बोकारो ट्रेजरी स्कैम: SBI के 4 खातों में ट्रांसफर कर किया गया 3 करोड़ से ज्यादा का घोटाला, CID जांच में कई बड़े खुलासे
झारखंड के बोकारो में पुलिस विभाग के वेतन मद से 3.15 करोड़ रुपये के ट्रेजरी घोटाले का सीआईडी ने बड़ा खुलासा किया है। फर्जी वेतन भुगतान, एसबीआई के कई खातों में ट्रांसफर और डिजिटल धोखाधड़ी के इस मामले में एसपी कार्यालय के अकाउंट्स सेक्शन के कर्मी समेत कई लोगों की भूमिका जांच के दायरे में है।
HighLights:
- बोकारो पुलिस विभाग के वेतन मद से 3.15 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का खुलासा
- सीआईडी जांच में एसपी कार्यालय के अकाउंट्स सेक्शन के कर्मी अशोक कुमार भंडारी की भूमिका सामने आई
- सब-इंस्पेक्टर उपेंद्र सिंह के नाम पर फर्जी तरीके से एसबीआई खाते में भेजे जा रहे थे करोड़ों रुपये
- जांच में पता चला कि संबंधित बैंक खाता अन्नू पांडेय के नाम पर था, जो कौशल पांडेय की पत्नी हैं
- राशि को कई बैंक खातों में ट्रांसफर कर घोटाले की रकम को खपाने की कोशिश की गई
- कौशल पांडेय के खाते से 42 लाख रुपये सह-आरोपी अशोक कुमार भंडारी के खातों में भेजे गए
रांची/बोकारो(Threesocieties.com Desk): झारखंड के बोकारो जिले में पुलिस विभाग के वेतन मद से करीब 3.15 करोड़ रुपये की अवैध निकासी और डिजिटल धोखाधड़ी के मामले ने पूरे राज्य के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। मामले की जांच कर रही सीआईडी को अब तक की जांच में कई ऐसे तथ्य मिले हैं, जिन्होंने इस घोटाले को और भी गंभीर बना दिया है।
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जांच एजेंसी के अनुसार, बोकारो एसपी कार्यालय के अकाउंट्स सेक्शन में कार्यरत कर्मी अशोक कुमार भंडारी ने कथित तौर पर ट्रेजरी प्रणाली की खामियों का फायदा उठाकर करीब 20 महीनों तक पुलिस विभाग के वेतन मद से करोड़ों रुपये की निकासी करवाई।
उपेंद्र सिंह के नाम पर होता था फर्जी भुगतान
सीआईडी जांच में सामने आया है कि मई 2024 से मार्च 2026 तक लगातार पुलिस सब-इंस्पेक्टर उपेंद्र सिंह के वेतन मद में भारी-भरकम राशि जारी की जाती रही। यह राशि भारतीय स्टेट बैंक की चास शाखा स्थित खाता संख्या 42945898462 में भेजी जाती थी।जब ट्रेजरी विभाग को इस खाते में असामान्य लेन-देन पर संदेह हुआ और उन्होंने लिखित रूप से जानकारी मांगी, तब चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जांच में पता चला कि यह बैंक खाता उपेंद्र सिंह का नहीं, बल्कि अन्नू पांडेय के नाम पर संचालित था, जो सब-इंस्पेक्टर कौशल पांडेय की पत्नी हैं।
रकम को कई खातों में ट्रांसफर कर छिपाने की कोशिश
सीआईडी के अनुसार, अन्नू पांडेय के खाते में सरकारी राशि आने के बाद उसका बड़ा हिस्सा कौशल कुमार पांडेय के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता था। इसके बाद रकम को अलग-अलग खातों के जरिए आगे भेजकर उसके स्रोत को छिपाने की कोशिश की जाती थी। जांच में यह भी सामने आया है कि कौशल कुमार पांडेय के खाते से करीब 42 लाख रुपये सह-आरोपी अशोक कुमार भंडारी के विभिन्न बैंक खातों में भेजे गए। इनमें खाता संख्या 10048586189, 33888406018 और 888406018 शामिल हैं।
20 महीने तक चलता रहा करोड़ों का खेल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि लगभग 20 महीनों तक करोड़ों रुपये की निकासी होती रही और न तो विभागीय स्तर पर और न ही बैंकिंग प्रणाली में किसी ने इस पर सवाल उठाया। इससे ट्रेजरी सिस्टम की निगरानी व्यवस्था और आंतरिक ऑडिट प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
कई और लोगों की भूमिका की जांच
सीआईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे। जांच एजेंसी बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शन और ट्रेजरी रिकॉर्ड की बारीकी से पड़ताल कर रही है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
प्रशासन और पुलिस महकमे में मचा हड़कंप
पुलिस विभाग के वेतन मद से करोड़ों रुपये की कथित अवैध निकासी का मामला सामने आने के बाद राज्य के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। यह झारखंड के हालिया वर्षों के सबसे बड़े सरकारी वेतन घोटालों में से एक माना जा रहा है। फिलहाल सीआईडी मामले की जांच कर रही है और जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घोटाले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।






