झारखंड में डीजीपी नियुक्ति पर फिर आमने-सामने केंद्र और राज्य सरकार, गृह मंत्रालय ने बताया नियमों के खिलाफ

झारखंड में डीजीपी नियुक्ति पर फिर विवाद, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तदाशा मिश्रा की नियुक्ति समेत तीन प्रक्रियाओं को बताया नियमों के खिलाफ।

झारखंड में डीजीपी नियुक्ति पर फिर आमने-सामने केंद्र और राज्य सरकार, गृह मंत्रालय ने बताया नियमों के खिलाफ
डीजीपी की नियुक्ति को नियमों के विरुद्ध।
  • तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर सवाल
  • केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तीन डीजीपी नियुक्तियों को बताया गलत

रांची। झारखंड में पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर एक बार फिर केंद्र और राज्य सरकार आमने-सामने आ गये हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने राज्य सरकार द्वारा तदाशा मिश्रा को डीजीपी नियुक्त किये जाने के फैसले पर गंभीर सवाल उठाये हैं। मंत्रालय ने न केवल इस नियुक्ति को नियमों के विरुद्ध बताया है, बल्कि हाल के वर्षों में हुई तीन डीजीपी नियुक्ति प्रक्रियाओं को भी गलत करार दिया है।

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केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी पत्र में साफ कहा गया है कि तदाशा मिश्रा को स्थायी डीजीपी बनाए जाने का फैसला सेवा नियमों और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, तदाशा मिश्रा को 30 दिसंबर को डीजीपी नियुक्त किया गया, जबकि उनकी सेवानिवृत्ति अगले ही दिन यानी 31 दिसंबर 2025 को निर्धारित थी। ऐसे में उन्हें पूर्णकालिक और स्थायी डीजीपी बनाना संवैधानिक प्रक्रिया के खिलाफ है।

पिछली नियुक्तियों पर भी सवाल

गृह मंत्रालय ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि झारखंड में हाल के समय में की गई तीन डीजीपी नियुक्तियां नियमों के अनुरूप नहीं रहीं। इससे पहले भी पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता की नियुक्ति पर केंद्र सरकार ने आपत्ति जतायी थी।

13 जनवरी के पत्राचार का हवाला

मंत्रालय द्वारा 13 जनवरी को किये गये पत्राचार में इन नियुक्तियों को असंवैधानिक बताते हुए राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की गई है। केंद्र का कहना है कि डीजीपी जैसे संवैधानिक पद पर नियुक्ति के लिए तय प्रक्रिया, वरिष्ठता और न्यूनतम कार्यकाल का पालन अनिवार्य है, जिसे झारखंड सरकार ने नजरअंदाज किया।

 बढ़ सकता है संवैधानिक टकराव

केंद्रीय गृह मंत्रालय के इस रुख के बाद झारखंड में डीजीपी नियुक्ति को लेकर संवैधानिक और प्रशासनिक टकराव गहराने के संकेत मिल रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक और कानूनी रूप से और तूल पकड़ सकता है।