3000 जवानों का घेरा, बेटे की भावुक चिट्ठी और ₹1 करोड़ का इनाम: कौन है नक्सलियों का ‘आखिरी कमांडर’ मिसिर बेसरा?
चाईबासा के सारंडा जंगल में IED ब्लास्ट में कोबरा जवान घायल, एयरलिफ्ट कर रांची भेजा गया। वहीं 3000 जवानों ने घेरा नक्सली कमांडर मिसिर बेसरा, परिवार ने की सरेंडर की अपील।
- चाईबासा में IED ब्लास्ट, कोबरा जवान घायल
चाईबासा (Threesocieties.com Desk): झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में नक्सलियों के खिलाफ चल रहे सर्च ऑपरेशन के दौरान बड़ा हादसा हो गया। छोटानागरा थाना क्षेत्र में IED ब्लास्ट की चपेट में आकर CRPF की कोबरा 205 बटालियन का एक जवान घायल हो गया।
यह भी पढ़ें: झारखंड: चतरा में ‘दागदार खाकी’ पर बड़ा एक्शन: अफीम कनेक्शन में लावालौंग थाना प्रभारी सस्पेंड
घायल जवान की पहचान अनुज कुमार के रूप में हुई है। घटना के तुरंत बाद साथी जवानों ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला और प्राथमिक उपचार दिया। बाद में हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट कर रांची भेजा गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
सर्च ऑपरेशन के दौरान हुआ विस्फोट
जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बल लगातार सारंडा क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान चला रहे हैं। इसी दौरान जंगल में सर्च ऑपरेशन करते समय पहले से लगाए गयेI ED में विस्फोट हो गया। विस्फोट के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई, लेकिन जवानों ने स्थिति को संभालते हुए ऑपरेशन जारी रखा।
पुलिस ने बढ़ाई सख्ती, ऑपरेशन तेज
पश्चिमी सिंहभूम के एसपी अमित रेणु ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि नक्सलियों द्वारा इस तरह के कायराना हमले पहले भी किए जाते रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इलाके में सर्च ऑपरेशन और तेज किया गया है। सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं। नक्सलियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।
3000 जवानों का घेरा, निशाने पर मिसिर बेसरा
इसी बीच सुरक्षा एजेंसियों का पूरा फोकस अब नक्सलियों के “आखिरी बड़े कमांडर” मिसिर बेसरा पर है। उस पर ₹1 करोड़ से ज्यादा का इनाम घोषित है। करीब 3000 CRPF कोबरा कमांडो उसकी तलाश में जुटे हैं। ऑपरेशन झारखंड के सारंडा जंगल में केंद्रित है। सुरक्षा बलों का मानना है कि बेसरा फिलहाल झारखंड में ही छिपा हो सकता है।
मिसिर बेसरा के बेटे की भावुक अपील: “पापा, अब लौट आइए”
इस पूरे ऑपरेशन में सबसे भावुक पहलू सामने आया है बेसरा के परिवार का। उसके बेटे ने कई चिट्ठियां लिखकर सरेंडर की अपील की है
बेटे ने कहा कि वह अब हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौट आएं उसने अपनी पहचान छिपाते हुए कहा कि वह ईमानदारी से जीवन जी रहा है। बेटे ने बताया कि उसने अपने पिता को आखिरी बार 1990 के दशक की शुरुआत में देखा था।
भाई ने भी की सरेंडर की अपील
मिसिर बेसरा के छोटे भाई देवीलाल बेसरा ने भी उसे आत्मसमर्पण करने की अपील की है। उन्होंने बताया कि बेसरा ने 1980 के दशक में घर छोड़ दिया था। उसके बाद वह कभी वापस नहीं लौटा। अब 40 साल से परिवार से उसका कोई संपर्क नहीं है। खतरनाक इतिहास: कई बड़े हमलों में शामिल है।
मिसिर बेसरा का नाम कई बड़े नक्सली हमलों से जुड़ा रहा है:
2004 में 32 जवानों की हत्या में शामिल
2007 में रांची से गिरफ्तार हुआ
2009 में लखीसराय कोर्ट हमले के बाद फरार
सेंट्रल कमिटी और पोलित ब्यूरो का सदस्य
सेंट्रल मिलिट्री विंग का प्रमुख रह चुका है
उसके खिलाफ NIA भी जांच कर रही है।
जल्द गिरफ्तारी का दावा
CRPF और STF के अधिकारियों का कहना है कि ओडिशा और छत्तीसगढ़ में बेसरा का नेटवर्क कमजोर हो चुका है। अब वह झारखंड के जंगलों तक सीमित है। सुरक्षा बल जल्द उसे पकड़ने में सफल होंगे।






