बिहार: PMCH के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. एनपी सिंह की मुश्किलें बढ़ीं, बॉडीगार्ड के बयान से घिरे
PMCH के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. एनपी सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्वास्थ्य विभाग के सामने उनके सरकारी बॉडीगार्ड ने खुलासा किया कि स्वास्थ्य मंत्री के दौरे वाले दिन वह निजी क्लिनिक में मरीज देख रहे थे। मामले की हाईलेवल जांच होगी।
HighLights:
- PMCH के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. एनपी सिंह पर ड्यूटी के दौरान निजी क्लिनिक चलाने का आरोप
- सरकारी बॉडीगार्ड संजीत कुमार ने स्वास्थ्य विभाग के सामने क्लिनिक में मौजूदगी की पुष्टि की
- स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के निरीक्षण के दौरान PMCH से अनुपस्थित पाए गए थे एनपी सिंह
- स्वास्थ्य विभाग के पास बॉडीगार्ड के बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद होने का दावा
- मामले की जांच के लिए हाईलेवल कमिटी गठित करने की तैयारी
पटना (Threesocieties.com Desk): पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) के प्रिंसिपल पद से हटाए गए डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ डॉ. एनपी सिंह की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के सामने उनके सरकारी बॉडीगार्ड संजीत कुमार द्वारा दिए गए बयान ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। विभाग का दावा है कि स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के पीएमसीएच दौरे वाले दिन डॉ. एनपी सिंह अपने निजी क्लिनिक में मरीजों को देख रहे थे।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 23 जून की सुबह करीब 11 बजे डॉ. एनपी सिंह अपने निजी क्लिनिक में मौजूद थे और मरीजों का इलाज कर रहे थे। इस बात की पुष्टि उनके सरकारी बॉडीगार्ड संजीत कुमार ने विभागीय अधिकारियों के समक्ष की है। विभाग ने यह भी दावा किया है कि बॉडीगार्ड के बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग उसके पास उपलब्ध है।
मंत्री के निरीक्षण के दौरान PMCH से थे गायब
23 जून को स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार पीएमसीएच पहुंचे थे, जहां उन्होंने रेडियोलॉजी भवन का उद्घाटन किया और अस्पताल का निरीक्षण भी किया। इस दौरान तत्कालीन प्रिंसिपल डॉ. एनपी सिंह कार्यक्रम से नदारद थे।बताया गया कि मंत्री के निर्देश पर स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। इसके बाद मंत्री ने मीडिया के सामने कहा था कि पीएमसीएच प्रिंसिपल बिना किसी सूचना के अनुपस्थित हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
दो दिन बाद पद से हटाया गया
मामले को गंभीर मानते हुए स्वास्थ्य विभाग ने 25 जून को डॉ. एनपी सिंह को पीएमसीएच प्रिंसिपल पद से हटा दिया। उनकी जगह डॉ. गीता सिन्हा को प्राचार्य का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया, जबकि डॉ. एनपी सिंह का तबादला बेतिया जीएमसीएच के मनोरोग विभागाध्यक्ष पद पर कर दिया गया।विभाग ने अपने आदेश में कहा था कि जांच के दौरान यह सामने आया कि डॉ. एनपी सिंह ड्यूटी के दौरान निजी क्लिनिक का संचालन कर रहे थे।
एनपी सिंह ने कार्रवाई को बताया एकतरफा
इधर, कार्रवाई के बाद डॉ. एनपी सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्वास्थ्य विभाग और मंत्री पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उन्हें बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए ही दंडात्मक कार्रवाई कर दी गई।डॉ. सिंह ने दावा किया कि मंत्री के दौरे वाले दिन उन्हें बर्न इंजरी हुई थी, जिसके कारण वे अस्पताल नहीं पहुंच सके। उनके परिवार की ओर से वरिष्ठ अधिकारियों को व्हाट्सएप के माध्यम से इसकी जानकारी भी दे दी गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि विभाग में उनकी बात नहीं सुनी जा रही है और ऐसे माहौल में काम करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने इस्तीफा देने तक की बात कही।
डमी पेशेंट भेजकर हुई जांच
डॉ. एनपी सिंह की प्रेस कॉन्फ्रेंस के कुछ घंटों बाद स्वास्थ्य विभाग ने उनके आरोपों को खारिज करते हुए नई जानकारी साझा की। विभाग के अनुसार, उनके निजी क्लिनिक पर डमी मरीज भेजकर जांच की गई थी, जिसमें पाया गया कि वह सरकारी ड्यूटी के समय मरीजों को देखते हैं। विभाग ने यह भी दावा किया कि उनके क्लिनिक के बाहर सरकारी वाहन खड़ा पाया गया, जो सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है।
हाईलेवल कमिटी करेगी जांच
स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की जांच के लिए हाईलेवल कमिटी गठित करने का निर्णय लिया है। विभाग का कहना है कि जांच के दौरान डॉ. एनपी सिंह का पक्ष भी सुना जाएगा और उपलब्ध सभी तथ्यों तथा साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।मामला अब केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सरकारी सेवा के दौरान निजी प्रैक्टिस और सरकारी संसाधनों के उपयोग जैसे गंभीर सवाल भी खड़े कर रहा है।






