Jharkhand : नगर निगम वर्गीकरण पर हाई कोर्ट की सुनवाई पूरी, धनबाद के मेयर आरक्षण पर फैसला सुरक्षित
Jharkhand High Court ने नगर निगम वर्गीकरण और धनबाद–गिरिडीह मेयर आरक्षण विवाद पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा। पढ़ें पूरी खबर।
रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा नगर निगमों को दो वर्गों में बांटने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। यह मामला राज्य में प्रस्तावित नगर निकाय चुनाव और मेयर पद के आरक्षण से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
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यह याचिका शांतनु कुमार चंद्रा उर्फ बबलू पासवान द्वारा दायर की गयी है। याचिका में राज्य सरकार के उस फैसले को असंवैधानिक बताया गया है, जिसके तहत झारखंड के कुल नौ नगर निगमों को वर्ग ‘क’ और वर्ग ‘ख’ में बांटा गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि संविधान में नगर निगमों के इस तरह के वर्गीकरण का कोई प्रावधान नहीं है। सरकार केवल कार्यपालक आदेश के माध्यम से ऐसा वर्गीकरण नहीं कर सकती। इसलिए सरकार का यह निर्णय संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ है और इसे निरस्त किया जाना चाहिए।
सरकार ने नगर निकाय चुनाव को ध्यान में रखते हुए रांची और धनबाद नगर निगम को वर्ग ‘क’, जबकि शेष नगर निगमों को वर्ग ‘ख’ में रखा है। इसी वर्गीकरण के आधार पर मेयर पद का आरक्षण तय किया गया है, जिस पर गंभीर सवाल उठाये गये हैं।
धनबाद और गिरिडीह के मेयर आरक्षण पर विवाद
याचिकाकर्ता ने धनबाद और गिरिडीह नगर निगम में मेयर पद के आरक्षण को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई है। अदालत को बताया गया कि नगर निकाय चुनाव वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर कराये जा रहे हैं। याचिका के अनुसार, वर्ष 2011 की जनगणना में धनबाद में अनुसूचित जाति (SC) की आबादी करीब दो लाख है। ऐसे में वहां मेयर पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होना चाहिए था, लेकिन सरकार ने धनबाद में मेयर का पद अनारक्षित कर दिया।
वहीं दूसरी ओर गिरिडीह नगर निगम में अनुसूचित जाति की आबादी मात्र लगभग 30 हजार है, इसके बावजूद वहां मेयर पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया।याचिकाकर्ता ने सरकार की इस आरक्षण नीति को भेदभावपूर्ण और संविधान के अनुच्छेद 14 व 243 के खिलाफ बताया है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद झारखंड हाई कोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब अदालत के निर्णय पर नगर निकाय चुनाव, विशेषकर मेयर पद के आरक्षण और वर्गीकरण का भविष्य निर्भर करेगा।






