धनबाद के डिप्टी मेयर की कुर्सी खतरे में!अरुण चौहान पर हलफनामे में 7 केस छुपाने का आरोप, कोर्ट में चुनौती
धनबाद के डिप्टी मेयर अरुण चौहान की जीत को कोर्ट में चुनौती, हलफनामे में आपराधिक मामलों को छुपाने का आरोप। जानें पूरा मामला और आगे क्या होगा।
धनबाद (Threesocieties.com Desk): कोयला राजधानी धनबाद की सियासत में इस वक्त बड़ा भूचाल देखने को मिल रहा है। नवनिर्वाचित डिप्टी मेयर अरुण चौहान की कुर्सी पर अब कानूनी संकट मंडराने लगा है। उनके निर्वाचन को अदालत में चुनौती दी गई है, जिसमें शपथ पत्र में आपराधिक मामलों की जानकारी छुपाने का गंभीर आरोप लगाया गया है।
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यह मामला तब गरमा गया जब वार्ड नंबर 7 से उनकी प्रतिद्वंद्वी रहीं नेहा कुमारी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि नामांकन के दौरान दाखिल हलफनामे में अरुण चौहान ने अपने खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामलों का पूरा विवरण नहीं दिया।
क्या है पूरा मामला?
याचिका के अनुसार, अरुण चौहान ने अपने शपथ पत्र में केवल 3 मामलों का ही जिक्र किया, जबकि उनके खिलाफ कुल 7 आपराधिक मामले लंबित बताए जा रहे हैं।
बताए गए मामलों में शामिल हैं:
लोयाबाद थाना कांड संख्या 55/19
सत्रवाद संख्या 112/26
जोगता थाना कांड संख्या 09/24
जबिकअरुण के खिलाफ लोयाबाद थाना में कुल सात मामले लंबित बताये जा रहे हैं। आरोप है कि बाकी मामलों को जानबूझकर छुपाया गया, जो चुनावी नियमों का उल्लंघन है। याचिका में इसी आधार पर निर्वाचन को अवैध ठहराने की मांग की गयी है। फिलहाल अदालत ने दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है।
कोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता पक्ष को अपने दावों के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। नेहा कुमारी के अधिवक्ता पंकज प्रसाद और केके तिवारी ने बताया कि अगली सुनवाई में इन दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
चुनाव रद्द करने की मांग
याचिका में अदालत से मांग की गई है कि:
अरुण चौहान के निर्वाचन को अवैध घोषित किया जाए
डिप्टी मेयर पद से उनकी जीत रद्द की जाए
याचिकाकर्ता ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ “धोखा” करार दिया है।
राजनीति में बढ़ी हलचल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद धनबाद नगर निगम की राजनीति गरमा गई है। विपक्षी दलों को सरकार और प्रशासन पर निशाना साधने का मौका मिल गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला न केवल एक पद बल्कि पूरे नगर निगम की साख पर असर डाल सकता है।
आगे क्या?
फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है, लेकिन अगली सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है। कोर्ट के फैसले से तय होगा कि अरुण चौहान की कुर्सी बचेगी या जाएगी। धनबाद की राजनीति में आने वाले दिनों में यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है।






