धनबाद: APK स्कैम पर पुलिस का वार—3 दिन की स्पेशल ट्रेनिंग से साइबर ठगों पर कसेगा शिकंजा!

धनबाद में साइबर अपराध पर नकेल कसने के लिए पुलिस ने तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण सत्र शुरू किया। APK स्कैम से बढ़ती ठगी पर फोकस, आधुनिक जांच तकनीकों से लैस होंगे अधिकारी।

धनबाद: APK स्कैम पर पुलिस का वार—3 दिन की स्पेशल ट्रेनिंग से साइबर ठगों पर कसेगा शिकंजा!
तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण सत्र शुरू।
  • साइबर अपराध पर पुलिस का बड़ा कदम

धनबाद (Threesocieties.com Desk): कोयला राजधानी धनबाद में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को समाहरणालय स्थित पुलिस मुख्यालय में तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण सत्र की शुरुआत की गई। इस पहल का उद्देश्य पुलिस पदाधिकारियों को आधुनिक साइबर अपराध, उसके बदलते तरीकों और प्रभावी जांच तकनीकों से प्रशिक्षित करना है।

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कार्यक्रम का उद्घाटन एसएसपी प्रभात कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान ग्रामीण एसपी कपील चौधरी, सिटी एसपी ऋतविक श्रीवास्तव, डीएसपी विधि व्यवस्था नौशाद आलम, एसडीपीओ सिंदरी आशुतोष सत्यम, डीएसपी साइबर संजीव कुमार, डीएसपी सुनील कुमार सिंह और डीएसपी प्रदीप कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

दो पालियों में चल रहा प्रशिक्षण, बड़ी संख्या में अधिकारी शामिल

प्रशिक्षण सत्र के पहले दिन कार्यक्रम दो पालियों में आयोजित किया गया, जिसमें जिले के विभिन्न थानों से बड़ी संख्या में पुलिस पदाधिकारी शामिल हुए। विशेषज्ञ प्रशिक्षक सुयश भारती ने साइबर अपराध की जटिलता, तकनीकी पहलुओं और जांच की बारीकियों पर विस्तार से जानकारी दी।

APK स्कैम बना सबसे बड़ा खतरा

प्रशिक्षण में खास तौर पर APK स्कैम पर फोकस किया गया, जो आज के समय में साइबर ठगी का सबसे खतरनाक तरीका बन चुका है।विशेषज्ञों ने बताया कि APK (Android Package Kit) एक फाइल फॉर्मेट होता है, जिसका उपयोग मोबाइल ऐप इंस्टॉल करने में किया जाता है। साइबर अपराधी इसी का दुरुपयोग कर नकली ऐप बनाकर लोगों को फंसाते हैं।ये ठग WhatsApp, SMS या सोशल मीडिया के जरिए लिंक भेजते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति उस लिंक से ऐप डाउनलोड करता है, उसका मोबाइल पूरी तरह हैक हो सकता है।

कैसे खाली हो जाता है बैंक अकाउंट?

साइबर अपराधी इन फर्जी ऐप्स के जरिए— OTP, बैंक डिटेल्स और पासवर्ड चुरा लेते हैं। स्क्रीन रिकॉर्डिंग और की-लॉगिंग से हर गतिविधि पर नजर रखते हैं। मोबाइल को रिमोट से कंट्रोल कर बैंक अकाउंट से पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। कई बार ये ऐप “KYC अपडेट”, “बैंक ऐप”, “कूरियर सर्विस”, “सरकारी योजना” या “लॉटरी” के नाम पर भेजे जाते हैं, जिससे लोग आसानी से झांसे में आ जाते हैं।

पुलिस ने दी आम लोगों को ये जरूरी सलाह

प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को आम जनता को जागरूक करने के भी निर्देश दिए गए। लोगों को सलाह दी गई—

किसी भी अनजान लिंक से ऐप डाउनलोड न करें
केवल Google Play Store या विश्वसनीय प्लेटफॉर्म से ही ऐप इंस्टॉल करें
मोबाइल में “Install from Unknown Sources” ऑप्शन बंद रखें
OTP और बैंक डिटेल्स किसी के साथ साझा न करें
संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत बैंक और पुलिस को सूचना दें
डिजिटल ट्रेल से पकड़े जाएंगे साइबर अपराधी

इस प्रशिक्षण में पुलिस को यह भी सिखाया जा रहा है कि कैसे डिजिटल ट्रेल, IP एड्रेस, सर्वर लोकेशन और ट्रांजैक्शन डेटा के जरिए अपराधियों तक पहुंचा जा सकता है। तीन दिवसीय इस विशेष प्रशिक्षण से धनबाद पुलिस को साइबर अपराध से लड़ने में नई ताकत मिलेगी और आम नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा भी मजबूत होगी।