बिहारः 12 साल के बच्चे के गुनाह को किशोर न्याय परिषद के प्रधान न्यायाधीश ने किया माफ

बिहारशरीफ किशोर न्याय परिषद के प्रधान न्यायाधीश मानवेन्द्र मिश्र ने मंगलवार को शराब ढोते पकड़े गये फूल बेचने वाले 12 साल से बालक का बचपन संवार दिया। जज ने उसके भविष्य को देखते हुए शराब अधिनियम के तहत दर्ज मामले को ही खत्म कर दिया। 

बिहारः 12 साल के बच्चे के गुनाह को किशोर न्याय परिषद के प्रधान न्यायाधीश ने किया माफ
  • छोटी बहनों की ख्वाहिश पूरी करने के लिए पकड़े गये थे शराब ढोते 
  • जज ने फूल बेचने वाले का बचपन संवारा

बिहारशरीफ। बिहारशरीफ किशोर न्याय परिषद के प्रधान न्यायाधीश मानवेन्द्र मिश्र ने मंगलवार को शराब ढोते पकड़े गये फूल बेचने वाले 12 साल से बालक का बचपन संवार दिया। जज ने उसके भविष्य को देखते हुए शराब अधिनियम के तहत दर्ज मामले को ही खत्म कर दिया। 
कोर्ट ने बाल संरक्षण पदाधिकारी को 15 दिनों के भीतर बालक की पढ़ाई-लिखाई समेत तमाम मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करने को कहा। जज के आदेश पर बालक के घर पर तत्काल राशन पहुंचाया गया। सारे थानाध्यक्ष को बीडीओ व सीओ के सहयोग से बालक की छोटी बहनों व बुजुर्ग दादी को सरकार की अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने को कहा गया। जज ने डीएसपी हेडक्वार्टर ममता प्रसाद से अपेक्षा की कि बालक की नियमित मॉनिटरिंग करती रहें और इससे कोर्ट को भी अवगत कराएं। ताकि बालक फिर किसी गैरकानूनी कार्य में न फंस जाए।

मुझे जेल मत भेजिए साहब, मेरी चारों छोटी बहनें भूख से मर जायेगी

पुलिस ने सोमवार को 12 साल के बालक को एक वयस्क के साथ देसी शराब के गैलन समेत पकड़ा था।कोर्ट में पेश होते समय मंगलवार को बालक जोर-जोर से रोने लगा। कहा, मुझे जेल मत भेजिए साहब, मेरी चारों छोटी बहनें भूख से मर जायेगी। तब कोर्ट रूम में उसे आश्वासन दिया गया कि घबराओ मत, यहां आये किसी बालक या किशोर को जेल नहीं भेजा जाता।

जज की सहानुभूति मिलते ही बालक ने खुलकर अपनी विवशता सुनाई। उसने बताया कि दो साल पहले मां का निधन हो गया। घर में बूढ़ी दादी और चार छोटी बहनें प्रियंका, पूजा, पिंकी व रिंकी हैं। सबसे बड़ा होने के नाते सबके भरण-पोषण के लिए पिता के साथ मिलकर पुश्तैनी धंधे फूलों की दुकानदारी में हाथ बंटाने लगा। कोरोना काल में लॉकडाउन में मंदिर बंद हुए तो फूलों की बिक्री बंद हो गई। सारे बाजार में छोटी-मोटी मजदूरी भी मिलनी बंद हो गई।

बहन मांगती है चाकलेट तो डांटते हैं पिता

बालक ने कोर्टव में  बताया कि पिता को शराब की आदत है। वे कोई और रोजगार ढूंढने की बदले घर बैठ गये हैं। छोटी बहनें बिस्किट या चाकलेट मांगतीं तो वे गालियां देने लगते है। तीन दिन पहले तो बहनों को थप्पड़ भी जड़ दिया। यह देख मुझसे रहा नहीं गया, उसी समय कुछ कमाई के लिएसे घर से निकल गया। ताकि छोटी बहनों की ख्वाहिशें पूरी कर सकूं। गांव का महेंद्र ढाढ़ी उर्फ गोरका मिला, उसे अपनी मुसीबत सुनाकर काम मांगा तो उसने सौ रुपये दिए और कहा, ये गैलन लो और जिराईनपुरी के पास पहुंचा दो। गैलन की बदबू सूंघ मैंने कहा कि यह तो शराब है। इस पर महेंद्र ने कहा कि तुम बच्चे हो, इस कारण कोई शक नहीं करेगा। वैसे बहुत लोग हैं, इस काम को करने के लिए, यह कहकर वह रुपये वापस लेने लगा। इसके बाद मैं शराब पहुंचाने को राजी हो गया। महेश केवट के साथ बाइक पर गैलन लेकर पीछे बैठ गया। इसी बीच पुलिस ने शक के आधार पर हम दोनों को शराब समेत पकड़ लिया। 
मानवीय फैसले के लिए चर्चित जज मानवेन्द्र मिश्र बालक की आपबीती सुन द्रवित हो गये। जज ने बालक पर दर्ज मामले को ही खारिज कर दिया। उसके व उसके परिवार के संरक्षण की व्यवस्था कर दी।