झारखंड टेंडर घोटाला: 14 और इंजीनियर फंसे, ईडी की 5वीं चार्जशीट में 90 करोड़ का खेल उजागर!
झारखंड के बहुचर्चित टेंडर घोटाले में ईडी ने 5वीं सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल करते हुए 14 नए इंजीनियरों को आरोपी बनाया है। 3048 करोड़ के टेंडर में 90 करोड़ की अवैध संपत्ति का खुलासा।
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड के बहुचर्चित टेंडर आवंटन कमीशन घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा एक्शन लेते हुए पांचवीं सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में 14 नए इंजीनियरों को आरोपी बनाया गया है, जिससे इस मामले में कुल आरोपियों की संख्या अब 36 पहुंच गई है।
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यह चार्जशीट 17 मार्च को रांची स्थित पीएमएलए की विशेष अदालत में दाखिल की गई, जिसमें ग्रामीण कार्य विभाग से जुड़े कई वरिष्ठ और सेवानिवृत्त इंजीनियरों के नाम शामिल हैं।
3048 करोड़ के टेंडर में 90 करोड़ का काला खेल
ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि करीब 3048 करोड़ रुपये के टेंडर आवंटन में बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी का खेल चल रहा था।
टेंडर पास कराने के बदले ठेकेदारों से 3% तक कमीशन वसूला जाता था। इस कमीशन का बंटवारा कुछ इस तरह होता था: 1.35% तत्कालीन मंत्री Alamgir Alam तक पहुंचता था, 0.65% से 1% विभागीय सचिव को व बाकी हिस्सा इंजीनियरों और अधिकारियों में बांटा जाता था। ईडी के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क के जरिए आरोपियों ने करीब 90 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की।
किन-किन इंजीनियरों पर गिरी गाज
चार्जशीट में जिन प्रमुख नामों को आरोपी बनाया गया है, उनमें:
सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता: सिंगराई टुटी, राजीव लोचन, सुरेंद्र कुमार, प्रमोद कुमार
कार्यपालक अभियंता: संतोष कुमार, अजय कुमार, अजय तिर्की, राज कुमार टोप्पो
अन्य अभियंता: अशोक कुमार गुप्ता, सिद्धांत कुमार, अनिल कुमार
सहायक अभियंता: राम पुकार राम, रमेश ओझा
पूर्व अधीक्षण अभियंता: उमेश कुमार
इन सभी पर टेंडर प्रक्रिया में अवैध कमीशन वसूली और उसे ऊपर तक पहुंचाने का आरोप है।
ऐसे खुला पूरा घोटाला
इस पूरे मामले की शुरुआत Anti Corruption Bureau (ACB) जमशेदपुर में दर्ज एक केस से हुई थी, जहां एक जूनियर इंजीनियर को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया था। इसके बाद छापेमारी में करोड़ों की नकदी बरामद हुई। तत्कालीन मुख्य अभियंता के ठिकाने से 2.67 करोड़ रुपये मिले। जांच का दायरा बढ़ते-बढ़ते मंत्री स्तर तक पहुंच गया
52 रेड, 9 गिरफ्तारी, 44 करोड़ जब्त
ईडी ने इस मामले में अब तक 52 जगहों पर छापेमारीकी गयी। नौ आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। 44 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गयी। 38 करोड़ रुपये नकद बरामद हुई। जब्त नकदी में सबसे बड़ा हिस्सा मंत्री के निजी सचिव के ठिकाने से मिला।
कैसे चलता था पूरा कमीशन रैकेट
जांच में सामने आया कि यह एक सुनियोजित नेटवर्क था, जिसमें टेंडर पास कराने के लिए पहले से “रेट” तय होता था, इंजीनियर और अधिकारी मिलकर ठेकेदारों से वसूली करते थे व पैसा चरणबद्ध तरीके से ऊपर तक पहुंचाया जाता था।
अब आगे क्या?
ईडी की इस पांचवीं चार्जशीट के बाद साफ है कि जांच अभी और गहराई तक जाएगी। आने वाले दिनों में और बड़े नाम सामने आ सकते हैं, जिससे झारखंड की राजनीति और प्रशासन में हलचल तेज होना तय है।






