NDA के लिए खुल रहा 2/3 बहुमत का रास्ता? TMC-AAP में बगावत से बदला संसद का गणित, विपक्ष की बढ़ी टेंशन

लोकसभा और राज्यसभा में NDA की बढ़ती ताकत ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। AAP, TMC और शिवसेना (UBT) में बगावत के बाद संसद का गणित तेजी से बदल रहा है। जानिए 2/3 बहुमत के जादुई आंकड़े से NDA कितनी दूर है और आगे क्या हैं राजनीतिक समीकरण।

NDA के लिए खुल रहा 2/3 बहुमत का रास्ता? TMC-AAP में बगावत से बदला संसद का गणित, विपक्ष की बढ़ी टेंशन
लोकसभा-राज्यसभा में NDA की बढ़ी ताकत।

     HighLights

  • लोकसभा में NDA का आंकड़ा 293 से बढ़कर 313-319 तक पहुंचने की चर्चा
  • संविधान संशोधन के लिए लोकसभा में 360 और राज्यसभा में 163 वोट जरूरी
  • राज्यसभा में NDA की संख्या 150 तक पहुंचने का दावा
  • AAP और TMC में बगावत से बदले राजनीतिक समीकरण
  • यूपी राज्यसभा चुनाव NDA के लिए बन सकते हैं नई चुनौती
  • विपक्षी दलों में टूट से संसद में सत्ता पक्ष की स्थिति मजबूत

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk) : देश की राजनीति में इन दिनों दलबदल, बगावत और बदलते राजनीतिक समीकरणों की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है। महाराष्ट्र से लेकर पश्चिम बंगाल और दिल्ली तक विपक्षी दलों में मची अंदरूनी खींचतान का सबसे बड़ा फायदा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को मिलता दिखाई दे रहा है। संसद के दोनों सदनों में NDA की बढ़ती ताकत ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सत्ताधारी गठबंधन अब उस जादुई आंकड़े के करीब पहुंच रहा है, जिसकी मदद से बड़े संवैधानिक बदलावों का रास्ता आसान हो सकता है।

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संविधान संशोधन में क्यों अहम है दो-तिहाई बहुमत?

भारतीय संविधान में संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। लोकसभा में इसके लिए लगभग 360 वोट और राज्यसभा में 163 वोटों का समर्थन जरूरी माना जाता है। यही कारण है कि संसद में संख्या बल का महत्व सामान्य विधेयकों की तुलना में कहीं अधिक बढ़ जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि किसी सरकार के पास दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत हो जाए तो वह बड़े संवैधानिक सुधारों को अपेक्षाकृत आसानी से आगे बढ़ा सकती है।

लोकसभा में कैसे बदला NDA का गणित?

2024 के आम चुनावों के बाद NDA के पास लोकसभा में 293 सीटें थीं। हालांकि हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद यह आंकड़ा बढ़ने की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। बताया जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों के समर्थन से NDA का आंकड़ा 313 तक पहुंच सकता है। वहीं शिवसेना (UBT) के कुछ सांसदों के समर्थन की स्थिति में यह संख्या 319 तक जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश की राजनीति को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। यदि भविष्य में विपक्षी दलों के कुछ सांसद NDA का समर्थन करते हैं तो सत्ता पक्ष की संख्या और बढ़ सकती है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

2025 के परिसीमन विधेयक के बाद तेज हुई सियासत

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि संसद में परिसीमन और सीटों के पुनर्गठन से जुड़े प्रस्तावों पर मतभेदों के बाद विपक्षी दलों में असंतोष बढ़ा। इसके बाद कई दलों के भीतर बगावत और नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे। AAP, TMC और शिवसेना (UBT) जैसे दलों में सामने आए मतभेदों ने राष्ट्रीय राजनीति में नए समीकरण पैदा कर दिए हैं। यही वजह है कि संसद में शक्ति संतुलन पहले की तुलना में अलग दिखाई दे रहा है।

राज्यसभा में भी मजबूत हुआ NDA

राज्यसभा में हालिया चुनावों और राजनीतिक समर्थन के बाद NDA की स्थिति पहले से अधिक मजबूत बताई जा रही है। आंकड़ों के अनुसार गठबंधन की संख्या 150 सीटों तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। यदि यह स्थिति बनी रहती है तो NDA दो-तिहाई बहुमत के लिए आवश्यक 163 सीटों के आंकड़े से केवल 13 सीट पीछे रहेगा। यही वजह है कि राज्यसभा की राजनीति भी इन दिनों खास चर्चा में है।

झारखंड में क्रॉस वोटिंग ने खींचा ध्यान

हालिया राज्यसभा चुनावों में झारखंड की राजनीति ने भी राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। यहां क्रॉस वोटिंग की चर्चाओं के बीच चुनाव परिणामों ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान आकर्षित किया। इससे यह संकेत मिला कि कई राज्यों में राजनीतिक निष्ठाओं और गठबंधन समीकरणों में बदलाव देखने को मिल सकता है।

NDA की राह में सबसे बड़ी चुनौती क्या?

हालांकि NDA की बढ़ती ताकत चर्चा का विषय बनी हुई है, लेकिन दो-तिहाई बहुमत का लक्ष्य अभी भी आसान नहीं माना जा रहा। वर्ष के अंत में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की कई सीटों पर चुनाव होने हैं। विधानसभा में बदले राजनीतिक समीकरणों का असर राज्यसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दल अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश करेंगे। यही कारण है कि NDA और विपक्ष दोनों की नजर आगामी चुनावी गणित पर टिकी हुई है।

क्या बदल जाएगी देश की राजनीति?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि संसद में NDA की संख्या लगातार बढ़ती है तो देश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। वहीं विपक्षी दलों के लिए संगठनात्मक मजबूती और एकजुटता सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है। फिलहाल इतना तय है कि संसद का गणित तेजी से बदल रहा है। आने वाले महीनों में लोकसभा तथा राज्यसभा दोनों में संख्या बल को लेकर सियासी लड़ाई और दिलचस्प होने वाली है।