वेकेशन में भी फुल स्पीड में झारखंड हाई कोर्ट: जस्टिस आर मुखोपाध्याय की बेंच ने 853 मामलों का किया निष्पादन

झारखंड हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच ने ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान रिकॉर्ड बनाते हुए 18 मई से 4 जून के बीच 853 मामलों का निपटारा किया। इनमें सबसे अधिक नियमित जमानत और अग्रिम जमानत याचिकाएं शामिल रहीं।

वेकेशन में भी फुल स्पीड में झारखंड हाई कोर्ट: जस्टिस आर मुखोपाध्याय की बेंच ने 853 मामलों का किया निष्पादन
जस्टिस आर मुखोपाध्याय(फाइल फोटो)।

      HighLights

  • • 18 मई से 4 जून के बीच वेकेशन बेंच ने निपटाए 853 मामले
  • • कुल 891 सूचीबद्ध मामलों में 95.73% मामलों का हुआ निष्पादन
  • • नियमित जमानत के 649 और अग्रिम जमानत के 169 मामलों की सुनवाई
  • • 29 मई रहा सबसे व्यस्त दिन, एक दिन में 331 मामले सूचीबद्ध

रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच ने इस बार ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान ऐसा रिकॉर्ड बनाया है, जिसने न्यायिक कार्यप्रणाली की रफ्तार और कार्यक्षमता को नई पहचान दी है। 18 मई से 4 जून के बीच जस्टिस आर मुखोपाध्याय की एकलपीठ ने कुल 853 मामलों का निष्पादन कर एक नया रिकॉर्ड कायम किया है।

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अवकाश कालीन पीठ के समक्ष इस दौरान कुल 891 मामले सूचीबद्ध किए गए थे, जिनमें से 853 मामलों का निपटारा कर दिया गया। आंकड़ों के अनुसार, यह लगभग 95.73 प्रतिशत की डिस्पोजल रेट है, जिसे न्यायिक हलकों में बेहद प्रभावशाली माना जा रहा है।

जमानत मामलों का रहा दबदबा

वेकेशन बेंच के समक्ष आने वाले मामलों में सबसे अधिक संख्या जमानत से जुड़े मामलों की रही। निष्पादित मामलों में नियमित जमानत याचिकाओं की संख्या सबसे ज्यादा रही।

निष्पादित मामलों का विवरण इस प्रकार है—

• नियमित जमानत याचिका – 649 मामले
• अग्रिम जमानत – 169 मामले
• आपराधिक अपील – 15 मामले
• रिट याचिका – 10 मामले
• क्रिमिनल रिट – 05 मामले
• विविध मामले – 05 मामले

कुल मिलाकर देखा जाए तो लगभग 95 प्रतिशत से अधिक मामले सीधे तौर पर व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जमानत से जुड़े रहे।

29 मई को सबसे अधिक दबाव

अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, 29 मई को सबसे अधिक 331 मामले सूचीबद्ध हुए थे। इसके अलावा 26 मई को 224 मामले, 2 जून को 180 मामले तथा 4 जून को 152 मामलों की सुनवाई के लिए सूची जारी की गई थी। चार अलग-अलग कार्य दिवसों में इतने बड़े पैमाने पर सुनवाई और निष्पादन को न्यायिक दक्षता का उदाहरण माना जा रहा है।

क्यों महत्वपूर्ण होती है वेकेशन बेंच?

ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान वेकेशन बेंच का मुख्य उद्देश्य उन मामलों की सुनवाई करना होता है, जो नागरिकों के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से सीधे जुड़े हों। यही वजह रही कि बड़ी संख्या में नियमित जमानत और अग्रिम जमानत मामलों को प्राथमिकता देकर सुनवाई की गई।कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी संख्या में जमानत याचिकाओं के त्वरित निपटारे से विचाराधीन कैदियों को अनावश्यक रूप से जेल में रहने से राहत मिलती है और न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा मजबूत होता है।

न्यायिक कार्यक्षमता का बना उदाहरण

जस्टिस आर मुखोपाध्याय की वेकेशन बेंच का यह प्रदर्शन सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बताता है कि छुट्टियों के दौरान भी न्यायिक प्रक्रिया लगातार चलती रहती है। 95 प्रतिशत से अधिक मामलों का निष्पादन यह संकेत देता है कि हाई कोर्ट लंबित मामलों को कम करने की दिशा में सक्रियता से काम कर रहा है।