सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत! मनी लॉन्ड्रिंग केस में पूर्व मंत्री आलमगीर आलम की जमानत याचिका खारिज
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मंत्री आलमगीर आलम और उनके आप्त सचिव संजीव लाल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने जमानत याचिका खारिज करते हुए गवाहों की जांच चार सप्ताह में पूरी करने का निर्देश दिया।
रांची (Threesocieties.com Desk): मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। उनके साथ ही उनके आप्त सचिव संजीव लाल की जमानत याचिका भी नामंजूर कर दी गई है।
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गुरुवार को हुई सुनवाई में जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटेश्वर सिंह की बेंच ने स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल राहत नहीं दी जा सकती। हालांकि कोर्ट ने जांच में तेजी लाने के निर्देश देते हुए चार सप्ताह के भीतर महत्वपूर्ण गवाहों की जांच पूरी करने का आदेश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 11 मई को होगी।
कोर्ट में क्या हुई बहस?
सुनवाई के दौरान आलमगीर आलम की ओर से दलील दी गई कि वह 76 वर्ष के बुजुर्ग हैं और करीब दो वर्षों से जेल में बंद हैं। उनके वकील ने यह भी कहा कि मामले की सुनवाई में अब तक कोई खास प्रगति नहीं हुई है और न ही गवाहों की जांच पूरी हो सकी है। इसके अलावा यह तर्क भी दिया गया कि सरकार की ओर से अभी तक अभियोजन की स्वीकृति नहीं दी गई है, ऐसे में उन्हें जमानत दी जानी चाहिए।
ED का पक्ष और अदालत का रुख
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मामले में तीन और पूरक आरोप पत्र दाखिल किए हैं। एजेंसी का कहना है कि सभी आरोप पत्रों की संयुक्त सुनवाई होगी, जिसमें समय लग सकता है। हालांकि अदालत ने जमानत देने से इनकार करते हुए जांच प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दिया और चार सप्ताह में अहम गवाहों की जांच पूरी करने का निर्देश दिया।
छापेमारी में करोड़ों की बरामदगी
इस पूरे मामले की शुरुआत मई 2024 में हुई थी, जब ED ने बड़े पैमाने पर छापेमारी की थी। 6 मई 2024 को संजीव लाल और उनके करीबी जहांगीर आलम के ठिकानों पर छापेमारी हुई थी। जहांगीर आलम के यहां से 32.20 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे। संजीव लाल के घर से 10.05 लाख रुपये और एक डायरी मिली, इस डायरी में कथित तौर पर कमीशन के पैसों के बंटवारे का पूरा हिसाब-किताब दर्ज था, जिसमें नामों के बजाय कोड वर्ड का इस्तेमाल किया गया था।
कैसे हुई गिरफ्तारी?
ED ने पूछताछ के लिए आलमगीर आलम को समन भेजा था। दो दिनों तक लंबी पूछताछ के बाद 15 मई 2024 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इससे पहले 7 मई को संजीव लाल और जहांगीर आलम को भी गिरफ्तार किया गया था।
आगे क्या?
अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में निगाहें 11 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत ने साफ संकेत दिया है कि जांच में तेजी लाना जरूरी है, जिससे पूरे मामले का जल्द निपटारा हो सके।
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