बंगाल की राजनीति में भूचाल: ममता को हटाकर अरूप रॉय बने TMC के चेयरमैन, अभिषेक भी महासचिव पद से आउट

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट ने नई राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन कर अरूप रॉय को चेयरमैन और ऋतब्रत बनर्जी को महासचिव घोषित किया है। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को पदों से हटाने के दावे के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

बंगाल की राजनीति में भूचाल: ममता को हटाकर अरूप रॉय बने TMC के चेयरमैन, अभिषेक भी महासचिव पद से आउट
बागी गुट ने ममता-अभिषेक को हटाया।

 HighLights

  • बागी तृणमूल गुट ने 30 सदस्यीय नई राष्ट्रीय कार्यसमिति गठित की
  • अरूप रॉय को चेयरमैन और ऋतब्रत बनर्जी को महासचिव बनाया गया
  • ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को शीर्ष पदों से हटाने का दावा
  • 58 से अधिक विधायकों और कई पूर्व पार्षदों के समर्थन का दावा
  • ममता खेमे ने बागी गुट के फैसलों को पूरी तरह अवैध बताया
  • बागी गुट ने ममता बनर्जी से मेंटर बनकर मार्गदर्शन करने की अपील की

कोलकाता (Threesocieties.com Desk): पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी अंदरूनी कलह अब खुली बगावत में बदलती दिखाई दे रही है। पार्टी के बागी गुट ने दावा किया है कि उसने नई राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन कर लिया है और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चेयरमैन पद से हटाकर हावड़ा मध्य के विधायक अरूप रॉय को नया चेयरमैन नियुक्त कर दिया है।

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इतना ही नहीं, बागी गुट ने अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव पद से हटाने का भी दावा किया है। नई कार्यसमिति में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। इस घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति में भूचाल ला दिया है और तृणमूल कांग्रेस के भीतर सत्ता संघर्ष खुलकर सामने आ गया है।

होटल में हुई बैठक, नई कार्यसमिति का ऐलान

बजट सत्र समाप्त होने के बाद न्यू टाउन स्थित एक होटल में बागी विधायकों और नेताओं की बैठक हुई। बागी गुट का दावा है कि बैठक में लगभग 60 विधायक और कोलकाता के करीब 70 पूर्व पार्षद मौजूद थे। इसी बैठक में 30 सदस्यीय नई राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन का प्रस्ताव पारित किया गया। बैठक के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने घोषणा की कि अरूप रॉय को सर्वसम्मति से ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का नया चेयरपर्सन चुना गया है। साथ ही नई राष्ट्रीय कार्यसमिति का भी गठन कर दिया गया है।

संविधान की धारा-20 का दिया हवाला

बागी नेताओं ने अपने फैसले को सही ठहराने के लिए पार्टी संविधान की धारा-20 का हवाला दिया। उनका कहना है कि पार्टी के संविधान के अनुसार हर तीन वर्ष में राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक आयोजित होना अनिवार्य है, लेकिन 2022 के बाद ऐसी कोई बैठक नहीं हुई।इसी आधार पर बागी गुट ने पुरानी कार्यसमिति को निष्क्रिय बताते हुए उसे भंग करने और नई समिति गठित करने का प्रस्ताव पारित किया।

'असल तृणमूल' होने का दावा

नई कार्यसमिति में पूर्व मंत्री अरूप विश्वास, फिरहाद हकीम और रथीन घोष को उपाध्यक्ष बनाया गया है। जावेद खान, संदीपन साहा और सबीना यासमिन को भी महासचिव मंडल में शामिल किया गया है, जबकि अखरुज्जमान को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।बैठक में मौजूद नेताओं ने दावा किया कि वही "असल तृणमूल कांग्रेस" का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और पार्टी के मूल सिद्धांतों को बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है।

ममता को मेंटर बनाने की अपील

दिलचस्प बात यह है कि बागी गुट ने ममता बनर्जी को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि वे चाहते हैं कि ममता बनर्जी पार्टी की मेंटर की भूमिका निभाएं और संगठन को मार्गदर्शन देती रहें। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी का राजनीतिक अनुभव और योगदान पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए उन्हें मार्गदर्शक की भूमिका में बने रहना चाहिए।

अरूप रॉय का पहला बयान

नई जिम्मेदारी मिलने के बाद अरूप रॉय ने मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में कहा, "काम करेंगे।" वहीं विधायक सबीना यासमिन ने कहा कि यह फैसला सभी प्रतिनिधियों की सहमति से लिया गया है और बैठक में मौजूद सदस्यों ने सर्वसम्मति से अरूप रॉय को चेयरमैन चुना है।

ममता खेमे ने बताया अवैध

दूसरी ओर, ममता बनर्जी के समर्थकों ने बागी गुट के सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। तृणमूल नेता कुणाल घोष ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी एक-दूसरे के पर्याय हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के संविधान के तहत किसी बागी गुट को नेतृत्व बदलने या नई राष्ट्रीय कार्यसमिति गठित करने का अधिकार नहीं है। कुणाल घोष ने कहा कि बागी नेताओं द्वारा किए गए सभी दावे कानूनी और संगठनात्मक रूप से अमान्य हैं तथा पार्टी उन्हें स्वीकार नहीं करती।

बंगाल की राजनीति पर पड़ेगा असर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बागी गुट के समर्थन का दावा सही साबित होता है, तो यह तृणमूल कांग्रेस के इतिहास का सबसे बड़ा संगठनात्मक संकट बन सकता है। हालांकि, अंतिम फैसला पार्टी संगठन, विधानसभा की स्थिति और चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थानों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा। फिलहाल बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी और बागी गुट के बीच टकराव ने नया मोड़ ले लिया है और आने वाले दिनों में यह संघर्ष और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।