गोल्फ ग्राउंड में श्री श्री श्याम भक्त मंडल हीरापुर द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का तीसरा दिन

धनबाद: गौरव कृष्ण जी महाराज ने कहा है कि जैसे सावन आता है मेघों का मल्हार लेकर, जैसे फागो आता है रंगों का त्योहार लेकर, वैसे ही संत आते हैं परमात्मा का प्यार लेकर. क्रोध करना गलत है.क्रोध के वश में जाना गलत है. लेकिन अगर क्रोध आये तो इसे रोकना मत. जिसके ऊपर आये आने देना. क्रोध आये तो आंखें लाल मत करना. वाणी का संयम मत खोना. हाथ-पैर का प्रयोग मत करना. क्रोध बुरा नहीं है. शरीर का साथ क्रोध को मिलना बुरा है. हमें क्रोध आता है तो हम क्रोध के वश में चले जाते हैं. अभिमानी व्यक्ति सदैव दूसरों का अपमान करता है. कथा वाचक गौरव कृष्ण गोस्वामी ने गोल्फ मैदान में श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन शनिवार को व्यास पीठ से भक्तों से यह बातें कही.
गौरव कृष्ण जी ने कहा कि चाहे भागवत, रामायण या कोई भी धार्मिक ग्रंथ हो, सब सच्चे संत से मिलाते हैं.गौरव कृष्ण जी महाराज ने कहा कि जो सिर अपने बड़ों के आगे नहीं झुकता वह कटता है.हमें अपने बड़ों के आगे मस्तक झुकाना चाहिए.पहले घर के मुख्य द्वार की चौखट नीची रखी जाती थी. ताकि जानेवाला और आनेवाला दोनों झुक कर घर में प्रवेश करे. हमारी संस्कृति विनम्रता सिखाती है. अकड़ना नहीं. अकड़नेवाला नहीं झुकनेवाला बड़ा होता है. जिससे मिलकर सामने वाला अपने को छोटा समझने लगे, भागवत की नजर बड़ा नहीं है. बड़ा तो वह है जिसके जीवन में विनम्रता है.मानव अपनी युवावस्था,शक्ति संसार पर लुटा देता है. जब वृद्धावस्था में आता है तो अपने को भगवान के चरणों में सौंपता है. उनकी सोच होती है अंतिम समय में भगवान का भजन करेंगे. लेकिन ऐसा भाव मत रखना.प्रभु के चरणों में आनेवाले का जीवन धन्य हो जाता है. जिस पर प्रभु की कृपा हो जाती है उस पर सबकी कृपा हो जाती है.गुरु कृपा के बिना मार्गदर्शन प्राप्त करना कठिन है. सद्गुरु हमारी मंजिल नहीं हैं. लेकिन उनके बिना भी मंजिल नहीं है. भागवत इस बात पर जोर देती है कि अपने सद्गुरु पर पूर्ण भरोसा रखो.
गौरव कृष्ण जी ने कहा कि जब हनुमानजी लंका गए तब लंका में चारों ओर अत्याचार था. लंका में केवल विभिषण ने अपने घर के मुख्य द्वार पर श्री राम का नाम लिखा था. आंगन में तुलसी का पौधा था। जब हनुमानजी से उनकी मुलाकात हुई तब विभिषण ने कहा कि जब मुझे राम का सेवक मिल गया है तो अब श्री राम भी मिलेंगे.अंतिम समय में परिक्षीत राजा को श्री शुकदेव जी जैसे सदगुरु मिल गये. श्री शुकदेव जी कोई और नहीं बल्कि श्री नंदनंदन स्वरूप श्री कृष्ण ही थे। सदगुरु बिना जीवन में मंजिल नहीं मिलती। इसलिए जिसे भी अपना सदगुरु माने, उनपर पूर्ण विश्वास करो.सावन मेघों का मल्हार लेकर आता है. फागुन रंगो का त्योहार लेकर आता है. और संत परमात्मा का प्यार लेकर आते हैं.इसलिए जब जीवन में संत आते हैं तो यह संकेत होता है परमात्मा से मिलने का. जिस पर भागवत की कृपा होती है उसके जीवन का मार्ग परिवर्तित होने लगता है.
कथा में एमपी पशुपतिनाथ सिंह, बीजेपी जिलाध्यक्ष चन्द्र शेखर सिंह ने भी भागवत की वंदना की और श्री गौरव कृष्ण जी से आशीर्वाद प्राप्त किया.भागवत कथा में मुख्य यजमान रमेश रिटोलिया, शंभू नाथ अग्रवाल, रामबाबू अग्रवाल, कृष्ण गोपाल अग्रवाल, दिनेश प्रधान एवं संतोष अग्रवाल उपस्थित थे. समारोह में श्री श्री श्याम भक्त मंडल हीरापुर धनबाद के कृष्णा अग्रवाल, सुशील अग्रवाल, चेतन गोयनका, विकास अग्रवाल, सुशील अग्रवाल, संजय गोयल, विक्की अग्रवाल, मिट्ठू सरिया, सांवर मल पोद्दार, बृज मोहन अग्रवाल, राममोहन सिंह, दिलीप गोयल, बासुदेव कारीवाल सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे.