JDU में फिर ‘नीतीश मॉडल’ कायम: नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा, बेटे निशांत को किनारे रख बड़ा सियासी संदेश
JDU की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में नीतीश कुमार की पकड़ बरकरार, संजय झा कार्यकारी अध्यक्ष बने रहे, जबकि निशांत कुमार को जगह नहीं मिली। पार्टी ने अनुभव और सामाजिक संतुलन पर दिया जोर।
- संजय झा की पकड़ मजबूत, फिर बने कार्यकारी अध्यक्ष
पटना (Threesocieties.com Desk): जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने अपनी नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा कर दी है, जिसमें संगठन के भीतर अनुभव, संतुलन और सामाजिक समीकरण को प्राथमिकता दी गई है। कुल 24 नेताओं को शामिल करते हुए पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि कमान अब भी पूरी तरह नीतीश कुमार के हाथ में ही रहेगी।
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सबसे अहम बात यह रही कि संजय कुमार झा को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष पद पर बरकरार रखा गया है, जबकि लंबे समय से चर्चा में रहे नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को इस सूची में जगह नहीं मिली।
संगठन में अनुभव को प्राथमिकता
नई कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष, महासचिव, कोषाध्यक्ष, प्रवक्ता और सचिव जैसे अहम पदों पर अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है।चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व आलोक कुमार सुमन को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है। 12 नेताओं को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। महासचिवों की सूची में श्याम रजक, अशोक चौधरी, आफाक अहमद खान, रमेश सिंह कुशवाहा, रामसेवक सिंह सहित कई नाम शामिल हैं।
अल्पसंख्यक और सामाजिक संतुलन पर फोकस
JDU ने इस बार सामाजिक समीकरण को साधने की कोशिश भी की है। गुलाम रसूल बलियावी व कहकशां परवीन जैसे अल्पसंख्यक चेहरों को प्रमुख जिम्मेदारी दी गई है। वहीं राजीव रंजन प्रसाद को प्रवक्ता सह सचिव बनाया गया है।
निशांत को जगह नहीं, क्या है संदेश?
नई कार्यकारिणी की सबसे बड़ी चर्चा यही है कि निशांत कुमार को कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई। हाल के दिनों में उनकी सक्रियता को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज थीं, लेकिन पार्टी के इस फैसले से साफ संकेत गया है कि JDU फिलहाल वंशवाद से दूरी बनाकर संगठनात्मक मजबूती पर जोर दे रही है।
लोकसभा व विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद चंद्रवंशी पर भरोसा
चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाना भी बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। लगातार चुनावी हार के बावजूद पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है। चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी को 2024 लोकसभा चुनाव में जहानाबाद से हार हुई थी। 2025 विधानसभा चुनाव में जहानाबाद से ही महज 793 वोट से शिकस्त मिली है। इसके बावजूद उन्हें शीर्ष नेतृत्व में जगह देना बताता है कि JDU ग्राउंड कनेक्शन और संगठनात्मक क्षमता को ज्यादा महत्व दे रही है।
क्या है बड़ा सियासी मैसेज?
JDU की नई कार्यकारिणी कई स्पष्ट संदेश देती हैकि नेतृत्व पूरी तरह नीतीश कुमार के हाथ में सुरक्षित है। संजय कुमार झा की संगठन में मजबूत पकड़ बनी हुई है। वंशवाद से दूरी का संकेत (निशांत को बाहर रखकर) OBC और अल्पसंख्यक समीकरण साधने की रणनीति बनी है।






