RSS @100: ‘रावणों को राम बनाना लक्ष्य’, धनबाद में बोले सुनील आंबेकर, जातिवाद को बताया सबसे बड़ी बाधा
धनबाद में RSS के शताब्दी वर्ष पर आयोजित संगोष्ठी में प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने समाज संगठन, जातिवाद उन्मूलन और सांस्कृतिक मूल्यों पर जोर दिया। उन्होंने कहा—‘रावणों को राम बनाना ही संघ का लक्ष्य है।’
- समाज परिवर्तन की राह पर संघ
धनबाद (Threesocieties.com Desk): राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर धनबाद के कोयला नगर स्थित कम्युनिटी सभागार में आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने समाज संगठन को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि संघ पिछले 100 वर्षों से हिंदू समाज को संगठित करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है और अब इस परिवर्तन को गति देने के लिए हर व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है।
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‘रावणों को राम बनाना ही संघ का लक्ष्य’
अपने संबोधन में आंबेकर ने कहा कि आज समाज में अनेक प्रकार की विकृतियां मौजूद हैं। ऐसे में संघ का उद्देश्य “रावणों को राम बनाना” है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल राजनीतिक सत्ता परिवर्तन से समाज का वास्तविक परिवर्तन संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए सामाजिक चेतना और सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

जातिवाद सबसे बड़ी बाधा, एकता ही समाधान
उन्होंने कहा कि हिंदू समाज की एकता में सबसे बड़ी बाधा जातिवाद है। जब तक समाज इस विभाजन से ऊपर नहीं उठेगा, तब तक वास्तविक परिवर्तन संभव नहीं होगा। उन्होंने सामाजिक समरसता और एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि सभी को मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा।
संघ के ‘पंच परिवर्तन’ पर फोकस
आंबेकर ने संघ के पांच प्रमुख कार्यों—
समाज संगठन
संस्कृति का संरक्षण
परिवार और परंपराओं को बढ़ावा
औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति
नागरिक कर्तव्यों का पालन
पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति के साथ-साथ अपनी संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को बनाए रखना बेहद जरूरी है।
नई पीढ़ी में दिख रहा बदलाव
युवाओं को लेकर उन्होंने सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने कहा कि आज का जेन-जी भजन मंडलियों का संचालन कर रहा है, राष्ट्रवाद के प्रति अपनी आस्था जता रहा है और भारतीय परंपराओं से जुड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग पहले “जय श्रीराम” बोलने से हिचकते थे, वे आज गर्व से इसे बोल रहे हैं, और राम मंदिर का विरोध करने वाले भी अब अयोध्या जाकर दर्शन कर रहे हैं।
सामाजिक कुरीतियों पर भी दिया जोर
आंबेकर ने दहेज जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि समाज के जागृत हुए बिना कोई भी सरकार प्रभावी बदलाव नहीं ला सकती। गोवध प्रतिबंध के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि हर हिंदू के जीवन में गाय माता की उपस्थिति और सम्मान होना चाहिए।
‘अधिकार नहीं, कर्तव्य के लिए भी आंदोलन जरूरी’
उन्होंने कहा कि झारखंड में अधिकारों के लिए कई आंदोलन हुए हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि नागरिक कर्तव्यों के लिए भी आंदोलन खड़ा किया जाए। संघ का उद्देश्य सज्जन शक्तियों को एकत्रित कर समाज को सही दिशा देना है, ताकि देश विरोधी ताकतों—आतंकवाद, उग्रवाद, माओवाद और अलगाववाद—का प्रभाव खत्म किया जा सके।
बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी
कार्यक्रम में प्रांत कार्यवाह संजय कुमार, विभाग संघचालक केशव हड़ोदिया, नित्यानंद पांडेय, पंकज सिंह, राकेश सुमन सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। अंत में वंदे मातरम् के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।






