नेपाल SC का बड़ा फैसला: ₹100 भंसार पर रोक, बॉर्डर बाजारों में लौटी रौनक; भारत-नेपाल के ‘बेटी-रोटी’ रिश्ते को राहत
नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने भारत-नेपाल सीमा से लाए जाने वाले 100 रुपये से अधिक मूल्य के दैनिक उपयोग के सामान पर भंसार (कस्टम शुल्क) वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी है। फैसले के बाद वाल्मीकिनगर, सोनबरसा समेत सीमावर्ती बाजारों में फिर से चहल-पहल बढ़ गई है और लोगों ने इसे ‘बेटी-रोटी’ संबंध की जीत बताया है।
- सीमा पार खरीदारी फिर हुई आसान, सीमावर्ती इलाकों में खुशी की लहर
- वाल्मीकिनगर से सोनबरसा तक व्यापारियों और आम लोगों को बड़ी राहत
पटना (Threesocieties.com Desk): नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने भारत-नेपाल सीमा से आम नागरिकों द्वारा लाए जाने वाले 100 रुपये से अधिक मूल्य के दैनिक उपयोग के सामान पर लगाए गए भंसार (कस्टम शुल्क) की वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत के इस फैसले के बाद सीमावर्ती इलाकों में राहत और खुशी का माहौल है। तराई-मधेश से लेकर वाल्मीकिनगर और सोनबरसा तक बाजारों में फिर से रौनक लौटती दिखाई दे रही है।
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नेपाल सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश हरि प्रसाद फुयाल और टेक प्रसाद ढुंगाना की संयुक्त पीठ ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद कार्यालय, वित्त मंत्रालय और संबंधित सरकारी निकायों को निर्देश दिया कि अंतिम फैसला आने तक दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर सीमा शुल्क नहीं वसूला जाए।
नेपाल सरकार के फैसले के बाद शुरू हुआ था विरोध
दरअसल, नेपाल सरकार ने 2 मई 2082 को जारी अधिसूचना के तहत भारत से नेपाल ले जाए जाने वाले 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर कस्टम शुल्क अनिवार्य कर दिया था। इसके बाद सीमावर्ती इलाकों में विरोध शुरू हो गया था। लोगों का कहना था कि इस फैसले से रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुओं की आवाजाही प्रभावित हो रही है। खासकर उन परिवारों को परेशानी हो रही थी, जिनका जीवन और कारोबार सीमा पार के बाजारों पर निर्भर है।
अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
नेपाल सरकार के फैसले को अधिवक्ता अमितेश पंडित, आकाश महतो, सुयोग सिंह और प्रशांत विक्रम शाह ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया कि यह व्यवस्था सीमा शुल्क अधिनियम 2081 की भावना के खिलाफ है और इससे आम नागरिकों के हित प्रभावित हो रहे हैं। सुनवाई के बाद अदालत ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को गंभीर मानते हुए अंतरिम आदेश जारी किया। अब अंतिम फैसला आने तक नेपाल सरकार उक्त प्रावधान के तहत दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर कस्टम शुल्क नहीं वसूल सकेगी।
वाल्मीकिनगर बॉर्डर पर फिर बढ़ी चहल-पहल
नेपाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वाल्मीकिनगर बॉर्डर पर फिर से भीड़ बढ़ने लगी है। नेपाली नागरिक बड़ी संख्या में भारतीय बाजारों में खरीदारी के लिए पहुंच रहे हैं। इससे स्थानीय व्यापारियों के चेहरे पर भी मुस्कान लौट आई है। नेपाल के लुंबिनी जिला के दांग निवासी साबिन खनाल ने बताया कि वे वर्षों से वाल्मीकिनगर बाजार में खरीदारी करने आते रहे हैं, लेकिन भंसार नियम लागू होने के बाद आना कम हो गया था। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद फिर से सामान्य स्थिति बनने लगी है।
त्रिवेणी निवासी सविता गुरुंग ने कहा कि भारत और नेपाल का रिश्ता केवल दो देशों का नहीं बल्कि “बेटी-रोटी” का संबंध है। दोनों देशों की संस्कृति, खानपान, पहनावा और पारिवारिक रिश्ते एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। ऐसे में इस तरह के नियमों से रिश्तों में खटास आ रही थी।
व्यापारियों को भी मिली बड़ी राहत
वाल्मीकिनगर के व्यवसायी पशुपति प्रसाद ने बताया कि जब से नेपाल सरकार ने 100 रुपये से अधिक के सामान पर भंसार वसूली शुरू की थी, तब से बाजार का कारोबार लगभग ठप हो गया था। नेपाली ग्राहक बाजार आना कम कर दिए थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शनिवार से फिर ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यह फैसला सिर्फ व्यापार के लिए नहीं बल्कि सीमा पार सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।
सोशल मीडिया पर भी फैसले की चर्चा
नेपाल सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की चर्चा सोशल Media पर भी तेजी से हो रही है। लोग इसे आम नागरिकों के हित में बड़ा कदम बता रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि मजबूत और निष्पक्ष न्यायपालिका सरकारों की मनमानी पर रोक लगाने का काम करती है। सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को उम्मीद है कि अंतिम फैसला भी उनके पक्ष में आएगा और भारत-नेपाल के पुराने सामाजिक एवं आर्थिक रिश्ते पहले की तरह मजबूत बने रहेंगे।






