बिहार विधान परिषद चुनाव का बिगुल: 10 सीटों पर महासंग्राम, नीतीश कुमार की सीट पर होगा उपचुनाव

भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार विधान परिषद की 9 सीटों और एक उपचुनाव के लिए चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया है। 18 जून 2026 को मतदान और मतगणना होगी। सम्राट चौधरी, संजय मयूख समेत कई नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। नीतीश कुमार के इस्तीफे से खाली सीट पर भी उपचुनाव कराया जाएगा।

बिहार विधान परिषद चुनाव का बिगुल: 10 सीटों पर महासंग्राम, नीतीश कुमार की सीट पर होगा उपचुनाव
10 सीटों पर चुनावी रण, NDA-RJD की बेचैनी।
  • NDA में बढ़ी हलचल… ‘सम्राट’ टीम के 9 चेहरों की साख दांव पर

पटना (Threesocieties.com Desk): बिहार की राजनीति में एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ने वाला है। भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार विधान परिषद की 9 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव और एक सीट पर उपचुनाव की घोषणा कर दी है। चुनाव की तारीख सामने आते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपनी रणनीति तेज कर दी है।

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इस चुनाव की सबसे बड़ी चर्चा भाजपा के भीतर उभरे उस नए शक्ति केंद्र को लेकर है, जिसे राजनीतिक गलियारों में अब “सम्राट टीम” कहा जा रहा है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहते सम्राट चौधरी के साथ संगठन में पसीना बहाने वाले कई नेताओं का कद अब सत्ता में तेजी से बढ़ा है और अब विधान परिषद चुनाव उनके राजनीतिक प्रभाव की अग्निपरीक्षा माना जा रहा है।

18 जून को मतदान, उसी दिन आएंगे नतीजे

निर्वाचन आयोग के अनुसार चुनाव की अधिसूचना 1 जून को जारी होगी। उम्मीदवार 8 जून तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। 9 जून को स्क्रूटनी होगी, जबकि 11 जून तक नाम वापसी का मौका रहेगा। 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान कराया जाएगा और उसी दिन मतगणना भी होगी। पूरी चुनाव प्रक्रिया 20 जून तक पूरी कर ली जाएगी।

नीतीश कुमार की खाली सीट पर भी होगा उपचुनाव

राज्यसभा सदस्य बनने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उनकी खाली हुई सीट पर भी उपचुनाव कराया जाएगा। इस सीट पर चुने जाने वाले सदस्य का कार्यकाल 6 मार्च 2030 तक रहेगा। इस सीट को लेकर जदयू और भाजपा दोनों खेमों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह उपचुनाव NDA के अंदर भविष्य के शक्ति संतुलन का संकेत भी दे सकता है।

जिन नेताओं का कार्यकाल हो रहा समाप्त

28 जून 2026 को जिन विधान पार्षदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें कई बड़े और प्रभावशाली नाम शामिल हैं—

डॉ. कुमुद वर्मा
प्रो. गुलाम गौस
मो. फारूक
भीष्म साहनी
श्रीभगवान सिंह कुशवाहा
संजय मयूख
समीर कुमार सिंह
सम्राट चौधरी
सुनील कुमार सिंह

इनमें भाजपा और NDA के कई ऐसे चेहरे हैं, जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में संगठन और सरकार दोनों में अपनी मजबूत भूमिका दर्ज कराई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले यह MLC चुनाव NDA के भीतर नेतृत्व संतुलन तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। भाजपा में संगठन बनाम सत्ता की राजनीति के बीच यह चुनाव कई संकेत दे सकता है।

भाजपा-जदयू में टिकट को लेकर बढ़ेगी खींचतान

विधान परिषद चुनाव की घोषणा के साथ ही NDA के भीतर सीट शेयरिंग और टिकट वितरण को लेकर मंथन तेज हो गया है। भाजपा अपने मजबूत चेहरों को दोबारा मौका देना चाहती है, जबकि जदयू भी अपने समीकरण साधने में जुटी है। उधर, राजद और कांग्रेस भी इस चुनाव को 2026 विधानसभा चुनाव के सेमीफाइनल की तरह देख रहे हैं। विपक्ष NDA के भीतर संभावित असंतोष को मुद्दा बनाने की तैयारी में है।

बिहार की राजनीति में बढ़ेगी सरगर्मी

18 जून का यह चुनाव केवल विधान परिषद की सीटों तक सीमित नहीं माना जा रहा। इसे बिहार NDA की आंतरिक राजनीति, नेतृत्व संतुलन और भविष्य की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिक गई है कि भाजपा “सम्राट मॉडल” पर आगे बढ़ती है या फिर पुराने समीकरणों को साधने की कोशिश करती है।