Kairav Gandhi kidnapping case Jamshedpur: इंडोनेशिया के मोबाइल नंबर से मांगी पांच करोड़ की फिरौती
जमशेदपुर के उद्योगपति देवांग गांधी के बेटे कैरव गांधी का अपहरण। इंडोनेशिया के नंबर से 5 करोड़ की फिरौती और हत्या की धमकी। 36 घंटे बाद भी पुलिस खाली हाथ।
- 48 घंटे बाद भी पुलिस के हाथ खाली
- हत्या की धमकी से हड़कंप
- अंतरराज्यीय प्रोफेशनल गिरोह पर शक
- सोनारी-कांदरबेड़ा के लोकेशन जाल में उलझी पुलिस
जमशेदपुर। झारखंड की औद्योगिक राजधानी जमशेदपुर एक बार फिर सनसनीखेज अपहरण कांड से दहल उठी है। आदित्यपुर स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (ASIA) के उपाध्यक्ष और शहर के प्रतिष्ठित उद्योगपति देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी (24 ) का फिरौती के लिए अपहरण कर लिया गया है। अपहरणकर्ताओं ने इंडोनेशिया के व्हाट्सएप नंबर (+62-831-94765544) से इंटरनेट कॉल कर परिवार से 5 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी है। साथ ही रकम नहीं देने पर कैरव की हत्या की धमकी दी गयी है।
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इंडोनेशिया के नंबर से आया फिरौती कॉल
जानकारी के अनुसार, मंगलवार को देवांग गांधी आदित्यपुर ऑटो क्लस्टर में एक अहम बैठक में व्यस्त थे। इसी दौरान उनके मोबाइल पर इंडोनेशिया के नंबर से 8–10 बार व्हाट्सएप कॉल आए, जिन्हें वे रिसीव नहीं कर सके। दोपहर लगभग दो बजे जब वे घर लौटे और बेटे कैरव से संपर्क किया, तो उसका मोबाइल बंद मिला। न तो वह बैंक पहुंचा था और न ही कंपनी। कुछ देर बाद जब विदेशी नंबर से आए मैसेज को पढ़ा गया, तो उसमें कैरव के अपहरण और फिरौती की मांग लिखी थी।
कांदरबेड़ा में लावारिस मिली कार
जांच के दौरान पुलिस को कैरव गांधी की क्रेटा कार सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल थाना क्षेत्र अंतर्गत कांदरबेड़ा में सड़क किनारे लावारिस हालत में मिली। चौंकाने वाली बात यह रही कि कार में चाबी लगी हुई थी, जिससे पुलिस को आशंका है कि कैरव को वहीं किसी दूसरी गाड़ी में जबरन शिफ्ट किया गया। फॉरेंसिक टीम ने वाहन से फिंगरप्रिंट और तकनीकी साक्ष्य जुटाये हैं।
सोनारी बनाम कांदरबेड़ा: लोकेशन का मायाजाल
पुलिस जांच में बड़ा विरोधाभास सामने आया है—
मोबाइल की आखिरी लोकेशन: सोनारी आदर्श नगर
कार की बरामदगी: कांदरबेड़ा (चांडिल)
पुलिस को शक है कि अपराधियों ने जानबूझकर मोबाइल को सोनारी में सक्रिय रखा या वहीं फेंका, ताकि जांच शहर के भीतर उलझी रहे, जबकि असल में कैरव को एनएच-33 के रास्ते बाहर ले जाया गया।
अंतरराज्यीय पेशेवर गिरोह पर शक
वारदात के तरीके, इंटरनेशनल नंबर के इस्तेमाल और लोकेशन प्लानिंग से यह साफ है कि यह किसी पेशेवर अंतरराज्यीय गिरोह की करतूत हो सकती है। पुलिस को शक है कि झारखंड-बंगाल सीमा अपराधियों के लिए ‘सेफ कॉरिडोर’ बनी, जहां से वे आसानी से पश्चिम बंगाल के पुरुलिया या बलरामपुर जिले की ओर भाग निकले।
सात टीमें गठित, 3 राज्यों में छापेमारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोल्हान डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा के निर्देश पर विशेष टीमें गठित की गई हैं।
झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में छापेमारी
कॉल डंप और सीडीआर का विश्लेषण
टोल प्लाजा और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे
साइबर सेल इंडोनेशियाई नंबर के सोर्स की जांच में जुटी
परिजनों में दहशत, शहर में खौफ
देवांग गांधी शहर के नामी उद्योगपतियों में शामिल हैं और इंपीरियल ऑटो प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों का संचालन करते हैं। बेटे के अपहरण के बाद से परिवार सदमे में है। सुरक्षा कारणों से परिजन मीडिया से दूरी बनाए हुए हैं।
पुलिस का बयान
सिटी एसपी कुमार शिवाशीष ने कहा—“यह पूरी घटना सोची-समझी साजिश लगती है। कैरव की गतिविधियों की पहले रेकी की गई थी। हर एंगल से जांच जारी है, जल्द ही अहम सुराग मिलेंगे।”
बिष्टुपुर का रास्ता और सोनारी का रहस्य
पुलिस के लिए सबसे बड़ी पहेली कैरव गांधी का रूट बना हुआ है। परिजनों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कैरव घर से बिष्टुपुर स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) जाने की बात कहकर अपनी कार से निकले थे। जांच में चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि उनकी अंतिम मोबाइल लोकेशन सोनारी में मिली। जबकि उनकी कार लावारिस हालत में चांडिल के कांदरबेड़ा के पास बरामद हुई। पुलिस अब इस सवाल का जवाब ढूंढ रही है कि बिष्टुपुर जाने वाले कैरव सोनारी क्यों गए? क्या उन्हें किसी परिचित ने फोन कर वहां बुलाया था, या अपहरणकर्ताओं ने रास्ते में ही उन्हें जबरन गाड़ी सहित मोड़ लिया?
तकनीकी साक्ष्यों पर टिकी जांच: कॉल डंप और सीसीटीवी
कैरव गांधी अपहरण मामले की जांच को दिशा देने के लिए पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों का सहारा लिया है। सीएच एरिया, रिवेरा और सोनारी लिंक रोड के तमाम सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि कैरव की कार का पीछा कोई संदिग्ध वाहन कर रहा था या नहीं। पुलिस 'टावर डंप' तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। सोनारी और कांदरबेड़ा के उन मोबाइल नंबरों का डेटा निकाला जा रहा है, जो घटना के समय दोनों स्थानों पर सक्रिय पाये गये थे। कैरव के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की भी बारीकी से जांच की जा रही है ताकि अंतिम बातचीत के बारे में पता चल सके।






