धनबाद: BCCL वाशरी डिवीजन में ‘खाता न बही, जो GM सुहैल कहे वही सही’, नियम-कानून की उड़ रही धज्जियां
धनबाद स्थित बीसीसीएल वाशरी डिवीजन में जीएम सुहैल पर गंभीर आरोप लगे हैं। सीएमडी के आदेशों की अनदेखी, पोस्टिंग-हाजिरी में गड़बड़ी, घटिया कोयला आपूर्ति और भ्रष्टाचार के आरोपों से विभाग की साख पर बट्टा लगा है।
धनबाद। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) की वाशरी डिवीजन इन दिनों गंभीर अव्यवस्था और कथित भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी हुई है। लगभग तीन वर्षों से चीफ ऑफ वाशरी डिवीजन के पद पर तैनात जीएम सुहैल पर आरोप है कि वे नियम-कानून को ताक पर रखकर मनमाने तरीके से विभाग चला रहे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि वाशरी डिवीजन में कहावत चरितार्थ हो रही है — “खाता न बही, जो जीएम सुहैल कहे वही सही।”
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सूत्रों के अनुसार, जीएम सुहैल न सिर्फ कंपनी की गाइडलाइन की अनदेखी कर रहे हैं, बल्कि बीसीसीएल के सीएमडी द्वारा बार-बार दिए जा रहे दिशा-निर्देशों को भी नजरअंदाज कर रहे हैं। वाशरी के प्रोडक्शन और कोयले की गुणवत्ता को लेकर सीएमडी लगातार बैठकों में सख्त निर्देश दे रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनके आदेशों का पालन नहीं हो रहा।

पोस्टिंग कहीं, हाजिरी कहीं
वाशरी डिवीजन में कर्मचारियों की पोस्टिंग और हाजिरी में भारी गड़बड़ी के आरोप हैं। बताया जा रहा है कि कई कर्मचारी एक जगह तैनात हैं, लेकिन उनकी उपस्थिति किसी दूसरी वाशरी में दर्ज की जा रही है। इससे न सिर्फ कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है, बल्कि विभागीय पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।इतना ही नहीं, कुछ ऐसे कर्मचारियों से जिम्मेदार पदों का काम लिया जा रहा है, जो उस पद के योग्य नहीं माने जाते। पूर्व में एक कर्मचारी को दो-दो आवास आवंटित किए जाने का भी मामला सामने आ चुका है।
कोयला आपूर्ति में बड़ा खेल!
सबसे गंभीर आरोप कोयला आपूर्ति से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, वाशरी डिवीजन में तैनात एक कर्मचारी को कोलियरी साइडिंग से बेहतर गुणवत्ता का कोयला वाशरी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन आरोप है कि वही कर्मचारी वसूली और हेराफेरी कर बेहतर कोयले की जगह पत्थर और घटिया सामग्री की सप्लाई करवा रहा है। इसका सीधा असर वाशरी के उत्पादन और गुणवत्ता पर पड़ रहा है।
हाल ही में पाथरीडह वाशरी भेजे गये कोयले के एक रैक में भारी मात्रा में पत्थर पाए जाने की शिकायत सामने आई थी। बावजूद इसके, जीएम स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। संबंधित कर्मचारी जहां-तहां डयूटीआवर में घूमकर धौंस जमा रहा है.जीएम को कंपलेन किये जाने पर भी कोई कार्रवई नहीं हो रही है।
राजनीतिक व यूनियन संतुलन पर भी सवाल
सूत्रों का कहना है कि जीएम सुहैल पर यह भी आरोप है कि वे भाजपा सांसद, विधायक और बीएमएस से संबद्ध यूनियन को दरकिनार कर कुछ क्राफ्ट यूनियन और छुटभैया नेताओं को अनुचित लाभ पहुंचा रहे हैं। इससे औद्योगिक माहौल में असंतोष बढ़ रहा है।
CBI और विजिलेंस का भी नहीं भय?
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोप है कि नियमों के विरुद्ध काम करने वालों को न तो विजिलेंस का डर है और न ही सीबीआई का। वाशरी डिवीजन में यह चर्चा आम है कि विभाग में जवाबदेही पूरी तरह कमजोर हो चुकी है।
शीर्ष स्तर तक जाएगी शिकायत
बताया जा रहा है कि जीएम सुहैल के खिलाफ जल्द ही बीसीसीएल के सीएमडी, कोल इंडिया चेयरमैन और केंद्रीय कोयला मंत्री को लिखित शिकायत भेजी जाएगी। शिकायत में वाशरी डिवीजन की अव्यवस्था, भ्रष्टाचार और उत्पादन गिरावट की उच्चस्तरीय जांच की मांग की जायेगी।
यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो बीसीसीएल की वाशरी डिवीजन की साख के साथ-साथ देश की ऊर्जा सुरक्षा पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ सकता है।






