भारत-नेपाल सीमा पर बड़ा खुलासा: 1155 पिलर गायब, 1359 अतिक्रमण चिन्हित; सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। बिहार में 735 किमी लंबी सीमा पर 1155 पिलर गायब, 317 क्षतिग्रस्त और 1359 अतिक्रमण चिन्हित पाए गए हैं। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सीमा सुरक्षा, संदिग्ध प्रतिष्ठानों और बैंक कर्मियों के सत्यापन को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं।
पटना (Threesocieties.com Desk): भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। बिहार से सटी 735 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लगे सीमा स्तंभों (पिलरों) की स्थिति चिंताजनक पाई गई है। सरकारी समीक्षा बैठक में सामने आया कि सीमा पर लगे 1155 पिलर गायब हैं, जबकि 317 पिलर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इसके अलावा 100 नए पिलरों का निर्माण कार्य अभी भी अधूरा है।
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गुरुवार को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आयोजित भारत-नेपाल सीमा प्रबंधन एवं सुरक्षा समीक्षा बैठक में यह जानकारी सामने आई। बैठक में सीमा सुरक्षा, अतिक्रमण, संदिग्ध गतिविधियों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े मामलों पर विस्तार से चर्चा हुई।
सात जिलों और बगहा पुलिस जिले पर विशेष नजर
बिहार की नेपाल से लगने वाली सीमा पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज जिलों से होकर गुजरती है। इसके अलावा बगहा पुलिस जिला भी इस सीमा क्षेत्र में आता है। बैठक में बताया गया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच जिला प्रशासन और एसएसबी संयुक्त रूप से कर रहे हैं। जांच के दौरान कई प्रतिष्ठान संदिग्ध पाए गए हैं।
किन जिलों में मिले संदिग्ध प्रतिष्ठान?
सीतामढ़ी – 28
किशनगंज – 28
पश्चिम चंपारण – 9
मधुबनी – 6
सुपौल – 6
अररिया – 5
पूर्वी चंपारण – 5
इन प्रतिष्ठानों की गतिविधियों की विस्तृत जांच जारी है।
अररिया में संदिग्ध विदेशी निवेश से बढ़ी चिंता
बैठक में अररिया जिले में संदिग्ध विदेशी निवेश का मामला भी सामने आया। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयकर विभाग के अन्वेषण निदेशक को इसकी जांच सौंपने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों का मानना है कि सीमा क्षेत्र में होने वाले वित्तीय लेन-देन पर कड़ी निगरानी आवश्यक है।
बैंक कर्मियों का होगा पुलिस सत्यापन
सीमा पार होने वाले वित्तीय अपराधों और नकली नोटों की तस्करी को रोकने के लिए भी सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सीमावर्ती जिलों में स्थित सभी बैंकों के कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन कराया जाएगा। साथ ही सीमा क्षेत्र की 1292 बैंक शाखाओं में नकली नोट पहचानने वाली मशीनें लगाने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि 1259 शाखाओं में यह मशीनें पहले ही स्थापित की जा चुकी हैं। इसके अलावा 10 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की अचल संपत्ति के निबंधन में पैन कार्ड को अनिवार्य कर दिया गया है ताकि संदिग्ध निवेश और मनी लॉन्ड्रिंग पर रोक लगाई जा सके।
नो मेंस लैंड पर अतिक्रमण का मामला
बैठक में भारत-नेपाल सीमा के बिहार क्षेत्र में स्थित नो मेंस लैंड पर अतिक्रमण को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई। जिलों से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार सीमा क्षेत्र में 1359 अतिक्रमण चिन्हित किए गए थे, जिनमें से 1349 को हटाया जा चुका है। वहीं सरकारी भूमि पर 996 अतिक्रमणों की पहचान हुई थी, जिनमें से अभी 117 अतिक्रमण हटाए जाने बाकी हैं। मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि सीमा के 15 किलोमीटर क्षेत्र में अतिक्रमण से जुड़ी रिपोर्टों का स्वतंत्र सत्यापन कराया जाए और शेष अतिक्रमणों को जल्द से जल्द हटाया जाए।
सीमा सुरक्षा को लेकर सरकार सतर्क
सीमा पर बड़ी संख्या में पिलरों का गायब होना, नो मेंस लैंड पर अतिक्रमण और संदिग्ध आर्थिक गतिविधियों का सामने आना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि सीमा सुरक्षा से जुड़े हर पहलू की निगरानी और कार्रवाई को और सख्त किया जाएगा। भारत-नेपाल की खुली सीमा को देखते हुए यह समीक्षा आने वाले दिनों में सीमा प्रबंधन और सुरक्षा रणनीति को और मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।






