बिहार: 125 करोड़ टेंडर घोटाले में बड़ा धमाका: रिशुश्री का सबसे बड़ा राजदार संतोष गिरफ्तार, अब फंसेंगे बड़े अफसर?
बिहार के 125 करोड़ रुपये के टेंडर घोटाले में बड़ा खुलासा हुआ है। रिशुश्री के करीबी सहयोगी संतोष कुमार की गिरफ्तारी के बाद जांच तेज हो गई है। एसवीयू को उम्मीद है कि पूछताछ में कई बड़े नाम और नए राज सामने आ सकते हैं।
HighLights
- रिशुश्री के करीबी सहयोगी संतोष कुमार को एसवीयू ने गिरफ्तार किया
- 125 करोड़ के टेंडर घोटाले में जांच का दायरा बढ़ने की संभावना
- संतोष पर रिश्वत नेटवर्क और टेंडर सेटिंग में भूमिका के आरोप
- कई अधिकारियों और कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं
- पिछले 10 दिनों में जांच एजेंसियों ने लगातार की बड़ी कार्रवाई
पटना (Threesocieties.com Desk): बिहार के चर्चित 125 करोड़ रुपये के टेंडर घोटाले की जांच में विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) को बड़ी सफलता मिली है। टेंडर माफिया नेटवर्क से जुड़े माने जा रहे रिशुश्री के सबसे करीबी सहयोगियों में शामिल संतोष Kumar को गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि इस गिरफ्तारी के बाद घोटाले की परतें और तेजी से खुल सकती हैं तथा कई बड़े अधिकारियों और कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
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सूत्रों के अनुसार, एसवीयू ने गुप्त सूचना के आधार पर शुक्रवार को पटना में छापेमारी कर संतोष कुमार को पकड़ा। पूछताछ के बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि संतोष केवल एक कारोबारी सहयोगी नहीं, बल्कि पूरे कथित नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
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रिशुश्री का सबसे भरोसेमंद साथी माना जाता था संतोष
जांच में सामने आया है कि संतोष कुमार शुरुआत से ही रिशुश्री के कारोबारी नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। एसवीयू के अनुसार, जब रिशुश्री ने अपने कारोबार का विस्तार शुरू किया था, तब संतोष ने करीब चार करोड़ रुपये का निवेश किया था। इतना ही नहीं, एजेंसी को शक है कि संतोष की भूमिका केवल निवेश तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह कथित तौर पर अफसरों तक रिश्वत पहुंचाने, लेन-देन का प्रबंधन करने और टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने में भी सक्रिय था।
पूछताछ में खुल सकते हैं कई बड़े नाम
एसवीयू अधिकारियों का मानना है कि संतोष कुमार की गिरफ्तारी जांच में टर्निंग प्वाइंट साबित हो सकती है। एजेंसी पहले ही पिछले वर्ष 30 अप्रैल को दर्ज प्राथमिकी में उसे नामजद कर चुकी थी। अब उससे पूछताछ के जरिए यह जानने की कोशिश होगी कि किन अधिकारियों, कंपनियों और बिचौलियों के जरिए कथित टेंडर नेटवर्क काम कर रहा था।
10 दिनों में जांच ने पकड़ी तेज रफ्तार
पिछले 10 दिनों में इस मामले में लगातार बड़े फैसले और कार्रवाई हुई है।
27 मई: रिशुश्री से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी
28 मई: रिशुश्री गिरफ्तार, जेल भेजा गया
30 मई: मामले में कथित संलिप्तता को लेकर दो आईएएस अधिकारियों का निलंबन
5 जून: संतोष कुमार गिरफ्तार
इन लगातार कार्रवाइयों ने संकेत दिया है कि जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं।
125 करोड़ के टेंडर में क्या है पूरा मामला?
एसवीयू की जांच के मुताबिक जल संसाधन विभाग से जुड़े लगभग 125 करोड़ रुपये के टेंडर में कथित अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।आरोप है कि रिशुश्री ने प्रभाव और अधिकारियों से सांठगांठ का इस्तेमाल करते हुए अहमदाबाद की एक कंपनी को टेंडर दिलवाया। बाद में यह काम संतोष कुमार की कंपनी एमएस मातृस्वा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को सौंप दिया गया।जांच एजेंसी को शक है कि टेंडर प्रक्रिया को इस तरह डिजाइन किया जाता था कि अधिकांश कंपनियां स्वतः बाहर हो जाएं और चुनिंदा कंपनियों को फायदा मिले।
कई कंपनियों के जरिए चलता था कथित नेटवर्क
जांच में यह भी सामने आया है कि रिशुश्री ने अपने, पत्नी और करीबियों के नाम पर कई कंपनियां बना रखी थीं। इन कंपनियों का इस्तेमाल कथित तौर पर टेंडर प्रक्रिया में प्रभाव बनाने, वित्तीय लेन-देन और कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए किया जाता था।
आगे क्या?
संतोष कुमार की गिरफ्तारी को जांच एजेंसियां बेहद अहम मान रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां, नए खुलासे और बड़े प्रशासनिक फैसले देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल, बिहार के सबसे चर्चित टेंडर घोटालों में शामिल इस मामले पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।






