झारखंड: रांची से लापता अंश-अंशिका 12 दिन बाद सकुशल बरामद; अपहरणकर्ता दंपत्ति गिरफ्तार

रांची के धुर्वा से लापता अंश-अंशिका 12 दिन बाद रामगढ़ के चितरपुर से सकुशल बरामद। 48 अफसर, 12 राज्यों में रेड, 500 CCTV और 5000 गाड़ियों की जांच के बाद टूटी मानव तस्करी की साजिश।

झारखंड: रांची से लापता अंश-अंशिका 12 दिन बाद सकुशल बरामद; अपहरणकर्ता दंपत्ति गिरफ्तार
बच्चों की वापसी पर रांची में उत्सव का माहौल।
  • 48 अफसर, 12 राज्यों में रेड, 500 CCTV और 5000 गाड़ियों की जांच के बाद मिला सुराग

रांची। झारखंड की राजधानी रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र से 2 जनवरी को लापता हुए मासूम भाई-बहन अंश (5) और अंशिका (4) को आखिरकार 12 दिनों की अथक तलाश के बाद सकुशल बरामद कर लिया गया है। बच्चों को रामगढ़ जिले के रजरप्पा थाना क्षेत्र अंतर्गत चितरपुर के पहाड़ी इलाके (अहमदनगर) से पुलिस ने बरामद किया।

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इस सनसनीखेज अपहरण कांड में बिहार के औरंगाबाद निवासी एक महिला और पुरुष को गिरफ्तार किया गया है, जो अंतरराज्यीय बच्चा तस्करी से जुड़े बुलगुलिया गिरोह के सदस्य बताये जा रहे हैं।

पुलिस की बड़ी सफलता, ऑपरेशन मासूम हुआ कामयाब

अंश-अंशिका की बरामदगी झारखंड पुलिस के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है। डीजीपी तदाशा मिश्रा के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया।

48 तेज-तर्रार पुलिस अधिकारी जांच में लगे

12 राज्यों में छापेमारी

500 से अधिक CCTV फुटेज खंगाले गए

5000 से ज्यादा वाहनों की जांच

17 हजार थानों को किया गया अलर्ट

पुलिस ने बच्चों की सूचना देने वालों के लिए 4 लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया था।

स्थानीय युवाओं और बजरंग दल की भूमिका बनी निर्णायक

इस केस में निर्णायक कड़ी बने चितरपुर के स्थानीय युवा और बजरंग दल से जुड़े कार्यकर्ता।
मंगलवार रात बच्चों के इलाके में देखे जाने की सूचना मिलने के बाद
डब्लू साहू, सचिन कुमार, सुनील कुमार, सन्नी नायक और अंशु कुमार ने पूरी रात इलाके में निगरानी रखी।
बुधवार सुबह करीब 7:30 बजे, पहाड़ी क्षेत्र में दोनों मासूम एक घर के बाहर बैठे दिखे।
तुरंत रजरप्पा पुलिस को सूचना दी गई और बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया।

बिहार ले जाकर बेचने की थी साजिश

पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी दंपति बच्चों को बिहार ले जाकर बेचने की फिराक में था, लेकिन पुलिस के डर से वे रामगढ़ में छिप गए थे।डीजीपी ने इसे मानव तस्करी का अंतरराज्यीय नेटवर्क बताया है, जिसमें और भी बड़े खुलासों की संभावना जताई गई है।

घर लौटे मासूम, रांची में जश्न का माहौल

बच्चों के रांची पहुंचते ही धुर्वा के मौसीबाड़ी खटाल इलाके में होली-दिवाली जैसा माहौल बन गया। अबीर-गुलाल, डीजे और आतिशबाजी, मिठाइयों का वितरण, परिजनों की आंखों में राहत के आंसू छलक पड़े।

 CM हेमंत सोरेन ने जताई खुशी, दिए अहम निर्देश

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बच्चों की सकुशल बरामदगी पर खुशी जाहिर करते हुए रांची के उपायुक्त को निर्देश दिया कि— “अंश और अंशिका के माता-पिता को सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं से आच्छादित किया जाए।”

500 CCTV और 5000 गाड़ियों की जांच: DGP 

डीजीपी तदाशा मिश्रा ने कहा— “यह केवल पुलिस की जीत नहीं, बल्कि समाज, मीडिया और नागरिकों की सजगता की जीत है। इस मानव तस्करी नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जायेगा।”उन्होंने सफल टीम को रिवॉर्ड देने की घोषणा भी की। डीजीपी तदाशा मिश्रा ने मीडिया को बताया कि अंश-अंशिका के पिता सुनील कुमार ने तीन जनवरी को धुर्वा पुलिस स्टेशन में एफआइआर दर्ज करायी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर के नेतृत्व में विशेष टीम बनाई गई। टीम में सिटी एसपी पारस राणा, ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह समेत 48 पुलिस अफसर शामिल थे।

कड़ी मेहनत के बाद मिली सफलता

अधिकारियों ने जमीनी और तकनीकी जांच को एक साथ संभाला। डीजीपी ने कहा कि जांच आसान नहीं थी। इस सफलता के पीछे रांची पुलिस की दिन-रात की मेहनत है। 500 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाली गई और 5,000 से अधिक वाहनों की जांच की गई। पुलिस ने संदिग्ध गतिविधियों को दूसरे राज्यों में हुई ऐसी ही घटनाओं से जोड़कर छानबीन की। डीजीपी ने इस मामले में बेहतर काम के लिए पूरी पुलिस टीम को बधाई दी है।

उन्होंने कहा कि एडीजी मनौज कौशिक के नेतृत्व में रांची के एसएसपी राकेश रंजन, सिटी एसपी पारस राणा, ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर और ट्राफिक एसपी राकेश सिंह ने जिम्मेदारी के साथ काम किया है। डीजीपी ने कहा कि बच्चों को खोजने में पुलिस को काफी मेहनत की है और उनकी मेहनत रंग लाई है। कई स्तरों पर जांच की गई और हर जानकारी को गंभीरता से लिया गया। आखिरकार पुलिस की मेहनत सफल रही और मामले में गिरफ्तारी हो सकी।

12 राज्यों में खोज
अंश-अंशिका की तलाश में ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार, छत्तीसगढ़, राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र समेत 12 राज्यों में टीम भेजी गई। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके जनता से लगातार जानकारी मांगी गई। प्रति बच्चे दो लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया। हर दिन पुलिस को 1,000 से ज्यादा कॉल प्राप्त होती थीं। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और हाट बाजारों में पोस्टर लगाये गये। ड्रोन और डॉग स्क्वॉड की मदद से क्षेत्र में खोजबीन की गई। सीआईडी के जरिये देशभर में ह्यू एंड क्राई नोटिस जारी किया गया। पूरे देश में बच्चों की सूचना फैलाई गई। कई बाल संगठनों ने भी सूचना प्रसारण में सहयोग किया। जांच की सघन प्रक्रिया और लगातार समीक्षा के बाद पुलिस को सफलता मिली। डीजीपी मिश्रा ने कहा, “यह केवल पुलिस की मेहनत का परिणाम नहीं है, बल्कि समाज और परिवार की एकजुटता का भी परिणाम है। बच्चों की मुस्कान ही सबसे बड़ा इनाम है।”

 पूरे मामले की संक्षिप्त टाइमलाइन

2 जनवरी: धुर्वा मौसी बाड़ी खटाल इलाके से अंश (लगभग 5 वर्ष) और अंशिका (लगभग 4 वर्ष) दिन के लगभग तीन बजे घर से निकले थे, जहां वे बिस्किट खरीदने जा रहे थे। वे वापस नहीं लौटे।

3 जनवरी: परिवार ने धुर्वा पुलिसस्टेशन में बच्चों के लापता होने की कंपलेन दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत तलाश शुरू की, लेकिन शुरुआती दिनों में कोई सफलता नहीं मिली। FIR दर्ज, SIT का गठन

4–12 जनवरी:रांची पुलिस ने एसएसपी राकेश रंजन की देखरेख में 40 सदस्यों वाली एसआईटी गठित की।

5,000 से ज्यादा मोबाइल नंबरों की जांच की गई और 2,000 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए।

गंतव्य केयर फाउंडेशन एनजीओ की मदद से पोस्टर अभियान चलाया गया। 

13 जनवरी 2026 (मंगलवार शाम):रांची पुलिस की ओर से बच्चों को ढूंढने वाले को चार लाख रुपये इनाम की घोषणा की गई।
सोशल मीडिया पर बच्चों के लापता होने की खबर वायरल होने के बाद बजरंग दल के कार्यकर्ता सचिन, डब्ल्यू साहू, सुनील कुमार, अंशु आदि ने आसपास के इलाकों में तलाश शुरू की।

14 जनवरी 2026 (बुधवार सुबह, करीब 1:02 PM तक): बजरंग दल कार्यकर्ताओं को चितरपुर के अहमदनगर से बच्चों के होने की सूचना मिली। उन्होंने मौके पर पहुंचकर बच्चों को बरामद किया और रामगढ़ पुलिस को सूचित किया। रजरप्पा थाना पुलिस ने दंपति को गिरफ्तार किया और बच्चों को कब्जे में लिया।