सारंडा में ‘ऑपरेशन फाइनल स्ट्राइक’! 1 करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा की घेराबंदी, सरेंडर या मुठभेड़ तय
सारंडा जंगल में सुरक्षा बलों ने 1 करोड़ के इनामी माओवादी कमांडर मिसिर बेसरा को घेर लिया है। सरेंडर या मुठभेड़ के बीच फंसे नक्सलियों पर निर्णायक कार्रवाई तेज।
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड के घने और दुर्गम सारंडा जंगल में माओवादियों के खिलाफ चल रहा अब तक का सबसे बड़ा अभियान निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। सुरक्षा बलों ने एक करोड़ के इनामी माओवादी कमांडर मिसिर बेसरा और उसके 25-30 साथियों को चारों ओर से घेर लिया है। हालात ऐसे हैं कि अब उनके पास सिर्फ दो ही विकल्प बचे हैं—आत्मसमर्पण या मुठभेड़।
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सख्त घेराबंदी, हर रास्ता बंद
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, झारखंड जगुआर और कोबरा बटालियन के जवानों ने संयुक्त रूप से इलाके की घेराबंदी कर दी है। जंगल से बाहर निकलने के सभी रास्तों पर कड़ी निगरानी की जा रही है। हथियार, गोला-बारूद और राशन की सप्लाई लाइन पूरी तरह ध्वस्त कर दी गयी है। ड्रोन और इंटेलिजेंस के जरिए लगातार ट्रैकिंग की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि माओवादी अब पूरी तरह दबाव में हैं।
स्पेशल DG का दौरा, ऑपरेशन पर सीधी नजर
18 अप्रैल को CRPF के स्पेशल डीजी दीपक कुमार खुद सारंडा पहुंचे और अतिसंवेदनशील बलिबा कैंप का निरीक्षण किया। जवानों का हौसला बढ़ाया। IED खतरे और भौगोलिक चुनौतियों की समीक्षा की जा रही है। ऑपरेशन को तेजी से अंजाम तक पहुंचाने के निर्देश दिया गया है।
IED का खतरा, लेकिन दबाव लगातार बढ़ रहा
माओवादी हताशा में जंगल के रास्तों में भारी मात्रा में IED बिछा रहे हैं। हाल के दिनों में कुछ जवान घायल भी हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा बल लगातार आगे बढ़ रहे हैं।
कहां फंसा है बेसरा?
पश्चिमी सिंहभूम के छोटानागरा थाना क्षेत्र, बाबूडेरा और कुमडीह के घने जंगल व ओडिशा सीमा पूरी तरह सील ओडिशा पुलिस भी अलर्ट पर है ताकि माओवादी भाग न सकें।
‘बूढ़ा’ की चिट्ठी ने खोली पोल
हाल ही में मारे गए एक करोड़ के इनामी माओवादी प्रशांत बोस उर्फ बूढ़ा की चिट्ठी ने संगठन की कमजोरी उजागर कर दी है। माओवादियों के कमजोर होने की बात स्वीकारकी है। सुरक्षा बलों से लड़ना मुश्किल बताया है। मिसिर बेसरा को आत्मसमर्पण की सलाह दी गयी है। इसके बावजूद बेसरा की ओर से कोई संकेत नहीं मिला है।
‘आखिरी जंग’ की ओर बढ़ता अभियान
झारखंड में माओवाद के खिलाफ यह अभियान निर्णायक साबित हो सकता है। पहले ही इन इलाकों को मुक्त किया जा चुका है: बूढ़ा पहाड़, बुलबुल जंगल, बोकारो, पारसनाथ व हजारीबाग अब सारंडा को पूरी तरह सुरक्षित बनाने की दिशा में यह ऑपरेशन आखिरी कील माना जा रहा है।
क्या होगा अगला कदम?
सुरक्षा बलों ने साफ कर दिया है: हथियार डालो और मुख्यधारा में लौटो, या फिर मुठभेड़ के लिए तैयार रहो। हर गुजरते दिन के साथ माओवादियों की घेराबंदी और सख्त होती जा रही है।






