धनबाद कांग्रेस में महाभारत! ‘गुप्त बैठक’ में फूटा गुस्सा, जिला अध्यक्ष पर संतोष सिंह पर लगे गंभीर आरोप

धनबाद कांग्रेस में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। सर्किट हाउस में हुई नाराज नेताओं की बैठक में जिला अध्यक्ष संतोष सिंह पर करोड़ों की संपत्ति, पद के बदले पैसे और जमीन विवाद जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। पार्टी में गुटबाजी तेज होने से राजनीतिक हलचल बढ़ गई है।

धनबाद कांग्रेस में महाभारत! ‘गुप्त बैठक’ में फूटा गुस्सा, जिला अध्यक्ष पर संतोष सिंह पर लगे गंभीर आरोप
धनबाद कांग्रेस में अंदरूनी संग्राम तेज।
  • “5 खोखा दो, पद लो!” धनबाद कांग्रेस की बैठक में लगे सनसनीखेज आरोप
  • जमीन, पैसा और बाहरी हस्तक्षेप के आरोपों से मचा राजनीतिक भूचाल

धनबाद (Threesocieties.com Desk): झारखंड की राजनीति में धनबाद कांग्रेस का अंदरूनी विवाद अब खुलकर सतह पर आ गया है। लंबे समय से संगठन के भीतर चल रही खींचतान अब सार्वजनिक राजनीतिक टकराव में बदलती दिखाई दे रही है। एक तरफ जिला कांग्रेस अध्यक्ष के नेतृत्व में अंचल अधिकारी के खिलाफ आंदोलन चल रहा है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के वरिष्ठ और नाराज नेता खुलकर विरोध के मैदान में उतर आए हैं।

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रविवार को धनबाद सर्किट हाउस में कांग्रेस नेताओं की एक अहम बैठक आयोजित हुई, जिसे राजनीतिक गलियारों में “गुप्त रणनीति बैठक” के रूप में देखा जा रहा है। बैठक के बाद कई नेताओं ने जिला कांग्रेस अध्यक्ष संतोष सिंह पर गंभीर आरोप लगाए, जिससे संगठन के भीतर हलचल और तेज हो गई है।

संपत्ति और कार्यशैली को लेकर उठे सवाल

बैठक के दौरान कांग्रेस नेता मनोज सिंह ने जिला अध्यक्ष की संपत्ति और कार्यशैली को लेकर कई सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि संतोष सिंह के पास करीब 500 करोड़ रुपये की संपत्ति है और लखनऊ, कोलकाता तथा दिल्ली समेत कई शहरों में मकान मौजूद हैं। साथ ही चार फॉर्च्यूनर जैसी लग्जरी गाड़ियों का भी उल्लेख किया गया।

मनोज सिंह ने कहा कि यदि संगठन और कार्यकर्ताओं के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता है, तो उपायुक्त कार्यालय के पास कथित रूप से अपने नाम कराई गई लगभग 20 कट्ठा जमीन कांग्रेस कार्यालय के लिए उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आज तक धनबाद में कांग्रेस का स्थायी जिला कार्यालय प्रभावी रूप से स्थापित नहीं हो पाया है।

जमीन विवाद और ‘दबाव की राजनीति’ का आरोप

बैठक में शामिल नेताओं ने आरोप लगाया कि जमीन से जुड़े मामलों में दबाव बनाकर काम कराने की कोशिश की जा रही है। नेताओं का दावा है कि करीब एक करोड़ रुपये की डील कर जमीन का मोटेशन कराने का प्रयास हुआ, जिसके कारण अंचल अधिकारी के खिलाफ आंदोलन चलाया जा रहा है। सरकारी और गैरमजरूआ जमीन के मुद्दे को लेकर भी सवाल उठाए गए। नेताओं ने कहा कि राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर प्रशासनिक दबाव बनाया जा रहा है, जिससे विवाद लगातार गहराता जा रहा है।

“धनबाद कांग्रेस बाहरी प्रभाव में चल रही”

मनोज सिंह ने आरोप लगाया कि धनबाद जिला कांग्रेस का संचालन स्थानीय नेतृत्व के बजाय बाहरी प्रभाव में हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि बेरमो विधायक अनूप सिंह का संगठन पर प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है और कई महत्वपूर्ण फैसले उनके इशारे पर लिए जा रहे हैं।बैठक में मौजूद नेताओं ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि “जो अनूप सिंह के यहां कप-गिलास धोएगा, वही नेता कहलाएगा।” इस बयान के बाद बैठक का माहौल और गर्म हो गया तथा पार्टी के भीतर गुटबाजी खुलकर सामने आ गई।

“पद के बदले पैसा” का सनसनीखेज आरोप

नाराज नेताओं ने संगठन में पद वितरण को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। बैठक में दावा किया गया कि कथित रूप से पैसे लेकर संगठन में पद दिए जा रहे हैं। नेताओं ने आरोप लगाया कि —

“जो पांच खोखा देगा, वह उपाध्यक्ष बनेगा”
“जो दो खोखा देगा, वह महामंत्री बनेगा”

इसके अलावा बीपीएल कोटा के नाम पर प्रदेश स्तर पर सदस्यता या पद दिलाने के लिए ₹20-25 हजार तक लेने का आरोप भी लगाया गया। नेताओं ने इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

बैठक में मौजूद रहे कई वरिष्ठ चेहरे

बैठक के दौरान मनोज सिंह के आरोपों पर वहां मौजूद कई नेता हंसते और तालियां बजाते नजर आए। कार्यक्रम में मुख्य रूप से बाघमारा के पूर्व मंत्री स्वर्गीय ओपी लाल के पुत्र अशोक लाल, बैभव सिन्हा, अधिवक्ता अनवर शमीम, राजेश्वर यादव, प्रसाद निधि सहित कई नेता मौजूद रहे।

कांग्रेस में टूट की आशंका बढ़ी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सर्किट हाउस की यह बैठक केवल नाराजगी जताने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संगठन के भीतर बड़े राजनीतिक बदलाव की भूमिका तैयार कर सकती है। यदि प्रदेश नेतृत्व ने जल्द हस्तक्षेप नहीं किया, तो धनबाद कांग्रेस में खुली टूट की स्थिति बन सकती है।

हालांकि, बैठक में लगाए गए सभी आरोप फिलहाल एकतरफा हैं। जिला कांग्रेस अध्यक्ष संतोष सिंह या संबंधित नेताओं की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सबकी नजर प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व पर टिकी है कि वह इस बढ़ते विवाद को किस तरह संभालता है।