हजारीबाग का दनुआ घाटी फिर बनी ‘मौत की घाटी’: ट्रेलर-ट्रक के बीच पिसी कार, एक ही परिवार के 6 लोगों की दर्दनाक मौत

हजारीबाग के चौपारण स्थित दनुआ घाटी में शनिवार शाम भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के छह लोगों की मौत हो गई। सेलेरियो कार पहले ट्रेलर में जा घुसी, फिर पीछे से आ रहे ट्रक ने टक्कर मार दी। मृतकों में दो पुरुष, एक महिला और दो बच्चे शामिल हैं।

हजारीबाग का दनुआ घाटी फिर बनी ‘मौत की घाटी’: ट्रेलर-ट्रक के बीच पिसी कार, एक ही परिवार के 6 लोगों की दर्दनाक मौत
‘मौत की घाटी’ में दर्दनाक हादसा,कार के परखच्चे उड़े।

हजारीबाग (Threesocieties.com Desk):झारखंड के हजारीबाग जिले की कुख्यात दनुआ घाटी ने शनिवार की शाम एक बार फिर ऐसा खौफनाक मंजर दिखाया, जिसने पूरे इलाके को दहला दिया। दनुआ घाटी स्थित जोडराही पुल के पास हुए भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के छह लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में दो पुरुष, एक महिला और दो मासूम बच्चे शामिल बताए जा रहे हैं।

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यह हादसा शनिवार शाम करीब 6:30 से 7:00 बजे के बीच हुआ। बीसीसीएल के गोविंदपुर क्षेत्र अंतर्गत महेशपुर कोलियरी में लाइनमैन
शिव कुमार भुइयां अपनी कार से परिवार के साथ गयाजी के आमस में एक पारिवारिक शादी समारोह में जा रहे थे। बताया जा रहा है कि सेलेरियो कार (संख्या JH 10 CU 3472) दनुआ घाटी के खतरनाक ढलान और घुमाव पर अचानक अनियंत्रित हो गई और आगे चल रहे एक अज्ञात ट्रेलर के पिछले हिस्से में जा घुसी। मृतकों में धनबाद के मधुबन स्थित बुदौरा कॉलोनी निवासी बीसीसीएल शिव कुमार भुइयां (45), उनकी पत्नी रूबी देवी (38), बड़ी पुत्री सोनी (12), छोटी पुत्री सुहानी (9), शिव कुमार के साला का पुत्र प्रेम(7) व उसके ससुर के रूप में की गई है।

ट्रेलर में समा गई कार, फिर पीछे से ट्रक ने मारी टक्कर

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी भीषण थी कि कार का आधा हिस्सा ट्रेलर के नीचे समा गया। इससे पहले कि कार सवार कुछ समझ पाते या राहगीर मदद के लिए दौड़ते, पीछे से तेज रफ्तार में आ रहे एक दूसरे ट्रक ने कार को जोरदार टक्कर मार दी। दो भारी वाहनों के बीच दबने के कारण कार किसी खिलौने की तरह पिचक गई और लोहे के मलबे में तब्दील हो गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि कार के परखच्चे कई मीटर दूर तक बिखर गए। पिछले चार दिनों में इस क्षेत्र में यह लगातार पांचवीं घटना है। तमाम कोशिशों के बाद भी यहां दुर्घटनाएं नहीं रुक र हीं हीं। हीं ब्लैक स्पॉट्स पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका है, जिससे यह क्षेत्र अब राहगीरों की
मौत का पर्याय बन चुका है।

मौके पर ही चली गई पांच जिंदगियां

हादसा इतना भयावह था कि कार में सवार लोगों को बाहर निकलने का जरा भी मौका नहीं मिला। घटनास्थल पर ही पांच लोगों की मौत हो गई। शव कार के अंदर बुरी तरह फंस गए थे, जिन्हें निकालना भी बेहद मुश्किल हो गया। हादसे का मंजर इतना खौफनाक था कि कार के परखच्चे उड़ गए थे। सभी शव कार के अंदर ही बुरी तरह फंसे थे। चौपारण पुलिस और एनएचएआई की बचाव टीम मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों की मदद से मशक्कत के बाद गैस कटर और अन्य उपकरणों से शवों को बाहर निकाला गया।

दोनों ट्रक चालक वाहन लेकर फरार

हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही डीएसपी अजीत कुमार विमल पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य शुरू कराया। हालांकि, हादसे के बाद दोनों ट्रक चालक वाहन लेकर मौके से फरार हो गए। पुलिस उनकी तलाश में जुट गई है।

लोगों का फूटा गुस्सा, बोले— दनुआ घाटी अब ‘मौत की घाटी’

स्थानीय लोगों में इस हादसे को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि दनुआ घाटी अब “मौत की घाटी” बन चुकी है। यहां हर साल सैकड़ों दुर्घटनाएं होती हैं और दर्जनों लोगों की जान चली जाती है, लेकिन प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। लोगों ने आरोप लगाया कि हर बड़े हादसे के बाद कुछ दिनों तक सख्ती दिखाई जाती है, फिर सब कुछ पहले जैसा हो जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है—“हर दिन दनुआ घाटी किसी न किसी की जिंदगी निगल रही है। अब जरूरत है स्थायी और सख्त कदमों की, ताकि यह घाटी फिर किसी परिवार का चिराग न बुझाए।”

प्रशासन पर उठे सवाल

लगातार हो रहे हादसों के बावजूद न तो सड़क सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं और न ही भारी वाहनों की गति नियंत्रण पर प्रभावी कार्रवाई हो रही है। लोगों की मांग है कि दनुआ घाटी में स्थायी ट्रैफिक मॉनिटरिंग, स्पीड कंट्रोल सिस्टम, अतिरिक्त पुलिस निगरानी और सुरक्षित सड़क संरचना की तत्काल व्यवस्था की जाए। शनिवार की यह दर्दनाक घटना एक बार फिर प्रशासन को आईना दिखा गई है कि अगर अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो दनुआ घाटी यूं ही मासूम जिंदगियां निगलती रहेगी।