ईरान ने फिर बंद किया होर्मुज स्ट्रेट, लेबनान हमलों के बाद बढ़ा तनाव; क्या टूट जाएगा अमेरिका-ईरान समझौता?

लेबनान में इजराइली हमलों और सीजफायर उल्लंघन के आरोपों के बीच ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट फिर बंद कर दिया है। अमेरिका-ईरान समझौते पर संकट गहराने लगा है। जानिए मिडिल ईस्ट के ताजा घटनाक्रम, तेल बाजार पर असर और कूटनीतिक हलचल की पूरी रिपोर्ट।

ईरान ने फिर बंद किया होर्मुज स्ट्रेट, लेबनान हमलों के बाद बढ़ा तनाव; क्या टूट जाएगा अमेरिका-ईरान समझौता?
अमेरिका-ईरान समझौते पर मंडराया खतरा।

तेहरान/तेल अवीव/वॉशिंगटन डीसी(Threesocieties.com Desk): पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए समझौते के बावजूद ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट को एक बार फिर बंद करने का ऐलान कर दिया है। तेहरान ने इसके लिए लेबनान में इजराइल की सैन्य कार्रवाई और युद्धविराम उल्लंघन को जिम्मेदार ठहराया है।

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ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने सरकारी टेलीविजन पर घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिका समझौते की पहली शर्त लागू कराने में विफल रहा है और इजराइल लगातार दक्षिणी लेबनान में सैन्य हमले कर रहा है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा बंद करने का निर्णय लिया गया है।

सीजफायर के कुछ घंटों बाद फिर भड़की हिंसा

अमेरिकी मध्यस्थता में इजराइल और लेबनान के बीच युद्धविराम की घोषणा हुई थी, लेकिन यह ज्यादा देर नहीं टिक सका। रिपोर्टों के अनुसार, सीजफायर लागू होने के लगभग 8 घंटे बाद ही दक्षिणी लेबनान में फिर से संघर्ष शुरू हो गया। इजराइली ड्रोन और तोपखाने की कार्रवाई में कम से कम 16 लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। इसके बाद पूरे क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया।

नेतन्याहू का सख्त संदेश

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका देश अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि गाजा और लेबनान में सैन्य अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक सुरक्षा खतरे पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाते। नेतन्याहू के इस बयान को ईरान ने क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाला कदम बताया है।

दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर संकट

होर्मुज स्ट्रेट को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की लाइफलाइन माना जाता है। खाड़ी देशों से निर्यात होने वाले तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है तो—

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है।
एशिया और यूरोप की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
वैश्विक शिपिंग और व्यापार लागत बढ़ सकती है।
निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल बन सकता है।

बताया जा रहा है कि खाड़ी क्षेत्र में सैकड़ों जहाज और हजारों नाविक अब भी आवाजाही सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।

अमेरिका-ईरान वार्ता पर भी संकट

स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। हालांकि दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए संपर्क में हैं, लेकिन लेबनान की स्थिति ने माहौल को जटिल बना दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका दबाव में नहीं बल्कि अपनी शर्तों पर बातचीत कर रहा है। वहीं अमेरिकी प्रशासन ने ईरान को आर्थिक राहत देने के किसी भी फैसले को शर्तों से जोड़ दिया है।

कतर के जरिए राहत फंड पर चर्चा

रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका और कतर एक ऐसी योजना पर काम कर रहे हैं जिसके तहत ईरान को मानवीय सहायता के लिए अरबों डॉलर के फ्रीज्ड फंड तक सीमित पहुंच दी जा सकती है। इस राशि का उपयोग खाद्य सामग्री, दवाइयों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीद के लिए किया जाएगा। हालांकि इस प्रस्ताव पर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है।

क्या फिर युद्ध के मुहाने पर पहुंच गया मध्य पूर्व?

विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट का दोबारा बंद होना सिर्फ समुद्री व्यापार का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह अमेरिका, ईरान, इजराइल और लेबनान के बीच बढ़ते अविश्वास का संकेत है। यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए तो यह संकट वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर स्विट्जरलैंड में होने वाली वार्ताओं और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति पर टिकी हुई है।