धनबाद सांसद ढुलू महतो ने लोकसभा में उठाया बोकारो विस्थापित युवाओं का मुद्दा, उम्र सीमा में छूट की जोरदार मांग
लोकसभा में धनबाद सांसद ढुलू महतो ने बोकारो स्टील प्लांट से जुड़े विस्थापित परिवारों के युवाओं को रोजगार में आयु सीमा से राहत देने और विशेष भर्ती अभियान चलाने की मांग उठाई।
नई दिल्ली। लोकसभा में गुरुवार को धनबाद लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री ढुलू महतो ने बोकारो इस्पात संयंत्र (BSL) से जुड़े विस्थापित परिवारों के युवाओं के हक़ में बुलंद आवाज़ उठाई। उन्होंने नियम 377 के तहत यह मुद्दा सदन में रखते हुए कहा कि जिन परिवारों ने देश के औद्योगिक विकास के लिए अपनी उपजाऊ ज़मीन, घर और आजीविका त्याग दी, आज उन्हीं के बच्चों का भविष्य प्रशासनिक लापरवाही और नीतिगत अड़चनों के कारण संकट में है।
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सांसद ढुलू महतो ने सदन को बताया कि विस्थापित परिवारों के सैकड़ों युवाओं ने वर्षों पहले आईटीआई एवं अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण इस उम्मीद के साथ पूरा किया था कि उन्हें बोकारो स्टील प्लांट में रोजगार मिलेगा। लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण प्रशिक्षण और भर्ती प्रक्रिया बाधित हुई। इसके बाद लंबी प्रशासनिक देरी के चलते कई योग्य युवा आयु सीमा पार कर गए, जिसके कारण अब उन्हें रोजगार से वंचित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ नौकरी का मामला नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय और ऐतिहासिक जिम्मेदारी से जुड़ा प्रश्न है। महामारी और सिस्टम की विफलताओं की सज़ा विस्थापित युवाओं को नहीं दी जानी चाहिए। सांसद ने केंद्र सरकार और इस्पात मंत्रालय से मांग की कि ऐसे सभी विस्थापित युवाओं को आयु सीमा में विशेष छूट दी जाए और अप्रेंटिस पूरा कर चुके युवाओं के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाया जाए।
सांसद ढुलू महतो ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बोकारो स्टील प्लांट की नींव विस्थापित परिवारों के त्याग और बलिदान पर टिकी है। यदि आज उनके बच्चों को उम्र सीमा का हवाला देकर बाहर किया जाता है, तो यह सामाजिक न्याय की भावना के पूरी तरह खिलाफ है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विस्थापितों के अधिकारों की लड़ाई वे संसद से लेकर सड़क तक, हर मंच पर पूरी मजबूती से लड़ते रहेंगे।






