IIT ISM Dhanbad: ‘टेक्समिन’ ने तैयार किया बोरवेल कंपास, प्राइस मात्र 50 हजार

IIT ISM धनबाद में 2020 में स्थापित कंपनी टेक्समिन के जलवे से पूरा वर्ल्ड हैरान है। माइनिंग एरिया में मेक इन इंडिया टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए टेक्समिन को स्थापित किया गया है। टेक्समिन से जुड़े स्टार्टअप ने देश के माइनिंग के लिए मेक इन इंडिया डिजिटल बोरवेल बनाने में सफलता हासिल की है।

IIT ISM Dhanbad: ‘टेक्समिन’ ने तैयार किया बोरवेल कंपास, प्राइस मात्र 50 हजार
  • माइनिंग कंपनियां इलेक्ट्रॉनिक्स बोरवेल कंपास विदेश से करती हैं आयात
  • विदेश से बोरवेल कंपास मंगाने में खर्च होते हैं 30 लाख रुपये

धनबाद। IIT ISM धनबाद में 2020 में स्थापित कंपनी टेक्समिन के जलवे से पूरा वर्ल्ड हैरान है। माइनिंग एरिया में मेक इन इंडिया टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए टेक्समिन को स्थापित किया गया है। टेक्समिन से जुड़े स्टार्टअप ने देश के माइनिंग के लिए मेक इन इंडिया डिजिटल बोरवेल बनाने में सफलता हासिल की है।

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अभी तक इंडिया की माइनिंग कंपनियां उक्त बोरवेल कंपास को विदेशी कंपनियों से आयात करती थी। एक आयातित बोरवेल की प्राइस 30 लाख रुपये है। जबकि टेक्समिन से जुड़ी इस स्टार्टअप ने इस बोरवेल को मार्केट में 50 हजार रुपये में उतार दिया है। इस प्रोडक्ट को डीजीएमएस ने भी एनओसी े दे दिया है। IIT ISM के डायरेक्टर प्रो राजीव शेखर के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स बोरवेल कंपास किसी भी मामले में विदेशी प्रोडक्टसे कम नहीं है। इसकी सफलता पूर्वक उपयोग बीसीसीएल के मुनीडीह कोल माइंस में किया जा चुका है। यह सभी माइनिंग इंडस्ट्री के लिए काफी उपयोगी साबित होगा। इसका उपयोग माइनिंग इंड्स्ट्री के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद है। इसकी मार्केटिंग में टेक्समिन मदद करेगा.

ब्लास्टिंग में होता है बोरवेल कंपास का यूज
बोरवेल कंपास का यूज माइंस में विस्फोट के लिए सटीक ड्रिलिंग में मददगार है। यह ब्लास्ट किये जाने वाले हर ड्रिलिंग का सटीक गणना करता है। विशेषज्ञों के अनुसार माइंस में ड्रिलिंग के दौरान कई बार सीधी ड्रिलिंग नहीं हो पाती है। ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक्स बोरवेल कंपास ड्रिंलिंग में कितना भटकाव हुआ इस पर नजर रखता है। इस बोरवेल कंपास में इलेक्ट्रॉनिक्स मैग्नेटोमीटर और सेंसर लगा हुआ है।
वैकिल को कब मरम्मत की जरूरत है बतायेगा सेंसर 
टेक्समिन से जुड़े स्टार्टअप माइंस के लिए बेहतर ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम पर भी काम कर रहे हैं। इसके तहत माइनिंग इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले बड़े वाहनों के लिए एक विशेष प्रकार के सेंसर लगाया जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) पर आधारित यह सेंसर माइंस एरिया में वाहनों को एक्सीडेंट से भी बचायेगा।  यह बताने में भी सक्षम है कि वाहनों को कब मरम्मत की जरूरत पड़ेगी। इसमें लगा ट्रैकर यह बतायेगा कि वाहन कितना देर चला, तेल की कितनी खपत हुई, कितना टन कोयला लेकर चला, रुट इन सभी की मॉनिटरिंग की जा सकेगी। इससे कोयला चोरी पर भी लगाम लगेगा।
प्रोडजक्शन के साथ खनिज की गुणवत्ता बतायेगा 
एक स्टार्टअप ने खनिज की गुणवत्ता की जांच को सुगम और पारदर्शी बनाने के लिए एआइ पर आधारित तकनीक विकसित किया है। इसने एक गामा रेडिएशन बेस्ड सेंसर तैयार किया है। यह खनिज के माइंस से उनकी गुणवत्ता का आंकलन कंवेयर बेल्ट पर ही कर लेगा. और वाहनों पर लोड होने से पहले इनकी गुणवत्ता को बता देगा। इस टेकनीक की मदद से खनिजों के सैंपल को लैब में ले जाने की जरूरत नहीं होगी।