नीति आयोग में हेमंत की हुंकार: PM मोदी के सामने 1.36 लाख करोड़ बकाया और 6000 करोड़ की मांग

नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड के लिए 1.36 लाख करोड़ रुपये की बकाया राशि, 6000 करोड़ रुपये की जल जीवन मिशन फंडिंग, मेडिकल कॉलेजों की मंजूरी, स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी कई अहम मांगें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष रखीं।

नीति आयोग में हेमंत की हुंकार: PM मोदी के सामने 1.36 लाख करोड़ बकाया और 6000 करोड़ की मांग
हेमंत सोरेन ने केंद्र के सामने रखीं विकास की 10 बड़ी मांगें।

रांची/नई दिल्ली(Threesocieties.com Desk): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के विकास, संसाधनों पर अधिकार और केंद्र सरकार से अपेक्षित सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को मजबूती से उठाया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि झारखंड को केवल खनिज संपदा वाले राज्य के रूप में नहीं, बल्कि देश के औद्योगिक, शैक्षणिक और मानव संसाधन विकास के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देखा जाना चाहिए।

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बैठक में मुख्यमंत्री ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, खेल, पेयजल, उद्योग और वित्तीय अधिकारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव केंद्र सरकार के समक्ष रखे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 का सपना तभी साकार होगा, जब झारखंड जैसे संसाधन संपन्न राज्यों को केवल खनिज आपूर्ति करने वाला प्रदेश नहीं, बल्कि विकास का बराबर भागीदार माना जाएगा।

1.36 लाख करोड़ रुपये की बकाया राशि का मुद्दा उठाया

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बैठक में कोयला कंपनियों और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों पर झारखंड की लंबित लगभग 1.36 लाख करोड़ रुपये की बकाया राशि का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि यह राशि राज्य को मिलने पर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कौशल विकास और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन संभव है। इसके अलावा उन्होंने जल जीवन मिशन के तहत लंबित लगभग 6000 करोड़ रुपये की राशि जल्द जारी करने की मांग की ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल योजनाओं को समय पर पूरा किया जा सके।

मेडिकल शिक्षा के विस्तार पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मेडिकल शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है, लेकिन मेडिकल कॉलेजों में 220 अतिरिक्त एमबीबीएस सीटों और 217 स्नातकोत्तर सीटों की स्वीकृति अभी लंबित है। उन्होंने केंद्र सरकार से शीघ्र मंजूरी देने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि PPP मॉडल पर प्रस्तावित छह मेडिकल कॉलेजों में से चार को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि दो प्रस्ताव अब भी लंबित हैं। मुख्यमंत्री ने इन दोनों मेडिकल कॉलेजों को भी जल्द स्वीकृति देने की मांग की।

शिक्षा और आंगनबाड़ी व्यवस्था को मजबूत करने का प्रस्ताव

हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य के लगभग 38 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में से 15 हजार आज भी अपने भवन से वंचित हैं। राज्य सरकार अपने संसाधनों से 5000 नए आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण कर रही है, लेकिन केंद्र के सहयोग से इस कार्य को और गति मिल सकती है।उन्होंने मुख्यमंत्री स्कूल ऑफ एक्सीलेंस मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि अब झारखंड के छात्र IIT, मेडिकल और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में चयनित हो रहे हैं। इसी मॉडल पर 5000 विद्यालय विकसित करने की योजना है।मुख्यमंत्री ने झारखंड में पीएम श्री विद्यालयों और केंद्रीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाने की मांग की। साथ ही राज्य की भाषाई एवं सांस्कृतिक विविधता को देखते हुए NCERT का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने का भी अनुरोध किया।

रोजगार और कौशल विकास को बताया भविष्य की कुंजी

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड प्रतिवर्ष एक लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ रहा है। मुख्यमंत्री सारथी योजना के तहत अब तक 6.76 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है। कृषि, इलेक्ट्रॉनिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और सौर ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों में युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार हर वर्ष 1400 करोड़ रुपये से अधिक कौशल विकास पर खर्च कर रही है। वहीं एशियाई विकास बैंक के सहयोग से 1200 करोड़ रुपये की लागत से मेगा स्किलिंग इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं को पंचायत स्तर तक पहुंचाने की पहल

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को जिला मुख्यालयों से पंचायत स्तर तक पहुंचाने के लिए काम कर रही है। पंचायत स्तरीय दवा दुकान योजना के तहत राज्य के 24 जिलों में 1276 दवा दुकानें संचालित हो रही हैं। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में केंद्र सरकार से अतिरिक्त सहयोग और संसाधन उपलब्ध कराने का आग्रह किया ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर चिकित्सा सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें।

खेल विश्वविद्यालय और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की मांग

हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड हॉकी, फुटबॉल, क्रिकेट, एथलेटिक्स और तीरंदाजी जैसे खेलों में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है। राज्य ने कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को देश को दिया है। उन्होंने झारखंड में राष्ट्रीय स्तर के हॉकी और फुटबॉल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तथा स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी स्थापित करने की मांग की। मुख्यमंत्री ने खेल महासंघों में पारदर्शिता बढ़ाने और राज्यों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए नई समितियों के गठन का सुझाव भी दिया।

खनिज आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़ने की जरूरत

मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल खनिज संपदा के सहारे किसी राज्य का समग्र विकास संभव नहीं है। झारखंड को वैल्यू एडिशन, मैन्युफैक्चरिंग, क्रिटिकल मिनरल आधारित उद्योग, ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स और एग्रो-फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि झारखंड कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित खनिज अन्वेषण और सतत खनन प्रणाली को बढ़ावा देना चाहता है और इस दिशा में केंद्र सरकार के सहयोग की अपेक्षा करता है।

विकास के साझेदार के रूप में झारखंड को देखने की अपील

अपने संबोधन के समापन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी हासिल होगा, जब झारखंड जैसे राज्यों को केवल संसाधनों के स्रोत के रूप में नहीं बल्कि विकास के साझेदार के रूप में देखा जाएगा। उन्होंने नीति आयोग से झारखंड के लिए दीर्घकालिक विकास दृष्टि तैयार करने और राज्य की खनिज संपदा को मानव संपदा में बदलने की दिशा में सहयोग देने का आग्रह किया।