कोयला चोरी के आरोपों पर टकराव! BCCL CMD ने हंजला बिन हक को भेजा ₹10 करोड़ का मानहानि नोटिस

धनबाद में BCCL के CMD मनोज कुमार अग्रवाल ने मजदूर नेता हंजला बिन हक को कोयला चोरी और भ्रष्टाचार के आरोपों पर ₹10 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजा है। 7 दिन में माफी, बयान वापसी और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी से मामला चर्चा में है।

कोयला चोरी के आरोपों पर टकराव! BCCL CMD ने  हंजला बिन हक को भेजा ₹10 करोड़ का मानहानि नोटिस

      HighLights:

  • BCCL के CMD मनोज कुमार अग्रवाल ने मजदूर नेता हंजला बिन हक को ₹10 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजा
  • कोयला चोरी, भ्रष्टाचार और अवैध सिंडिकेट जैसे आरोपों को बताया प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला
  • 7 दिनों के भीतर बिना शर्त माफी, बयान वापस लेने और सोशल मीडिया पोस्ट हटाने की मांग
  • जवाब नहीं मिलने पर दीवानी और आपराधिक कार्रवाई की चेतावनी
  • हंजला बोले- भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की सजा मिल रही है, कानूनी जवाब देंगे।

धनबाद (Threesocieties.com): धनबाद के कोयलांचल में कोयला चोरी और कथित भ्रष्टाचार को लेकर छिड़ा विवाद अब कानूनी लड़ाई का रूप लेता दिखाई दे रहा है। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (CMD) मनोज कुमार अग्रवाल ने कोयलांचल बचाओ संघर्ष मोर्चा से जुड़े मजदूर नेता हंजला बिन हक को 10 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा है।

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इस कार्रवाई के बाद बीसीसीएल प्रबंधन और मजदूर संगठन के बीच टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। कोयला भवन मुख्यालय की ओर से भी नोटिस भेजे जाने की पुष्टि की गई है। नोटिस रांची हाईकोर्ट के अधिवक्ता अनूप कुमार मेहता के माध्यम से जारी किया गया है।

क्या है पूरा मामला?

कानूनी नोटिस के अनुसार, 2 जून 2026 को धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर आयोजित धरना-प्रदर्शन के दौरान तथा उसके बाद विभिन्न मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिए गए बयानों में हंजला बिन हक ने BCCL CMD पर कोयला चोरी, भ्रष्टाचार, अवैध सिंडिकेट संचालन और अकूत संपत्ति अर्जित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। नोटिस में कहा गया है कि इन बयानों से CMD की व्यक्तिगत, आधिकारिक और पेशेवर प्रतिष्ठा को गंभीर क्षति पहुंची है। साथ ही आरोप लगाया गया है कि इन बयानों का व्यापक प्रचार-प्रसार होने से उनकी सार्वजनिक छवि प्रभावित हुई।

7 दिन में मांगी गई बिना शर्त माफी

मानहानि नोटिस में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 356 का हवाला देते हुए हंजला बिन हक से सात दिनों के भीतर— बिना शर्त लिखित माफी, सार्वजनिक रूप से अपने बयान वापस लेने, सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म से वीडियो व पोस्ट हटाने तथा 10 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति देने की मांग की गई है। नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय के भीतर जवाब नहीं मिलने पर उनके विरुद्ध दीवानी और आपराधिक दोनों प्रकार की कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।

हंजला बिन हक ने क्या कहा?

नोटिस मिलने के बाद मजदूर नेता हंजला बिन हक ने कहा कि यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की सजा है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को बदनाम करना नहीं, बल्कि बीसीसीएल में कथित कोयला चोरी और भ्रष्टाचार जैसे जनहित के मुद्दों को उठाना था।

उन्होंने कहा कि निरसा, झरिया, धनबाद और बाघमारा क्षेत्रों में लगातार कोयला चोरी की घटनाएं सामने आती रही हैं और इनकी खबरें मीडिया में भी प्रकाशित होती रही हैं। उनके अनुसार, कंपनी के सर्वोच्च अधिकारी होने के नाते कोयला चोरी रोकने की जिम्मेदारी भी प्रबंधन की है। हंजला ने सवाल उठाया कि जब बीसीसीएल की सुरक्षा के लिए CISF जैसी एजेंसी तैनात है, तब भी यदि कोयला चोरी की घटनाएं सामने आ रही हैं तो इस पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।

अस्पताल और सार्वजनिक धन पर भी उठाए सवाल

हंजला बिन हक ने आरोप लगाया कि बीसीसीएल के केंद्रीय अस्पताल और कर्मचारियों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के बजाय संसाधनों का सही उपयोग नहीं हो रहा है। उन्होंने सार्वजनिक धन के पारदर्शी उपयोग की मांग दोहराते हुए कहा कि मजदूरों और आम लोगों के हितों से जुड़े मुद्दों को उठाना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है।

उन्होंने यह भी कहा कि कोयला चोरी का मुद्दा इतना गंभीर है कि इस पर केंद्र स्तर पर भी उच्चस्तरीय बैठकों में चर्चा हो चुकी है। उनका दावा है कि वे नोटिस का जवाब पूरी तरह संवैधानिक और कानूनी तरीके से देंगे।

कोयलांचल की राजनीति और मजदूर आंदोलन पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल मानहानि नोटिस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में बीसीसीएल प्रबंधन और मजदूर संगठनों के बीच संबंधों पर भी इसका असर पड़ सकता है। यदि मामला अदालत तक पहुंचता है तो यह धनबाद के कोयलांचल में हाल के वर्षों के सबसे चर्चित कानूनी विवादों में शामिल हो सकता है।