 दिन में जांच रिपोर्ट मांगी है। मामला अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है।
- झारखंड में करोड़ों का ‘वेतन घोटाला’, हर जिले में जांच के आदेश
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड में करोड़ों रुपये की अवैध निकासी का मामला अब राज्यव्यापी जांच का रूप ले चुका है। प्रधान महालेखाकार (CAG) की रिपोर्ट में बोकारो और हजारीबाग के एसपी कार्यालयों से बड़े पैमाने पर फर्जी भुगतान का खुलासा होने के बाद झारखंड पुलिस मुख्यालय ने सख्त रुख अपनाया है।
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पुलिस मुख्यालय ने राज्य के सभी जिलों के एसपी, रांची-जमशेदपुर-धनबाद के एसएसपी, सीआईडी, जैप, आईआरबी समेत सभी इकाइयों को निर्देश दिया है कि एक सप्ताह के भीतर अपने-अपने कार्यालयों की जांच कर रिपोर्ट सौंपें। पुलिस मुख्यालय को आशंका है कि इसी तरह की गड़बड़ी अन्य जिलों में भी हो सकती है। इसी वजह से पूरे राज्य में सिस्टमेटिक ऑडिट और जांच के आदेश दिए गए हैं।
बोकारो में 3.15 करोड़, हजारीबाग में 15.41 करोड़ की निकासी
CAG रिपोर्ट के अनुसार बोकारो एसपी कार्यालय से मई 2024 से दिसंबर 2025 के बीच 3.15 करोड़ रुपये की अवैध निकासी हुई। वहीं हजारीबाग में पिछले 8 वर्षों में 15.41 करोड़ रुपये का गबन सामने आया है। वित्त विभाग की समीक्षा में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि सेवानिवृत्त या फर्जी कर्मियों के नाम पर वेतन जारी किया गया। कार्यालय के रिकॉर्ड (पंजी) से मिलान किए बिना भुगतान होता रहा।
जन्मतिथि बदलकर फर्जी भुगतान का खेल
बोकारो केस में तो हेराफेरी का तरीका और भी चौंकाने वाला है। यहां एक रिटायर्ड व्यक्ति के GPF प्रोफाइल में जन्मतिथि बदल दी गई
उसे सक्रिय कर्मचारी दिखाकर लगातार वेतन दिया गया। इतना ही नहीं, कई मामलों में वास्तविक वेतन से कहीं अधिक भुगतान हर महीने किया जा रहा था।
क्लर्क से लेकर एसपी तक जांच के घेरे में
इस घोटाले में केवल निचले स्तर के कर्मचारी ही नहीं, बल्कि क्लर्क, डीडीओ (निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी) और एसपी स्तर तक की भूमिका जांच के दायरे में है। पुलिस मुख्यालय ने साफ किया है कि रिपोर्ट आने के बाद सभी दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।उक्त जिले के निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी (डीडीओ) की भूमिका, उनकी लापरवाही के स्तर की भी समीक्षा होगी। प्रत्येक दोषियों के विरुद्ध कानून सम्मत कार्रवाई होनी है।
खाते फ्रीज, गिरफ्तारी की कार्रवाई शुरू
फिलहाल जांच एजेंसियों ने संदिग्ध खातों को फ्रीज करना शुरू कर दिया है। मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी की प्रक्रिया जारी है। जिलों में अवैध निकासी मामले में लिपिक से लेकर एसपी तक की भूमिका जांच के घेरे में है। एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस मुख्यालय इस केस में आगे की कार्रवाई करेगी।
क्या है सबसे बड़ा सवाल?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है: क्या यह सिर्फ कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत है? या फिर पूरे सिस्टम में फैला एक बड़ा नेटवर्क? आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट से कई बड़े खुलासे होने की संभावना है।
राजनीतिक रंग: भाजपा ने कहा ‘चारा घोटाला पार्ट-2’
मामला अब राजनीतिक तूल भी पकड़ चुका है। भाजपा ने इस पूरे प्रकरण को ‘चारा घोटाला पार्ट-2’ बताते हुए सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा प्रवक्ता अजय साह ने सवाल उठाया है कि “एक लेखपाल 25 महीनों में 63 बार अवैध निकासी कैसे कर सकता है?” उन्होंने यह भी दावा किया कि बिना उच्च स्तरीय संरक्षण के इतना बड़ा घोटाला संभव नहीं है।
CBI जांच की मांग, संगठित रैकेट का शक
भाजपा ने मामले की CBI या न्यायिक जांच कराने की मांग की है। साथ ही यह भी आशंका जताई है कि यह एक संगठित वित्तीय रैकेट हो सकता है। पूरे राज्य में जांच होने पर घोटाले की राशि 20 करोड़ से कहीं ज्यादा हो सकती है। हर जिले में घोटाले का जाल फैल सकता है।
पुलिस अफसरों के 'संरक्षण' का आरोप
भाजपा का दावा है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच हुई, तो कई प्रभावशाली चेहरे बेनकाब होंगे। रांची में गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने कहा कि बोकारो ट्रेजरी मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी कौशल पांडे लंबे समय तक वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का करीबी रहा है।
ऐसे खुला मामला
प्रधान महालेखाकार कार्यालय ने दो अप्रैल को राज्य सरकार से पत्राचार कर पूरे मामले की जानकारी दी थी। पत्र में बताया गया था कि एसपी बोकारो के कार्यालय से मई 2024 से दिसंबर 2025 तक की अवधि में वेतन मद में तीन करोड़ 15 लाख 33 हजार 993 रुपये की अवैध निकासी हुई है। वित्त विभाग ने अपने डेटाबेस की समीक्षा की तो पता चला कि हजारीबाग एसपी ऑफिस से भी विगत आठ वर्षों में 15 करोड़, 41 लाख 41 हजार 485 रुपये की अवैध निकासी हुई है।
समीक्षा के दौरान यह भी जानकारी सामने आई है कि सेवानिवृत्त कर्मी या वैसे कर्मी जो वास्तविक रूप से कार्यालय से संबंधित नहीं थे, उनके वेतन का भुगतान कार्यालय के पंजियों से मिलान किए बिना किया जा रहा था।। बोकारो के मामले में एक सेवानिवृत्त व्यक्ति के जीपीएफ प्रोफाइल में जन्मतिथि बदलकर उसे कार्यरत कर्मी के रूप में भुगतान किया गया है। उपरोक्त दोनों ही जिलों में वेतन से कहीं अधिक प्रतिमाह भुगतान किया जा रहा था।






