धनबाद: दुबई से चल रहा ‘प्रिंस खान गैंग’ का खेल! 25 करोड़ रंगदारी, 10 करोड़ जमीन धंधे का खुलासा
धनबाद के कुख्यात अपराधी प्रिंस खान के दुबई कनेक्शन का बड़ा खुलासा। 25 करोड़ से अधिक रंगदारी, 10 करोड़ का जमीन कारोबार, कोलकाता में रेस्टोरेंट और राजनीतिक संरक्षण के आरोपों की जांच में जुटी पुलिस।
धनबाद (Threesocieties.com Desk): कुख्यात अपराधी प्रिंस खान के गैंग और उसके इंटरनेशनल नेटवर्क को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस रिमांड पर लिए गए उसके करीबी गुर्गे सैफी उर्फ मेजर ने पूछताछ में कई चौंकाने वाली जानकारियां दी हैं, जिससे यह साफ हो गया है कि गैंग का ऑपरेशन अब देश से बाहर तक फैल चुका है।
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दुबई में बैठे हैं भाई, यहीं से चलता है नेटवर्क
मेजर ने पुलिस को बताया कि प्रिंस खान के भाई गोपी खान और ऋतिक इस समय दुबई में रह रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ये दोनों उसी इलाके के करीब रहते हैं, जहां खुद प्रिंस खान का ठिकाना था। इस इनपुट के बाद पुलिस अब दोनों की सटीक लोकेशन और गतिविधियों का पता लगाने में जुट गई है। साथ ही उन्हें भारत लाने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
25 करोड़ की रंगदारी, बड़ा आर्थिक नेटवर्क
पूछताछ में सामने आया है कि प्रिंस खान ने पिछले 2-3 वर्षों में 25 करोड़ रुपये से अधिक की रंगदारी वसूली है। अब पुलिस इस पूरे आर्थिक नेटवर्क की जांच कर रही है—
पैसा कहां रखा गया?
किन-किन खातों में ट्रांसफर हुआ?
क्या किसी आतंकी संगठन से लिंक है?
हर एंगल से जांच तेज कर दी गई है।
कोलकाता में रेस्टोरेंट, पर नाम का खुलासा नहीं
जांच में यह भी सामने आया है कि प्रिंस खान ने कोलकाता में एक रेस्टोरेंट खोला है, जिसे उसके करीबी लोग चला रहे हैं। हालांकि रेस्टोरेंट का नाम और सटीक लोकेशन अभी तक सामने नहीं आ सकी है। पुलिस अब कोलकाता कनेक्शन को खंगाल रही है।
जमीन कारोबार से 10 करोड़ की कमाई
मेजर ने यह भी कबूला कि प्रिंस खान ने जमीन के धंधे से करीब 10 करोड़ रुपये कमाए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि—
किन लोगों के जरिए जमीन खरीदी-बेची गई
किन इलाकों में निवेश हुआ
किन लोगों को लाभ पहुंचाया गया
नेताओं से संरक्षण के आरोप!
प्रिंस खान को कुछ नेताओं का संरक्षण मिला हुआ था। यहां तक कि— पुलिस कार्रवाई से बचाने के लिए पत्राचार हुआ है। हालांकि पुलिस अभी इन आरोपों का सत्यापन कर रही है।
डिजिटल साक्ष्य जुटा रही पुलिस
मेजर की रिमांड मंगलवार को खत्म हो रही है, जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा। फिलहाल पुलिस—
कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR)
डिजिटल ट्रांजैक्शन
नेटवर्क लिंक
जैसे तकनीकी साक्ष्य जुटाने में लगी है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस मामले में और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।






