ईरान-अमेरिका युद्ध का असर:पेट्रोल 3.14 और डीजल 3.11 रुपये प्रति लीटर महंगा, नई दरें लागू
पश्चिम एशिया युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच देशभर में पेट्रोल और डीजल 3 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो गया है। दिल्ली में पेट्रोल ₹97.77 और डीजल ₹90.67 पहुंच गया है। CNG के दाम भी बढ़े हैं। जानिए महंगाई का आम आदमी, ट्रांसपोर्ट और खेती पर कितना असर पड़ेगा।
नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk) : पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल का असर अब सीधे भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर दिखने लगा है। शुक्रवार 15 मई सुबह 6 बजे से देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी लागू कर दी गई है। करीब दो साल बाद ईंधन के दामों में यह बड़ी वृद्धि हुई है।
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दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹3.14 प्रति लीटर बढ़कर ₹97.77 हो गई है, जबकि डीजल ₹3.11 महंगा होकर ₹90.67 प्रति लीटर पहुंच गया है। इसके साथ ही प्रमुख शहरों में CNG की कीमतों में भी ₹2 प्रति किलो तक की बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में अब CNG ₹79.09 प्रति किलो मिलेगी।
तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच चुकी हैं, जिससे कंपनियों पर भारी दबाव बना हुआ था। कंपनियों के अनुसार, अभी भी पेट्रोल और डीजल पर ₹25-₹30 प्रति लीटर तक का घाटा हो रहा है।
दिल्ली में नई कीमतें क्या हुईं?
नियमित पेट्रोल: ₹94.77 से बढ़कर ₹97.91 प्रति लीटर
प्रीमियम पेट्रोल: ₹102-104 से बढ़कर ₹105.14-107.14 प्रति लीटर
नियमित डीजल: ₹87.67 से बढ़कर ₹90.78 प्रति लीटर
CNG: ₹77 के करीब से बढ़कर ₹79.09 प्रति किलो
आम आदमी पर क्या पड़ेगा असर?
डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव सीधे रोजमर्रा की जिंदगी और रसोई तक पहुंचेगा। ट्रक और मालवाहक वाहनों का खर्च बढ़ने से दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल, दूध और राशन महंगे हो सकते हैं। किसानों को ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और पंपिंग सेट चलाने के लिए ज्यादा डीजल खर्च करना होगा, जिससे खेती की लागत बढ़ेगी। सार्वजनिक परिवहन, स्कूल बस और ऑटो किराए में भी इजाफा देखने को मिल सकता है।
महंगाई की नई लहर
विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन महंगा होने से बाजार में अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ेगा।
क्यों बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम?
ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति पर संकट है। ईरान-अमेरिका संघर्ष के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। तेल कंपनियों का कहना है कि लंबे समय तक कीमतें स्थिर रखने के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। ऐसे में घाटे की भरपाई के लिए कीमतों में बढ़ोतरी जरूरी हो गई थी। अगर आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो पेट्रोल-डीजल के दाम में फिर वृद्धि हो सकती है।
पड़ोसी देशों में पहले ही बढ़ चुके थे दाम
सरकार अब तक यह कहती रही थी कि वैश्विक तेल संकट का पूरा बोझ भारतीय उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा। जबकि पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों में पहले ही पेट्रोल-डीजल 15% से 20% तक महंगे हो चुके थे। अब भारत में भी तेल कंपनियों ने कीमतें बढ़ाकर संकेत दे दिया है कि वैश्विक संकट का असर घरेलू बाजार पर पड़ना तय है।
2024 चुनाव से पहले घटे थे दाम
मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर ₹2 प्रति लीटर की कटौती कर राहत दी थी। इसके बाद करीब दो साल तक कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। हालांकि तकनीकी रूप से भारत में ईंधन की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में 15 दिनों के औसत क्रूड ऑयल रेट के आधार पर तय होती हैं, लेकिन राजनीतिक और आर्थिक कारणों से लंबे समय तक कीमतें स्थिर रखी गई थीं।
पेट्रोल पंप संचालकों को देर रात मिला आदेश
दिल्ली पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के निवर्तमान अध्यक्ष निश्चल सिंघानिया के अनुसार, तेल कंपनियों ने गुरुवार देर रात ईमेल के जरिए पेट्रोल पंप संचालकों को नई कीमतों की जानकारी दी। नई दरें शुक्रवार सुबह 6 बजे से लागू कर दी गईं। उन्होंने बताया कि रुपये की कमजोरी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण तेल कंपनियों को यह फैसला लेना पड़ा।
दिल्ली-एनसीआर में सबसे ज्यादा असर
नई कीमतों का सीधा असर दिल्ली-एनसीआर के लाखों दैनिक यात्रियों, ट्रांसपोर्ट कारोबारियों और छोटे व्यवसायियों पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है।






