आनंद मोहन बनाम JDU: बयानबाजी से बिहार की राजनीति में भूचाल, ‘टिकट बेचने’ के आरोपों पर गरमाई सियासत
पूर्व सांसद आनंद मोहन के लगातार बयानों से बिहार की राजनीति में उबाल आ गया है। JDU नेताओं ने उन्हें सोच-समझकर बोलने की नसीहत देते हुए नीतीश कुमार की राजनीतिक पहचान को मजबूत बताया। टिकट बेचने और मंत्री पद के बदले पैसे लेने के आरोपों पर नया सियासी विवाद खड़ा हो गया है।
पटना (Threesocieties.com Desk): बिहार की राजनीति में इन दिनों पूर्व सांसद Anand Mohan Singh के लगातार बयानों ने नया राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने उनके आरोपों और सार्वजनिक बयानबाजी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें “सोच-समझकर बोलने” की नसीहत दी है। पार्टी नेताओं ने साफ कहा है कि आनंद मोहन जदयू के सदस्य नहीं हैं, इसलिए उन्हें पार्टी के अंदरूनी मामलों और नेतृत्व पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए।
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राजधानी पटना में सोमवार को यह विवाद और गहरा गया, जब जदयू नेताओं ने खुलकर आनंद मोहन के आरोपों का जवाब दिया। पार्टी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar की राजनीतिक पहचान इतनी मजबूत है कि उसे कोई कमजोर नहीं कर सकता।
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‘नीतीश करोड़ों लोगों के दिल में बसते हैं’
भवन निर्माण मंत्री Leshi Singh ने आनंद मोहन पर पलटवार करते हुए कहा कि जदयू में कभी “थैली की राजनीति” नहीं हुई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार की राजनीति का बड़ा चेहरा हैं और करोड़ों लोगों के दिलों में उनकी पहचान कायम है। लेशी सिंह ने कहा, “नीतीश कुमार को कोई दफन नहीं कर सकता। उनकी पहचान और राजनीतिक विरासत को मिटाने की कोशिश कभी सफल नहीं होगी।”
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से आनंद मोहन लगातार यह आरोप लगा रहे हैं कि जदयू के भीतर कुछ नेता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक छवि खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने टिकट वितरण और मंत्री पद के बदले पैसे लेने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए थे, जिसके बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई।
JDU प्रवक्ताओं ने भी किया पलटवार
जदयू के मुख्य प्रवक्ता Neeraj Kumar ने कहा कि पार्टी से जुड़े फैसले नेतृत्व का विषय हैं और बाहरी लोगों को उस पर टिप्पणी करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जदयू एक अनुशासित पार्टी है और यहां निर्णय संगठनात्मक प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं।वहीं डॉ. निहोरा प्रसाद यादव और अंजुम आरा ने भी आनंद मोहन के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार की पहचान बेहद मजबूत है और उसे कमजोर करने की कोई भी कोशिश सफल नहीं होगी। जदयू नेताओं ने यह भी याद दिलाया कि आनंद मोहन का परिवार खुद जदयू से जुड़ा हुआ है। उनकी पत्नी Lovely Anand पार्टी की सांसद हैं, जबकि उनके पुत्र Chetan Anand जदयू विधायक हैं। ऐसे में सार्वजनिक बयानबाजी से राजनीतिक असहजता बढ़ रही है।
‘टिकट बेचने’ के आरोप से नया विवाद
इस पूरे विवाद में नया मोड़ तब आया, जब बिहार सवर्ण आयोग के सदस्य Rajkumar Singh ने आनंद मोहन पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि “टिकट बेचने का अनुभव आनंद मोहन को ही है।” राजकुमार सिंह ने दावा किया कि जब आनंद मोहन की बिहार पीपुल्स पार्टी सक्रिय थी, तब टिकट बेचे जाते थे। उन्होंने कहा कि वह खुद उस पार्टी के संस्थापक सदस्यों में रहे हैं और उनके हिस्से का टिकट भी बेच दिया गया था। इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। राजनीतिक गलियारों में इसे जदयू और आनंद मोहन के बीच बढ़ती दूरी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
NDA राजनीति पर भी पड़ सकता है असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आनंद मोहन के लगातार बयान बिहार NDA की राजनीति में असहजता बढ़ा सकते हैं। खासकर तब, जब उनकी पत्नी और पुत्र दोनों सत्ताधारी गठबंधन से जुड़े हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक गरमा सकता है।फिलहाल बिहार की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज है और सभी दल एक-दूसरे पर राजनीतिक हमले करने में जुटे हैं। अब देखना होगा कि यह विवाद सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहता है या आने वाले चुनावी समीकरणों को भी प्रभावित करता है।






