बिहार-बंगाल के बाद अब झारखंड पर फोकस, BJP की रणनीति में अमित शाह के करीबी सुनील बंसल की एंट्री संभव
झारखंड भाजपा को जल्द नया प्रभारी मिल सकता है। अमित शाह के करीबी और भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल को संगठन मजबूत करने की जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा तेज है। 2029 विधानसभा और लोकसभा चुनाव को लेकर केंद्रीय नेतृत्व ने अभी से रणनीति बनानी शुरू कर दी है।
- सुनील बंसल को मिल सकती है झारखंड प्रभारी की कमान
- 2029 मिशन पर भाजपा की बड़ी तैयारी
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड भाजपा को सांगठनिक रूप से मजबूत करने और 2029 विधानसभा चुनाव की तैयारी को लेकर भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के करीबी माने जाने वाले सुनील बंसल को झारखंड भाजपा का नया प्रभारी बनाया जा सकता है।
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बंगाल चुनाव में संगठनात्मक रणनीति के जरिए भाजपा को मजबूत स्थिति में पहुंचाने वाले सुनील बंसल को अब झारखंड में पार्टी की राजनीतिक जमीन तैयार करने की जिम्मेदारी देने की चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व झारखंड को लेकर लंबी रणनीति पर काम कर रहा है और इसी वजह से अनुभवी नेताओं की टीम तैयार की जा रही है।
बंगाल मॉडल को झारखंड में लागू करने की तैयारी
भाजपा के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने में सुनील बंसल की भूमिका बेहद अहम रही। इससे पहले उत्तर प्रदेश में भाजपा की लगातार चुनावी सफलताओं के पीछे भी उन्हें रणनीतिकार माना जाता रहा है।अब भाजपा उसी मॉडल को झारखंड में लागू करना चाहती है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि झारखंड में संगठन को फिर से सक्रिय करने, कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने और विपक्षी गठबंधन के खिलाफ मजबूत माहौल तैयार करने के लिए अनुभवी नेतृत्व की जरूरत है।
जून में हो सकती है बड़ी घोषणा
भाजपा नेताओं के अनुसार जून महीने में केंद्रीय नेतृत्व की ओर से संगठनात्मक बदलाव की घोषणा की जा सकती है। इसके तहत झारखंड भाजपा को नया संगठन प्रभारी भी मिल सकता है। हालांकि सुनील बंसल अगले साल उत्तर प्रदेश चुनाव के बाद झारखंड में ज्यादा सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। पार्टी अभी से 2029 लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुट गई है।
पूर्वोत्तर से यूपी तक BJP की सरकार, झारखंड बना चुनौती
भाजपा नेताओं के बीच इस बात को लेकर भी चर्चा है कि उत्तर प्रदेश से लेकर असम तक के बड़े भूभाग में भाजपा या एनडीए की सरकार है, लेकिन झारखंड ऐसा राज्य है जहां पार्टी फिलहाल विपक्ष में है। बंगाल में भाजपा की मजबूत स्थिति और बिहार में सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद अब पार्टी की नजर झारखंड पर टिक गई है। भाजपा नेतृत्व मानता है कि अगर संगठन को समय रहते मजबूत किया जाए तो 2029 में सत्ता वापसी संभव है।
2014 वाला फॉर्मूला दोहराने की तैयारी
भाजपा 2014 विधानसभा चुनाव की सफल रणनीति को एक बार फिर दोहराने की तैयारी में है। उस समय चुनाव से पहले भूपेंद्र यादव को चुनाव प्रभारी बनाया गया था, जबकि त्रिवेंद्र सिंह रावत को संगठन प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई थी। साथ ही राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री सौदान सिंह लगातार झारखंड में सक्रिय रहे थे। इसी तर्ज पर इस बार भी अनुभवी नेताओं की टीम बनाकर संगठन और चुनावी रणनीति दोनों पर फोकस किया जाएगा।
संगठन पर फोकस, बूथ स्तर तक तैयारी
सूत्रों के मुताबिक भाजपा का फोकस केवल बड़े नेताओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बूथ और मंडल स्तर पर संगठन को सक्रिय करने की योजना बनाई जा रही है। कार्यकर्ता प्रशिक्षण, सोशल मीडिया नेटवर्क, युवा और महिला मोर्चा को मजबूत करने पर भी विशेष रणनीति बनाई जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा अब झारखंड में “लॉन्ग टर्म पॉलिटिकल प्लान” पर काम कर रही है और सुनील बंसल जैसे रणनीतिकार की एंट्री उसी दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है।






