उत्तर प्रदेश: पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर जेल भेजे गये, जबरदस्ती, चोटें और हत्या की आशंका!

देवरिया में औद्योगिक प्लॉट फर्जीवाड़ा केस में पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर गिरफ्तार। कोर्ट में रो पड़े, बोले— मेरी हत्या हो सकती है। कोर्ट ने SP से 10 दिन में रिपोर्ट मांगी।

उत्तर प्रदेश:  पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर जेल भेजे गये, जबरदस्ती, चोटें और हत्या की आशंका!
कोर्ट ने SP से 10 दिन में रिपोर्ट तलब की।
  • औद्योगिक प्लॉट फर्जीवाड़ा मामले में देवरिया कोर्ट ने पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा
  • पेशी के दौरान आरोपित फूट-फूटकर रोए
  • आरोप लगाया— चलती ट्रेन से जबरदस्ती गिरफ्तारी की गई 
  • जान को गंभीर खतरा,“एनकाउंटर की आशंका, 45 मिनट का समय दे दीजिए”
  • जिस जेल का कभी किया निरीक्षण, आज वहीं बंद! हाई सिक्योरिटी बैरक में रखे गये 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के देवरिया में औद्योगिक प्लॉट की खरीद-बिक्री में कथित जालसाजी के आरोप में बुधवार को पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर को कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। पेशी के दौरान कोर्ट रूम में भावुक दृश्य देखने को मिला, जब पूर्व IPS फूट-फूटकर रो पड़े और न्यायाधीश से बोले— “हुजूर मेरी जान बचा लीजिए, जेल में मेरी हत्या हो जायेगी। मुझे 45 मिनट का समय दे दीजिए, मैं सब कुछ लिखकर बता दूंगा।”

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पता नहीं कल जीवित बचूं या नहीं

अदालत में अमिताभ ने कहा मुझे 45 मिनट का समय दीजिए, मैं अपनी पूरी बात आपको लिखकर देना चाहता हूं। पता नहीं कल जीवित बचूं या नहीं। अमिताभ ठाकुर ने कहा कि वह कुछ महत्वपूर्ण बात न्यायालय को बताना चाहता है। रास्ते में उसे तीन जगह दूसरी गाड़ियों में शिफ्ट किया गया। इसलिए उसे आशंका हो गई कि अब उसका एनकाउंटर हो सकता है, पुलिस ने उसे शाहजहांपुर रेलवे प्लेटफॉर्म से गिरफ्तार किया और यह बताया कि सुरक्षा के लिए आपको पुलिस मुहैया कराई जा रही है। उसे जबरन गाड़ी में बैठाया गया। उसका चश्मा फूट गया है, और मोबाइल फोन पुलिस ने ले लिया।

गिरफ्तारी पर गंभीर आरोप– “जबरदस्ती की गई, चश्मा तोड़ा, दूसरी गाड़ियों में घुमाया”

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मंजू कुमारी की अदालत ने अमिताभ ठाकुर की लिखित व मौखिक शिकायत को संज्ञान लिया है। अमिताभ ने अदालत को बताया कि— गिरफ्तारी के समय उनके साथ जबरदस्ती की गई, शरीर पर कई चोटें आईं है।  पुलिस ने उन्हें तीन जगह वाहनों में शिफ्ट किया, उन्हें एनकाउंटर का डर सताया, शाहजहांपुर रेलवे प्लेटफ़ॉर्म से अचानक ट्रेन से उतारकर ले जाया गया, उनका चश्मा फूट गया, मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया।पुलिस द्वारा प्रस्तुत मेडिको-लीगल रिपोर्ट में भी दो चोटें दर्ज हैं, जो हार्ड एवं ब्लंट ऑब्जेक्ट से लगी बताई गईं। अदालत ने इस पर गंभीर रुख अपनाते हुए SP देवरिया से 10 दिन में रिपोर्ट तलब की।

चलती ट्रेन से रात में हुई गिरफ्तारी

अमिताभ ठाकुर लखनऊ से दिल्ली जा रहे थे, तभी शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन पर रात दो बजे लखनऊ क्राइम ब्रांच और SIT ने उन्हें AC कोच से उतारकर हिरासत में लिया। इसके बाद भारी सुरक्षा में उन्हें देवरिया लाया गया।

कोतवाली से कचहरी तक पुलिस छावनी

देवरिया कोतवाली में 2 घंटे पूछताछ

पूरे परिसर में बाहरी लोगों का प्रवेश वर्जित

पत्रकारों को भी रोका गया

पुलिस लाइन में मेडिकल परीक्षण के बाद कोर्ट पेशी

कचहरी और रास्तों पर भारी फोर्स तैनात

पुलिस अधिकारियों ने गिरफ्तारी पर टिप्पणी करने से परहेज किया। SP देवरिया ने कहा— “मुझे कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।”

जेल में अमिता‍भ ठाकुर— हाई सिक्योरिटी बैरक, जमीन पर रात गुजारी

जेल भेजे जाने के बाद पूर्व IPS को हाई सिक्योरिटी बैरक में रखा गया है।

जमीन पर कंबल बिछाकर रात गुजारी

सुबह छह बजे उठे

जेल का खाना—एक रोटी और थोड़ा चावल ही खाया

उनके पास 50–60 A4 पेपर मिले हैं

समय मिलते ही लगातार कुछ न कुछ लिखते देख अधिकारी चिंतित

आशंका—वह जेल की खामियों पर विस्तृत रिपोर्ट न तैयार कर रहे हों

जिन जेलों का कभी उन्होंने निरीक्षण किया था, आज उसी जेल की बैरक में वह खुद बंद हैं—यह बात स्थानीय पुलिस महकमे में चर्चा का विषय है।

पत्नी नूतन ठाकुर अधिवक्ताओं से संपर्क में

जेल भेजे जाने के तुरंत बाद नूतन ठाकुर ने कई अधिवक्ताओं से संपर्क किया। जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल करने की तैयारी की जा रही है।
नूतन का आरोप है कि— “यह राजनीतिक और पुलिसिया प्रतिशोध है। प्लॉट पर 25 वर्ष पहले ही कब्जा छोड़ चुके हैं।”

कोर्ट ने कहा– ‘गंभीर मामला है’

अदालत ने कहा, “आरोप गंभीर हैं और हिरासत के दौरान लगी चोटों की जांच आवश्यक है।” इसके बाद SP को निर्देश दिया गया कि— 10 दिन में रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करें।

 निष्कर्ष

पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर का मामला अब उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक और राजनीतिक हलचलों के केंद्र में है। जबरदस्ती, चोटों, हत्या के खतरे की गुहार और पुराने केस की गिरफ्तारी—इन सभी पहलुओं ने घटनाक्रम को बेहद संवेदनशील बना दिया है। आने वाले दिनों में SP की रिपोर्ट और कोर्ट का अगला रुख अहम होगा।

फर्जीवाड़ा क्या है? पूरा मामला समझिए

लखनऊ के तालकटोरा निवासी संजय शर्मा ने 12 सितंबर 2025 को राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री व प्रमुख सचिव सहित अन्य उच्चाधिकारियों को शिकायती पत्र भेजकर आरोप लगाया था की 1999 में अमिताभ ठाकुर पुलिस अधीक्षक देवरिया के पद पर रहते हुए छल से सरकारी संपत्ति हड़पने का अपराध किया है। अमिताभ ठाकुर ने शासकीय प्लाट अपनी पत्नी नूतन ठाकुर के नाम ले लिया उन्होंने विक्रय अभिलेख में अपनी पत्नी का नाम नूतन देवी और पति का नाम अजिताभ ठाकुर लिखवाया। बाद में उसे बड़ी रकम लेकर बेच दिया जबकि उक्त प्लाट को उन्हें बेचने का कोई अधिकार नहीं था। इससे सरकारी विभागों, बैंकों और राज्य सरकार को धोखे में रखा गया। इस आधार पर सितंबर 2025 में थाना कोतवाली देवरिया में अपराध संख्या 1021 /2025 पर FIR दर्ज की गयी। FIR दर्ज होने के बाद जांच SIT को सौंप दी गयी।
जमीन पर सोए अमिताभ, करवटें बदल गुजारी रात

एक्स आईपीएस अमिताभ ठाकुर को नौ दिसंबर मंगलवार की देर रात चलती ट्रेन से सीतापुर-शाजहांपुर बार्डर से एसआईटी और लखनऊ कमिश्नरेट की तालकटोरा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उन्हें देवरिया में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मंजू कुमारी की अदालत में बुधवार को पेश किया गया। अमिताभ ठाकुर को कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया  जिला कारागार के हाई सिक्वोरिटी बैरक में रखा गया है।  बुधवार की पूरी रात उन्होंने करवटें बदलकर गुजारी। जमीन पर कंबल ओढ़े सोए और सुबह छह बजे उठे। इस दौरान वह अपने साथ ए फोर साइज का सादा कागज 50-60 पेज लेकर गए हैं। उस पर जब भी समय मिल रहा है लिखना शुरू कर दे रहे हैं। क्या लिख रहे हैं किसी को पता नहीं है। उनके लगातार सादा कागज पर लिखना देख जेल के अधिकारी दहशत में है। उन्हें सामान्य रूप से बंदियों को ओढ़ने के लिए जेल में मिलने वाला सामान्य कंबल मिला है। जिसके सहारे उनकी रात कटी। उन्होंने पूरी रात करवटें बदलकर गुजारी।

भोजन में उन्हें चावल, दाल, रोटी व पालक की साग खाने को मिली। वह एक रोटी व थोड़ा सा सावल ही खाए। सुबह उठे और नित्यक्रिया के बाद फिर से ए फोर साइज सादा कागज पर वह लगातार लेखन कार्य करते रहे। एक पुलिस अधिकारी होने के चलते उन्हें कारागार की खामियों के बारे में ठीक से पता है। जिले में एसपी रहते उन्होंने कई बार जेल का अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया। इसलिए जेल के बारे में और जेल की कमियों के बारे में उन्हें ठीक से जानकारी है। उनके लगातार लेखन से कारागार के अधिकारियों की बेचैनी इसलिए बढ़ गई है कि वह कहीं जेल की कमियों को विस्तार से लिख कर शासन में शिकायत न कर दें। पुलिस पर वह लगातार दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाते रहे हैं। गुरुवार को कारागार में वह काफी निराश दिखे।

जिस जेल का किया निरीक्षण, उसी में बंदी बने 
पूर्व आइपीएस अमिताभ ठाकुर वर्ष 1998 से 2000 तक देवरिया जिले बतौर एसपी तैनात रहे। उन दिनों वह कई बार जेल का निरीक्षण किए। यहां की सुरक्षा व्यवस्था जांची। आज वहीं जेल है जिसमें बंदी बन रातें गुजार रहे हैं। जिले में व पुलिस महकमे में इसकी पुरजोर चर्चा है।