AAP में सबसे बड़ी टूट! राघव चड्ढा समेत 7 राज्यसभा सांसद BJP में शामिल, पंजाब चुनाव से पहले केजरीवाल को बड़ा झटका

पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। राघव चड्ढा, स्वाति मालीवाल समेत 7 राज्यसभा सांसदों ने भाजपा का दामन थाम लिया। दो-तिहाई विलय के चलते उनकी सदस्यता भी सुरक्षित रह सकती है।

AAP में सबसे बड़ी टूट! राघव चड्ढा समेत 7 राज्यसभा सांसद BJP में शामिल, पंजाब चुनाव से पहले केजरीवाल को बड़ा झटका
नीतीन नबीन के साथ तीनों सांसद।

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) को अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के युवा चेहरे और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने छह अन्य सांसदों के साथ AAP छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। इस घटनाक्रम ने न केवल दिल्ली की राजनीति को हिला दिया है, बल्कि राज्यसभा में AAP के अस्तित्व पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा करते हुए कहा कि राज्यसभा में AAP के कुल 10 सांसदों में से 7 सांसदों ने भाजपा में विलय का निर्णय लिया है और इसके लिए हस्ताक्षरित पत्र राज्यसभा के सभापति को सौंप दिया गया है।

कौन-कौन सांसद हुए BJP में शामिल

भाजपा में शामिल होने वाले सांसदों में प्रमुख नाम हैं— राघव चड्ढा, स्वाति मालीवाल, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता व  विक्रमजीत सिंह साहनी। इन सात सांसदों के भाजपा में जाने से राज्यसभा में AAP के केवल 3 सांसद ही बचेंगे।

दो-तिहाई फॉर्मूला: कैसे बच जाएगी सदस्यता?

संविधान की दसवीं अनुसूची (Anti-Defection Law) के तहत यदि किसी दल के सदन के कम से कम दो-तिहाई सदस्य एक साथ दूसरी पार्टी में विलय करते हैं, तो उन पर दल-बदल विरोधी कानून लागू नहीं होता। यानी, AAP के 10 सांसदों में से 7 सांसदों के एक साथ भाजपा में शामिल होने से उनकी राज्यसभा सदस्यता सुरक्षित रह सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक बेहद रणनीतिक और कानूनी रूप से सोचा-समझा कदम है।

राज्यसभा में BJP और AAP की नई स्थिति

इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बाद— BJP के राज्यसभा सांसद: 106 से बढ़कर 113 हो गयी है। AAP के राज्यसभा सांसद: 10 से घटकर सिर्फ 3 रह गये हैं। इससे विपक्षी राजनीति में AAP की ताकत काफी कमजोर हो जाएगी।

राघव चड्ढा ने क्यों छोड़ी AAP?

राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ते हुए बड़ा बयान दिया— “मैं उनकी दोस्ती के काबिल नहीं था, क्योंकि मैं उनके गुनाहों में शामिल नहीं था।” हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर किसी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को अरविंद केजरीवाल और पार्टी नेतृत्व पर सीधा हमला माना जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की तारीफ करते हुए कहा कि वे जनता के मुद्दे संसद में मजबूती से उठाते रहेंगे।

स्वाति मालीवाल पहले से थीं नाराज

स्वाति मालीवाल लंबे समय से AAP नेतृत्व से नाराज चल रही थीं। मुख्यमंत्री आवास में उनके साथ हुई कथित मारपीट की घटना के बाद उन्होंने खुलकर अरविंद केजरीवाल और पार्टी पर सवाल उठाए थे। इसके बाद से वह लगातार पार्टी लाइन से अलग बयान देती रही थीं।

क्या राघव चड्ढा के जाने से AAP को बड़ा नुकसान?

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार राघव चड्ढा का जाना प्रतीकात्मक रूप से बड़ा झटका है। वे AAP के सबसे चर्चित युवा चेहरों में शामिल रहे हैं। हालांकि उनकी जमीनी पकड़ को लेकर हमेशा सवाल उठते रहे, लेकिन उनकी संसदीय छवि और मीडिया प्रभाव पार्टी के लिए महत्वपूर्ण था। संदीप पाठक और अशोक मित्तल का जाना भी केजरीवाल के लिए व्यक्तिगत और रणनीतिक झटका माना जा रहा है।

पंजाब चुनाव पर पड़ेगा सीधा असर

पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे समय में पार्टी के शीर्ष सांसदों का भाजपा में जाना AAP के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है। विशेष रूप से पंजाब से जुड़े सांसदों के जाने से संगठनात्मक असर गहरा हो सकता है। भाजपा इस मौके को पंजाब में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रही है।

क्या AAP अदालत जाएगी?

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि AAP इस विलय को अदालत में चुनौती दे सकती है। पार्टी यह दलील दे सकती है कि मूल दल में विभाजन नहीं हुआ, बल्कि यह व्यक्तिगत दल-बदल है। हालांकि अंतिम फैसला राज्यसभा के सभापति और संवैधानिक व्याख्या पर निर्भर करेगा।