झारखंड अभिभावक संघ ने  डिनोबली स्कूल के समक्ष कोविड गाइडलाईन का पालन करते हुए किया मौन प्रदर्शन

प्राइवेट स्कूल की मनमानी के खिलाफ झारखंड अभिभावक संघ द्वारा पूर्व घोषित "सात वार-सात गुहार" कार्यक्रम के दूसरे दिन शुक्रवार को डिनोबली स्कूल के सामने मौन प्रदर्शन किया गया। 

झारखंड अभिभावक संघ ने  डिनोबली स्कूल के समक्ष कोविड गाइडलाईन का पालन करते हुए किया मौन प्रदर्शन
  • संघ का "सात वार-सात गुहार" कार्यक्रम का दूसरा दिन 
  • प्राइवेट स्कूलों द्वारा अभिभावकों के शोषण पर रोक लगाने के लिए सीएम से लगाई गुहार  

धनबाद। प्राइवेट स्कूल की मनमानी के खिलाफ झारखंड अभिभावक संघ द्वारा पूर्व घोषित "सात वार-सात गुहार" कार्यक्रम के दूसरे दिन शुक्रवार को डिनोबली स्कूल के सामने मौन प्रदर्शन किया गया। 
कहा गया कि जिले के विभिन्न नामचीन स्कूलों द्वारा अपने ही स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों का ऊपर के क्लास में जाने के लिए री एडमिशन फीस लिया जा रहा है, जो कि सरासर गलत है। डीनोबिली जैसे स्कूलों में क्लास आठ्वी से ऊपर पढ़ने वाले हर स्टूडेंट्स को रि-एडमिशन फीस जमा करना पढ़ता है। झारखंड अभिभावक संघ के धनबाद जिलाध्यक्ष कैप्टन सहाय ने कहा कि वर्तमान में राज्य का हर तबका वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से लागू लॉकडाउन के दौरान आर्थिक तंगी से गुजर रहा है।आर्थिक अस्थिरता के दौर में अभिभावकों के समक्ष गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। वहीं, प्राइवेट स्कूलों द्वारा एजुकेशन फी के अलावा हर प्रकार के फीस जमा करने के फरमान से अभिभावक परेशान हैं। प्राइवेट स्कूल प्रबंधन मनमानी पर उतर आए हैं। ये न तो राज्य सरकार के आदेश को मान रहे हैं और न ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश को। निजी स्कूल संचालक बिना फीस लिए न तो रिजल्ट दे रहे हैं और न ही छात्रों को ऑनलाइन क्लास की अनुमति दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि नये एजुकेशन सेशन में फीस बढ़ोतरी कर दी गई है। एनुअल चार्ज, बिल्डिंग चार्ज, मिसलिनियस चार्ज, कंप्यूटर चार्ज, गेम्स चार्ज, सिक्यूरिटी चार्ज, सीसीटीवी चार्ज, स्कूल चार्ज, एसएमएस चार्ज, मेडिकल चार्ज, डेवलपमेंट चार्ज आदि के नाम पर अभिभावकों से मोटी रकम वसूली जा रही है। इस संबंध में झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण का आदेश भी बेअसर है। निजी स्कूल प्रबंधन सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप अभिभावकों को कोई राहत नहीं दे रहे हैं।

कैप्टन सहाय ने कहा कि कोरोना संक्रमण काल के दौरान फीस वृद्धि पर राज्य सरकार ने रोक लगा दी थी। सरकार ने केवल मासिक शुल्क लेने की बात कही थी। बावजूद इसके स्कूल सभी तरह के मदों में पैसा ले रहे हैं। झारखंड अभिभावक संघ ने मांग की है कि झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम - 2017 को राज्य के हर जिले में प्रभावी बनाया जाए, ताकि कोई भी स्कूल अपने मन मुताबिक ट्युशन फ़ीस में बढ़ोतरी या किसी अन्य मद में फीस वसूली नहीं कर सके। उन्होंने कहा कि सभी संबद्धता प्राप्त स्कूलों के पिछले पांच साल के आय-व्यय के ब्यौरा की समीक्षा सरकार कराए। मौके पर अजय गोपाल, शांतनु साहा, राजीव सिन्हा, उपस्थित थे।