JDU में ‘निशांत युग’ की शुरुआत! नीतीश के बाद बेटे पर दांव, सभी बड़े नेताओं ने कहा- वही हैं पार्टी का भविष्य
पटना में आयोजित जेडीयू राष्ट्रीय परिषद की बैठक में नीतीश कुमार को सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार को जेडीयू का भविष्य बताते हुए उनके नेतृत्व पर भरोसा जताया। साथ ही पार्टी संविधान में बदलाव, ट्रस्ट गठन और संगठन विस्तार को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।
Highlights
- जेडीयू राष्ट्रीय परिषद की बैठक में नीतीश कुमार सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए
- उमेश कुशवाहा बिहार प्रदेश अध्यक्ष पद पर बरकरार रहेंगे
- नेताओं ने कहा कि निशांत अगले 30-40 वर्षों तक पार्टी को नेतृत्व दे सकते हैं
- पार्टी संविधान में बदलाव और संपत्तियों के लिए ट्रस्ट गठन हेतु नीतीश कुमार को अधिकृत किया गया
पटना (Threesocieties.com Desk): जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) की राष्ट्रीय परिषद और राज्य परिषद की बैठक ने बिहार की राजनीति में एक बड़ा संकेत दे दिया है। पार्टी ने जहां सर्वसम्मति से नीतीश कुमार को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनकर संगठन की कमान एक बार फिर उनके हाथों में सौंप दी, वहीं पहली बार लगभग सभी वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक मंच से स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार को पार्टी का भविष्य घोषित कर दिया।
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पटना स्थित कर्पूरी सभागार में आयोजित बैठक में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, मंत्री अशोक चौधरी, लेशी सिंह, मदन सहनी और अन्य नेताओं ने एक स्वर में कहा कि निशांत कुमार आने वाले वर्षों में पार्टी को नई दिशा देंगे और संगठन को मजबूत बनाएंगे।
नीतीश के बाद कौन? परिषद बैठक से मिला स्पष्ट संकेत
लंबे समय से बिहार की राजनीति में यह सवाल चर्चा का विषय रहा है कि नीतीश कुमार के बाद जेडीयू का नेतृत्व कौन करेगा। रविवार की बैठक में नेताओं के बयानों ने इस सवाल का लगभग स्पष्ट जवाब दे दिया। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि निशांत कुमार में पार्टी को आगे ले जाने की क्षमता है और उन्हें संगठन में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि निशांत आने वाले 30 से 40 वर्षों तक पार्टी का मजबूत नेतृत्व कर सकते हैं। बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने भी तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इस प्रस्ताव का स्वागत किया।
नीतीश कुमार फिर बने राष्ट्रीय अध्यक्ष
राष्ट्रीय परिषद की बैठक में सर्वसम्मति से नीतीश कुमार को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। वहीं बिहार इकाई की कमान उमेश सिंह कुशवाहा के हाथों में ही बनी रहेगी। राष्ट्रीय परिषद ने उनके प्रदेश अध्यक्ष पद पर बने रहने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी। इस मौके पर नीतीश कुमार ने कहा कि अब वे संगठनात्मक कार्यों को अधिक समय देंगे और राज्य के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी पार्टी संगठन को मजबूत बनाने के लिए सक्रिय रहेंगे।
निशांत बोले- विश्वास पर खरा उतरूंगा
बैठक में पहली बार बड़े राजनीतिक मंच पर केंद्र में रहे निशांत कुमार ने वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं का आभार जताया। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने उन पर जो भरोसा जताया है, वे उस विश्वास पर खरे उतरने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि संगठन के विस्तार और मजबूती के लिए वे बिहार के विभिन्न जिलों का दौरा करेंगे तथा युवाओं, महिलाओं और गरीब वर्गों तक पार्टी की नीतियों को पहुंचाएंगे।निशांत ने कहा कि युवाओं को रोजगार, महिलाओं को आत्मनिर्भरता और बुजुर्गों को सुरक्षित सामाजिक जीवन उपलब्ध कराना पार्टी की प्राथमिकता रहेगी।
संविधान में बदलाव और ट्रस्ट गठन का फैसला
राष्ट्रीय परिषद ने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को लेकर भी महत्वपूर्ण फैसले लिए। परिषद ने पार्टी संविधान में आवश्यक संशोधन करने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को अधिकृत कर दिया।इसके अलावा पार्टी की चल-अचल संपत्तियों के प्रबंधन के लिए एक ट्रस्ट गठित करने का निर्णय लिया गया। ट्रस्ट के गठन की जिम्मेदारी भी राष्ट्रीय अध्यक्ष को सौंपी गई है।बैठक में कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को नियमित बनाने और जिला स्तर पर इंटरनेट मीडिया सेल को अधिक सक्रिय करने पर भी जोर दिया गया।
विकसित बिहार का लक्ष्य
राष्ट्रीय परिषद को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि एनडीए सरकार विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ा रही है। सात निश्चय पार्ट-3 की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है।उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार के सहयोग और राज्य सरकार की योजनाओं के बल पर अगले पांच वर्षों में बिहार विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल होगा। साथ ही युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार और नौकरी देने के लक्ष्य को भी पूरा किया जाएगा।
चार महत्वपूर्ण प्रस्ताव हुए पारित
राष्ट्रीय परिषद की बैठक में चार अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई—
नीतीश कुमार द्वारा मुख्यमंत्री पद छोड़कर सत्ता हस्तांतरण को गठबंधन राजनीति का अनूठा उदाहरण बताया गया।
सामाजिक न्याय, स्वच्छ राजनीति और ईमानदारी की उनकी विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।
पार्टी संविधान में संशोधन के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष को अधिकृत किया गया।
पार्टी की संपत्तियों के प्रबंधन के लिए ट्रस्ट गठन का निर्णय लिया गया।
राजनीतिक संदेश साफ
जेडीयू की राष्ट्रीय परिषद की बैठक से एक बात स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आई है कि पार्टी फिलहाल संगठनात्मक रूप से पूरी तरह नीतीश कुमार के नेतृत्व में आगे बढ़ेगी, लेकिन भविष्य के नेतृत्व को लेकर निशांत कुमार को केंद्र में लाने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। वरिष्ठ नेताओं के एकजुट समर्थन ने बिहार की राजनीति में नए समीकरणों और संभावनाओं पर चर्चा तेज कर दी है।






