झारखंड: SP ऑफिस से ट्रेजरी तक फैला वेतन घोटाला! बोकारो-चाईबासा में CID की बड़ी कार्रवाई, 2 पुलिसकर्मी गिरफ्तार
झारखंड के वेतन घोटाले में CID की बड़ी कार्रवाई। बोकारो SP ऑफिस के कर्मी और चाईबासा के एक सिपाही को गिरफ्तार किया गया। जांच में 1.06 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन और 45 लाख की गड़बड़ी सामने आई है।
- बोकारो SP ऑफिस से करोड़ों का खेल
- पुलिसकर्मी के खाते में 1.06 करोड़ के संदिग्ध ट्रांजैक्शन
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड में कोषागार से अवैध वेतन निकासी घोटाले की जांच कर रही सीआइडी (CID) की विशेष जांच टीम (SIT) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बोकारो और चाईबासा में दो पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया है। जांच में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन और सरकारी खाते से लाखों रुपये की गड़बड़ी सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई।
यह भी पढ़ें: झारखंड में वेतन घोटाला! 14 ट्रेजरी से 31.47 करोड़ की फर्जी निकासी, सिपाही से DSP तक ने महीने में दो बार उठाई सैलरी
बोकारो एसपी कार्यालय की लेखा शाखा में प्रतिनियुक्त गृह रक्षा वाहिनी के जवान सतीश कुमार उर्फ सतीश कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, चाईबासा ट्रेजरी से पुलिस विभाग के खाते से 45 लाख रुपये की गड़बड़ी के मामले में एक सिपाही को गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में तीन अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।
सतीश कुमार के खाते में 1.06 करोड़ के संदिग्ध ट्रांजैक्शन
बोकारो ट्रेजरी से हुए वेतन घोटाले की जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सीआइडी की जांच में सामने आया कि सतीश कुमार सिंह के बैंक खाते में करीब 1.06 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन हुए हैं। इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता सामने आने के बाद सीआइडी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसके खाते में जमा 43 लाख रुपये को फ्रीज करा दिया है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि सतीश कुमार, इस मामले में पहले से गिरफ्तार मुख्य आरोपी लेखापाल कौशल कुमार पांडेय का करीबी सहयोगी था और अवैध निकासी के पूरे नेटवर्क में उसकी सक्रिय भूमिका थी। सूत्रों के अनुसार, ट्रेजरी से फर्जी वेतन भुगतान की प्रक्रिया को अंजाम देने में लेखा शाखा के भीतर से ही मदद दी जा रही थी, जिससे लंबे समय तक यह घोटाला बिना किसी बड़ी आपत्ति के चलता रहा।
चाईबासा में 45 लाख की गड़बड़ी, सिपाही गिरफ्तार
दूसरी ओर, चाईबासा स्थित कोषागार से पुलिस विभाग के खाते से 45 लाख रुपये की अनियमित निकासी का मामला सामने आया है।इस मामले में मुख्य आरोपी सिपाही देव नारायण मुर्मू को गिरफ्तार किया गया है। जांच में पता चला है कि उसने निकाली गई राशि का एक हिस्सा अपने परिजनों के बैंक खातों में भी ट्रांसफर किया था। पुलिस ने इस मामले में तीन अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया है। सीआइडी अब इन सभी बैंक खातों और लेन-देन की विस्तृत जांच कर रही है।
झारखंड सरकार के निर्देश पर CID ने संभाली जांच
झारखंड सरकार के निर्देश पर बोकारो कोषागार से अवैध राशि निकासी से जुड़े मामलों को सीआइडी ने टेकओवर किया है। इस संबंध में 24 अप्रैल 2026 को सीआइडी थाने में कांड संख्या 06/2026 दर्ज किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए आइजी पंकज कंबोज के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। SIT अब राज्य के विभिन्न कोषागारों में वेतन मद से हुई फर्जी निकासी की जांच कर रही है। शुरुआती जांच में कई जिलों में बड़े स्तर पर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।
14 ट्रेजरी पहले ही जांच के दायरे में
गौरतलब है कि झारखंड में पहले ही 33 में से 14 ट्रेजरी में वेतन घोटाले की पुष्टि हो चुकी है। इसमें सिपाही से लेकर DSP स्तर तक के अधिकारियों द्वारा एक ही महीने में दो बार वेतन लेने के मामले सामने आए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 614 कर्मचारी ऐसे पाए गए हैं जिन्होंने डबल सैलरी ली। इस खुलासे के बाद राज्यभर में प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा हुआ है।
और भी गिरफ्तारियां संभव
सीआइडी सूत्रों के मुताबिक, जांच अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। बैंक खातों, ट्रेजरी रिकॉर्ड और विभागीय दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है। यदि जांच इसी गति से आगे बढ़ी, तो यह झारखंड के सबसे बड़े वेतन घोटालों में से एक साबित हो सकता है।






