धनबाद रिंग रोड घोटाला: 17 पर एसीबी का शिकंजा, फर्जी मुआवजा खेल का खुलासा—अब कोर्ट में होगी बड़ी सुनवाई
धनबाद रिंग रोड मुआवजा घोटाले में एसीबी ने 17 आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। फर्जी दस्तावेजों से करोड़ों के गबन का मामला अब निगरानी न्यायालय में पहुंचेगा।
धनबाद (Threesocieties.com Desk) : झारखंड के धनबाद में बहुचर्चित रिंग रोड मुआवजा घोटाले में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने इस मामले में 17 आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। सोमवार, 6 अप्रैल 2026 को यह चार्जशीट निगरानी न्यायालय, धनबाद में समर्पित की गई, जिसके बाद अब इस मामले की सुनवाई न्यायालय में होगी।
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क्या है पूरा मामला?
यह मामला निगरानी थाना कांड संख्या-32/16 से जुड़ा है। आरोप है कि धनबाद जिले के मौजा-धनबाद, मनईटांड़ और दुहाटांड़ क्षेत्र में रिंग रोड निर्माण के लिए भू-अर्जन के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई। जांच में सामने आया कि मुआवजा वितरण के दौरान नियमों को ताक पर रखकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भुगतान किया गया। इसमें सरकारी अधिकारियों और बिचौलियों की मिलीभगत की बात भी सामने आई है।
कैसे हुआ घोटाला?
एसीबी की जांच के अनुसार बिना सत्यापन के फर्जी दस्तावेजों पर मुआवजा जारी किया गया। असली लाभार्थियों को दरकिनार कर फर्जी दावेदारों को भुगतान किया गया। सरकारी पद का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई। इस पूरे खेल में सरकारी कर्मियों और बिचौलियों की सांठगांठ रही। इससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान हुआ है।
किन-किन पर गिरी गाज?
इस मामले में तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी उदयकांत पाठक और कानूनगो मिथिलेश कुमार को मुख्य अभियुक्त बनाया गया है। इसके अलावा 15 अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है, जिनमें शामिल हैं:सुमेश्वर शर्मा, अनुपमा कुमारी उर्फ अनुपम कुमारी, शंकर प्रसाद दूबे, आलोक बरियार उर्फ जैको लाला, सुशील प्रसाद, विशाल कुमार, रविन्द्र कुमार, कुमारी रत्नाकर उर्फ रत्नाकर देवी, दिलीप गोप, बप्पी राय चौधरी, रामकृपाल गोस्वामी, अशोक कुमार महथा, उमेश महतो, अनिल कुमार सिंहा और काली प्रसाद सिंह। इनमें सरकारी कर्मचारी, अमीन, लिपिक, अंचलाधिकारी और बिचौलिए शामिल हैं।
पहले हो चुकी है गिरफ्तारी
गौरतलब है कि इस मामले में 9 जनवरी 2026 को सभी आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। लंबे समय तक चली जांच के बाद अब एसीबी ने आरोप पत्र दाखिल कर कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है।
अब क्या होगा आगे?
चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब निगरानी न्यायालय में सुनवाई शुरू होगी। कोर्ट में साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोप तय किए जाएंगे। यदि आरोप साबित होते हैं, तो दोषियों को कड़ी सजा हो सकती है।
क्यों अहम है यह मामला?
धनबाद जैसे औद्योगिक क्षेत्र में इस तरह का घोटाला प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। यह मामला न सिर्फ सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भ्रष्टाचार किस तरह विकास योजनाओं को प्रभावित करता है।
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