Bihar: नवादा का लाल चंदन कुमार पुंछ में आतंकवादी हमले में शहीद, एक साल पहले ही हुई थी शादी

बिहार के नवादा के लाल चंदन कुमार अपने पांच साथियों के साथ जम्मू-कश्मीर के पुंछ में आर्मी पर हुए आतंकवादी हमले में शहीद हो गये हैं। नवादा की माटी के लाल चंदन कुमार ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। चंदन कुमार, 89 आर्म्ड रेजिमेंट के जवान थे। वे देश की रक्षा करते हुए चारअन्य जवानों के साथ वीरगति को प्राप्त हुए है।

Bihar: नवादा का लाल चंदन कुमार पुंछ में आतंकवादी हमले में शहीद, एक साल पहले ही हुई थी शादी

पटना। बिहार के नवादा के लाल चंदन कुमार अपने पांच साथियों के साथ जम्मू-कश्मीर के पुंछ में आर्मी पर हुए आतंकवादी हमले में शहीद हो गये हैं। नवादा की माटी के लाल चंदन कुमार ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। चंदन कुमार, 89 आर्म्ड रेजिमेंट के जवान थे। वे देश की रक्षा करते हुए चारअन्य जवानों के साथ वीरगति को प्राप्त हुए है।

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नारोमुरार गांव के मौलेश्वर सिंह और जयंती देवी की तीन संतानो में चंदन कुमार दूसरे नंबर पर थे। चंदन के पिता गांव में ही खेतीबारी करते हैं। आर्मी जवान चंदन कुमार की प्राथमिक शिक्षा गांव में ही हुई थी। पांच वर्ष पूर्व आर्मी में भर्ती हुए थे। जबकि एक वर्ष पहले इनकी शादी धूमधाम से हुई थी। जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में गुरुवार को घने जंगल के बीच से गुजर रहे सेना के वाहनों पर आतंकियों ने घात लगाकर हमला कर दिया। इस हमले में चार जवान बलिदान और दो गंभीर रूप से जख्मी हो गये। घायलों को इलाज के लिए आर्मी हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया है। जम्मू-कश्मीर के राजौरी में 21 दिसंबर आतंकियों के कायराना हरकत के शिकार हुए देश के पांचों जवानों का पार्थिव शरीर उनके परिजनों के पास भेज दिया गया है। जवान शहीदों में उत्तराखंड के दो कानुपर के एक और एक बिहार का जवान शामिल है। 
किसी के घर बजने वाली थी शहनाई, तो किसी ने पिता से किया था वादा
जम्मू-कश्मीर के पूंछ में 21 दिसंबर को आतंकियों ने घात लगाकर सेना के दो वाहनों पर हमला किया, जिसमें चार जवान शहीद हो गये। शहीद जवानों का पार्थिव शरीर उनके परिवार के पास रवाना कर दिये गये। इस घटना के बाद शहीदों के घरवाले, परिजन और दोस्तों के बीच शोक की लहर है। इनमें से एक शहीद की जल्द ही शादी होने वाली थी।

चंदन कुमार की डेढ़ साल पहले ही हुई थी शादी
आतंकी हमले में बिहार के नवादा के वारिसलीगंज ब्लॉक के नारोमुरार गांव के राइफलमैन चंदन कुमार भी शहीद हो गये हैं। चंदन के परिवार में उनके माता-पिता और उनके दो भाई हैं। चंदन के बड़े भाई जीवन कुमार ही पूरा घर संभालते हैं। छोटा भाई अभिनंदन गांव में ही राशन की दुकान चलाता है। डेढ़ साल पहले धूमधाम से चंदन की शादी की थी। चंदन की वाइफ और मां का रो-रोकर बुरा हाल है। चंदन  ने 2017 में इंडियन आर्मी ज्वाइन की थी।
गौतम की शादी की तैयारियों के बीच छाया मातम
उत्तराखंड के गौतम भी बलिदान हो गये। गौतम 30 नवंबर को ही छुट्टी पर आए थे और 16 दिसंबर को ड्यूटी पर वापसी की थी। 11 मार्च को उनकी शादी होने वाली थी, जिसको लेकर परिवार ने तैयारियां शुरू कर दी थी। गौतम के शहीद होने की खबर मिलते ही उनके परिवार के साथ ही उनकी मंगेतर और उनका परिवार टूट गया है। सुनहरे सपने देखने वालों के हाथों से नियति ने उन्हें छीन लिया। गौतम के परिवार में उनके बड़े भाई राहुल, मां और दो बहनें हैं।
दो मासूम बेटियों को छोड़ गये चमोली के बीरेंद्र
आतंकी हमले में उत्तराखंड के चमोली जिले में नारायणगढ़ विकासखंड के बमियाला निवासी बीरेंद्र सिंह ने भी अपने प्राणों की आहुति दे दी है। उन्होंने 2010 में आर्मी की 15 गढ़वाल राइफल में बतौर राइफलमैन भारतीय सेना ज्वाइन की थी। वर्तमान में वह भी पुंछ में तैनात थे। बीरेंद्र के बड़े भाई धीरेंद्र सिंह भी आईटीबीपी में तैनात हैं। बीरेंद्र छह जनवरी को छुट्टी पर आने वाले थे। उससे पहले उन्हें यह खबर मिल गई। बलिदानी अपने पीछे अपनी वाइफ और दो मासूम बेटियां छोड़ गये हैं। 
कानपुर के लाल ने करन कुमार यादव दी कुर्बानी
कश्मीर के पुंछ सेक्टर में गुरुवार को घने जंगल से गुजरते सेना के वाहनों पर हुए आतंकी हमले में बलिदान हुए जवानों में कानपुर का करन कुमार यादव भी है। चौबेपुर के भाऊपुर गांव के रहने वाले करन कुमार यादव के बलिदान होने की खबर मिलते ही गांव में मातम छा गया है। करन सिंह अपने पीछे एक हंसता-खेलता परिवार छोड़ गए। उनके परिवार में उनके माता-पिता, एक भाई, दो बहनें और दो मासूम बच्चे हैं। शहीद करन सिंह अगस्त में आखिरी बार छुट्टी पर घर आए थे और अपने पिता से वादा किया था कि वह फरवरी में लंबी छुट्टी लेकर घर आएंगे, लेकिन उसके पहले परिवार के पास उनका पार्थिव शरीर पहुंच गया।  करन सिंह यादव 19 वर्ष की उम्र में जुलाई 2013 में 48 राष्ट्रीय राइफल्स रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। 14 महीने पहले पहले ही राजस्थान से उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर में हुई थी।