TCS के बाद अब विप्रो में धर्मांतरण का आरोप! महिला बोली- इस्लाम अपनाने का बनाया दबाव, नौकरी छोड़नी पड़ी
पुणे स्थित विप्रो कैंपस की पूर्व महिला कर्मचारी ने अपनी महिला बॉस पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है। मामले में पुणे पुलिस और मानवाधिकार आयोग जांच कर रहे हैं।
HighLights
- महिला ने कहा- इस्लाम अपनाने और धार्मिक रीति-रिवाज मानने का बनाया गया दबाव
- विरोध करने पर खराब परफॉर्मेंस रिव्यू और नौकरी जाने की धमकी का आरोप
- पुणे पुलिस और मानवाधिकार आयोग ने शुरू की जांच
- विप्रो बोला- ‘भेदभाव और उत्पीड़न के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति’
नई दिल्ली/पुणे(Threesocieties.com Desk): महाराष्ट्र के नासिक में IT सेक्टर से जुड़े कथित धर्मांतरण विवाद की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि अब पुणे स्थित विप्रो कैंपस से भी इसी तरह के गंभीर आरोप सामने आए हैं। कंपनी की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने आरोप लगाया है कि उसके साथ धार्मिक आधार पर उत्पीड़न किया गया और उस पर इस्लाम धर्म अपनाने के लिए लगातार मानसिक दबाव बनाया गया।
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महिला कर्मचारी का दावा है कि वह 2019 से 2025 तक पुणे के हिंजेवाड़ी स्थित विप्रो कैंपस में कार्यरत थी। शिकायत के अनुसार, उसकी महिला बॉस, जो बेंगलुरु से कार्य करती थीं, ने कथित तौर पर उस पर धार्मिक रीति-रिवाज अपनाने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि जब उसने इसका विरोध किया तो उसके कार्यस्थल पर परिस्थितियां और कठिन हो गईं। उसने दावा किया कि खराब प्रदर्शन समीक्षा देने, नौकरी से निकालने और लगातार मानसिक दबाव बनाने जैसी बातें कही गईं। तनाव और कथित उत्पीड़न से परेशान होकर आखिरकार उसे नौकरी छोड़नी पड़ी।
महिला ने पुणे पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और राज्य मानवाधिकार आयोग से भी संपर्क किया है। पुणे के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बालाजी पंढारे ने पुष्टि की कि शिकायत मिलने के बाद हिंजेवाड़ी पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस कंपनी के आंतरिक रिकॉर्ड और शिकायत में लगाए गए आरोपों की भी जांच कर रही है। इस मामले में हिंदू जनजागृति समिति ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पीड़िता का पक्ष सामने रखा। हालांकि, पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा।
वहीं, विप्रो ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि कंपनी कर्मचारियों की गरिमा, सम्मान और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। कंपनी ने कहा कि वह किसी भी प्रकार के भेदभाव, उत्पीड़न या दुर्व्यवहार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाती है और जांच एजेंसियों को सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
फिलहाल मामला जांच के अधीन है और पुलिस सभी पक्षों से जानकारी जुटा रही है। इस घटना ने एक बार फिर IT कंपनियों में कर्मचारियों की सुरक्षा, कार्यस्थल पर धार्मिक स्वतंत्रता और कॉर्पोरेट वातावरण को लेकर बहस छेड़ दी है।






