झारखंड में इंसानियत की मिसाल! दारोगा की 14 माह की बेटी के इलाज के लिए सरकार ने दी ₹9 करोड़ की मंजूरी
झारखंड सरकार ने दारोगा अभिजीत कुमार की 14 माह की बेटी वामिका पटेल के एसएमए टाइप-1 इलाज के लिए ₹9 करोड़ मंजूर किए। जानिए पूरा मामला।
रांची। (Threesocieties.com Desk): झारखंड सरकार ने संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण का परिचय देते हुए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। गिरिडीह जिले के निमियाघाट थाने में पदस्थापित दारोगा अभिजीत कुमार की 14 माह की मासूम बेटी वामिका पटेल के इलाज के लिए राज्य कैबिनेट ने ₹9 करोड़ की भारी-भरकम राशि मंजूर कर दी है।
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यह राशि राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत दी जाएगी, जिससे बच्ची का इलाज दिल्ली के एम्स में संभव हो सकेगा। वामिका एक बेहद दुर्लभ और जानलेवा बीमारी स्पाइनल मस्क्यूलर एट्रोफी (SMA) टाइप-1 से पीड़ित है।
क्या है SMA टाइप-1 बीमारी?
स्पाइनल मस्क्यूलर एट्रोफी (SMA) टाइप-1 एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। यह बीमारी शिशुओं के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती है और समय पर इलाज नहीं मिलने पर जान का खतरा भी रहता है।
एम्स दिल्ली ने दिया था इलाज का प्रस्ताव
दिल्ली एम्स ने वामिका के इलाज के लिए करीब ₹9 करोड़ खर्च का अनुमान दिया था। इससे पहले इस बीमारी के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाला जोलगेनस्मा इंजेक्शन करीब ₹16 करोड़ का बताया जाता है, जो दुनिया की सबसे महंगी दवाओं में शामिल है। राज्य सरकार की मंजूरी के बाद अब इस बच्ची के इलाज की राह आसान हो गई है।
पुलिस एसोसिएशन और नेताओं ने जताया आभार
इस फैसले के बाद झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, डीजीपी तदाशा मिश्रा और डीआईजी (बजट) संध्या रानी मेहता का आभार जताया है। वहीं विधायक कल्पना सोरेन ने भी सरकार के इस निर्णय को मानवीय और सराहनीय कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला न सिर्फ एक परिवार के लिए उम्मीद की किरण है, बल्कि पूरे राज्य के लिए एक मिसाल भी है।
पहले भी की गई थी आर्थिक मदद की मांग
गौरतलब है कि झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने 19 नवंबर 2025 को डीजीपी को आवेदन देकर वामिका के इलाज के लिए आर्थिक सहयोग की मांग की थी। इसके बाद लगातार प्रयासों और पहल के बाद यह बड़ी मंजूरी मिली है।
सरकार का संदेश: हर जिंदगी की कीमत है
झारखंड सरकार का यह फैसला यह दिखाता है कि राज्य अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों के प्रति कितनी संवेदनशील है। ₹9 करोड़ की यह मंजूरी सिर्फ एक आर्थिक मदद नहीं, बल्कि मानवता और जिम्मेदारी का प्रतीक बनकर सामने आई है।






