TMC में सियासी संग्राम: बागियों को ममता का जवाब, EC को भेजी नई सूची; खुद को बताया पार्टी अध्यक्ष

तृणमूल कांग्रेस में बगावत के बीच ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को नई पदाधिकारी सूची सौंपी। सूची में खुद को पार्टी अध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी को महासचिव बताया गया। बागी गुट द्वारा अरूप रॉय को अध्यक्ष घोषित करने के बाद TMC में सियासी संघर्ष तेज हो गया है।

TMC में सियासी संग्राम: बागियों को ममता का जवाब, EC को भेजी नई सूची; खुद को बताया पार्टी अध्यक्ष
TMC में 'दो अध्यक्ष' की जंग।

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk):  पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में चल रहा आंतरिक सत्ता संघर्ष अब चुनाव आयोग (EC) तक पहुंच गया है। पार्टी में विधायकों और सांसदों के एक बागी गुट द्वारा समानांतर संगठनात्मक ढांचा घोषित किए जाने के एक दिन बाद ममता बनर्जी खेमे ने बड़ा कदम उठाते हुए चुनाव आयोग को पार्टी पदाधिकारियों और राष्ट्रीय कार्यसमिति की नई सूची सौंप दी है।

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इस सूची में स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया है कि ममता बनर्जी ही अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, जबकि अभिषेक बनर्जी राष्ट्रीय महासचिव बने हुए हैं। इसे बागी गुट के दावों के खिलाफ आधिकारिक जवाब माना जा रहा है।

EC को भेजी गई सूची में क्या है?

सूत्रों के अनुसार चुनाव आयोग को भेजी गई सूची में 20 जून 2026 तक की पार्टी संरचना का उल्लेख किया गया है। इसमें ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष, सुब्रत बख्शी को उपाध्यक्ष तथा अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव (लोकसभा नेता) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।इसके अलावा राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन को संयुक्त सचिव तथा सुभाशीष चक्रवर्ती को कोषाध्यक्ष के रूप में दर्शाया गया है। राष्ट्रीय कार्यसमिति में ममता बनर्जी, सुब्रत बख्शी, अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ'ब्रायन, डोला सेन और सुभाशीष चक्रवर्ती समेत कई वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है।

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बागी गुट ने क्यों खड़ा किया समानांतर ढांचा?

सोमवार को विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने कोलकाता में विशेष अधिवेशन बुलाकर वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को पार्टी अध्यक्ष घोषित कर दिया था। इसके साथ ही नई राष्ट्रीय कार्यसमिति और पदाधिकारियों की भी घोषणा की गई।बागी नेताओं का दावा है कि फरवरी 2022 में गठित राष्ट्रीय कार्यसमिति का कार्यकाल समाप्त हो चुका था और पार्टी में संवैधानिक संकट की स्थिति पैदा हो गई थी। इसी कारण पार्टी संविधान के तहत विशेष बैठक बुलाकर नई संरचना का गठन किया गया। बागी गुट ने यह भी कहा कि उनकी बैठक और नए संगठनात्मक ढांचे की जानकारी चुनाव आयोग को भी दी जाएगी।

ममता खेमे ने बागियों के दावे को किया खारिज

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने बागी नेताओं के कदम को पूरी तरह असंवैधानिक बताया है। वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने कहा कि पार्टी संविधान के तहत किसी भी विधायक या सांसद को ऐसी बैठक बुलाने अथवा संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करने का अधिकार नहीं है।उनका कहना है कि बागी गुट की ओर से लिया गया कोई भी निर्णय पार्टी की आधिकारिक मान्यता नहीं रखता और न ही उसका संगठनात्मक वैधता से कोई संबंध है।

क्या TMC में बढ़ सकता है संकट?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव आयोग को भेजी गई नई सूची महज प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि पार्टी पर नियंत्रण को लेकर चल रही लड़ाई में एक रणनीतिक कदम है। यदि बागी गुट अपनी दावेदारी को आगे बढ़ाता है तो मामला चुनाव आयोग और संभवतः न्यायालय तक भी पहुंच सकता है। फिलहाल ममता बनर्जी ने आयोग के रिकॉर्ड में खुद को पार्टी की वैध अध्यक्ष और अपने संगठनात्मक ढांचे को आधिकारिक बताकर यह संकेत दे दिया है कि तृणमूल कांग्रेस पर नियंत्रण की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है।