झारखंड में 28 करोड़ का ‘ट्रेजरी स्कैम’: तीन पुलिस कांस्टेबल समेत 5 जेल, जांच अब 4 जिलों में फैली
झारखंड के हजारीबाग में पुलिस अकाउंट सेक्शन से 28 करोड़ की अवैध निकासी का खुलासा, 3 सिपाही और 2 पत्नियां गिरफ्तार। जांच अब पलामू, गढ़वा, लातेहार समेत कई जिलों में फैली, और बड़े खुलासे संभव।
- और बड़े खुलासे के संकेत
- 14 साल से चल रहा था खेल
धनबाद (Threesocieties.com Desk): झारखंड के हजारीबाग में पुलिस विभाग के अकाउंट सेक्शन से करोड़ों रुपए की अवैध निकासी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। शुरुआती जांच में जहां यह गड़बड़ी 15.41 करोड़ बताई गई थी, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर करीब 28 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।
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मंगलवार देर रात शुरू हुई जांच गुरुवार तक पूरी कर ली गई, जिसमें यह साफ हो गया कि पिछले 14 वर्षों से सुनियोजित तरीके से सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा था।
3 सिपाही मास्टरमाइंड, पत्नियां भी गिरफ्तार
इस बड़े घोटाले में पुलिस ने अकाउंट सेक्शन में कार्यरत तीन सिपाहियों— शंभु कुमार (मास्टरमाइंड), धीरेंद्र कुमार सिंह व रजनीश कुमार सिंह उर्फ पंकज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इसके अलावा शंभु और रजनीश की पत्नियों को भी न्यायिक हिरासत में लिया गया है। कुल मिलाकर अब तक 5 लोगों को जेल भेजा जा चुका है, जबकि रिश्तेदारों से पूछताछ की तैयारी जारी है।
बाल सिपाही के नाम पर फर्जीवाड़ा, परिवार के खातों में ट्रांसफर
जांच में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने बाल सिपाही (ट्रेनी कॉन्स्टेबल) के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इन फर्जी दस्तावेजों में अपने परिवार के लोगों के बैंक खाते जोड़कर नकली बिल बनाए गए और ट्रेजरी से रकम ट्रांसफर कराई गई। शंभु कुमार 2012 से इस खेल को चला रहा था। 2019 में धीरेंद्र और रजनीश को शामिल किया गया। इसके बाद लगातार फर्जी खातों में पैसा ट्रांसफर होता रहा।
अवैध कमाई से आलीशान संपत्ति, करोड़ों का मकान
जांच में सामने आया कि शंभु कुमार ने हजारीबाग के भवानी कॉलोनी में एसपी कोठी के पीछे तीन मंजिला आलीशान मकान बनवाया है। 8 फ्लैट वाला यह मकान पत्नी के नाम पर है। इसकी कीमत करोड़ों में आंकी जा रही है। जांच में अब उसके संपत्ति की विस्तृत जांच और मूल्यांकन शुरू हो गया है।
जांच का दायरा बढ़ा: पलामू, गढ़वा और लातेहार में अलर्ट
अब यह मामला सिर्फ हजारीबाग तक सीमित नहीं रहा। पलामू, गढ़वा और लातेहार में भी जांच शुरू हो गयी है। ट्रेजरी स्तर पर इंटरनल जांच तेज कर दिया गया है। वित्तीय लेन-देन की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। पलामू के कोषागार पदाधिकारी ने बताया कि फर्जी निकासी को देखते हुए सतर्कता बढ़ा दी गई है।
बोकारो में भी बड़ा खुलासा: 6 करोड़ की निकासी
बोकारो में भी इसी तरह का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अकाउंटेंट कौशल पांडेय ने रिटायर हवलदार को कागजों में दारोगा दिखाया। 63 बार में 4.29 करोड़ रुपए निकाले। कुल गड़बड़ी अब 6 करोड़ रुपए तक पहुंची है। अन्य पुलिसकर्मियों के नाम पर भी करीब 2.25 करोड़ की निकासी की बात सामने आई है।
पूरे राज्य में जांच: 33 ट्रेजरी रडार पर
राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बड़ा फैसला लिया है। राज्य की सभी 33 ट्रेजरी की जांच के आदेश दिया गया है। ट्रेजरी अफसर और डीडीओ भी जांच के दायरे में आ गये हैं। बजट आवंटन और निकासी प्रक्रिया की गहन समीक्षा चल रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब हर कर्मचारी का डेटा पहले से उपलब्ध था, तो इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हुई?
गया में दबिश, संपत्ति के दस्तावेज जब्त
जांच टीम ने गया में शंभु कुमार के पैतृक घर पर छापेमारी की। जमीन खरीद से जुड़े कई दस्तावेज जब्त की गयी है। पुराने घर का रिनोवेशन और नए मकान की जानकारी मिली हैै। रजनीश के घर से भी जमीन के कागजात बरामद हुए हैं।
आज हो सकती है बड़ी सरकारी घोषणा
सूत्रों के मुताबिक, इस हाई-प्रोफाइल घोटाले को लेकर राज्य सरकार जल्द ही बड़ा फैसला ले सकती है। सभी जिलों के एसपी को एक सप्ताह में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। वित्त विभाग की टीम बोकारो पहुंचकर जांच करेगी। उच्चस्तरीय बैठक में आगे की रणनीति तय की जायेगी।
निष्कर्ष: सिस्टम में गहरी सेंध, कई और नाम आ सकते हैं सामने
झारखंड का यह राजकोष घोटाला सिर्फ एक जिले या कुछ लोगों तक सीमित नहीं दिख रहा। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, यह साफ हो रहा है कि सरकारी सिस्टम में गहरी सेंध लगाकर लंबे समय से करोड़ों की लूट हो रही थी। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े नामों का खुलासा हो सकता है, जिससे राज्य की राजनीति और प्रशासन दोनों में हलचल तेज होना तय है।






