पुष्पा महतो हत्याकांड बोकारो : 25 पुलिसकर्मी सस्पेंशन मुक्त, पूर्व थाना प्रभारी समेत तीन अब भी निलंबित

बोकारो के चर्चित पुष्पा महतो हत्याकांड में बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। पिंड्राजोरा थाना के 25 पुलिसकर्मियों को निलंबन से मुक्त कर दिया गया है, जबकि तत्कालीन थाना प्रभारी, मुंशी और जांच अधिकारी अब भी सस्पेंड हैं। रिश्वत और जांच में लापरवाही के आरोपों की विभागीय जांच जारी है।

पुष्पा महतो हत्याकांड बोकारो : 25 पुलिसकर्मी सस्पेंशन मुक्त, पूर्व थाना प्रभारी समेत तीन अब भी निलंबित
तीन पुलिस अफसरों पर लटकी कार्रवाई की तलवार।

     HighLights:

  • पिंड्राजोरा थाना के 28 निलंबित पुलिसकर्मियों में से 25 को निलंबन से मुक्त किया गया
  • तत्कालीन थाना प्रभारी, मुंशी और जांच अधिकारी अब भी निलंबित हैं
  • मुख्य आरोपी दिनेश महतो के इकबालिया बयान की वीडियोग्राफी कराई गई
  • जांच में रिश्वत लेकर मामले को दबाने और जांच भटकाने के आरोप सामने आए
  • झारखंड हाईकोर्ट की फटकार के बाद एसआईटी जांच शुरू हुई थी
  • करीब नौ महीने बाद मृतका का कंकाल और हत्या में प्रयुक्त चाकू बरामद हुआ

बोकारो(Threesocieties.com Desk): जिले के बहुचर्चित पुष्पा महतो हत्याकांड में बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। पिंड्राजोरा थाना के निलंबित 28 पुलिस अधिकारियों और जवानों में से 25 को निलंबन से मुक्त कर दिया गया है। हालांकि उनके खिलाफ विभागीय जांच अब भी जारी रहेगी। दूसरी ओर तत्कालीन थाना प्रभारी अभिषेक रंजन, मुंशी अक्षय कुमार और केस के जांच अधिकारी अनिकेत कुमार अभी भी निलंबित हैं और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई तेज कर दी गई है।

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मुख्य आरोपी दिनेश कुमार महतो के पुलिस हिरासत में दर्ज इकबालिया बयान के बाद इन तीनों अधिकारियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। पुलिस विभाग में इस पूरे मामले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।

11 अप्रैल 2026 की रात हुआ था बड़ा एक्शन

मामले की जांच में गंभीर लापरवाही और कथित अनियमितताओं को देखते हुए तत्कालीन बोकारो एसपी हरविंदर सिंह ने 11 अप्रैल 2026 की मध्य रात्रि में पिंड्राजोरा थाना के 28 पुलिसकर्मियों को एक साथ निलंबित कर दिया था। जांच की जिम्मेदारी पूर्व सिटी डीएसपी आलोक रंजन को सौंपी गई थी। जांच रिपोर्ट के अध्ययन के बाद यह पाया गया कि अधिकांश पुलिसकर्मियों की मामले में कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी। इसके बाद 25 अधिकारियों और जवानों को राहत देते हुए उनका निलंबन समाप्त कर दिया गया।

रिश्वत और शराब लेकर जांच भटकाने के आरोप

जांच के दौरान सामने आया कि तत्कालीन थाना प्रभारी अभिषेक रंजन ने कथित तौर पर मुख्य आरोपी दिनेश महतो से नकद राशि और शराब के रूप में घूस ली थी। आरोप है कि इसके बदले में हत्या की जांच को जानबूझकर भटकाया गया और वरिष्ठ अधिकारियों को भी गुमराह किया गया। डीजीपी तदाशा मिश्रा के निर्देश पर हुई पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं। इसके बाद विभागीय जांच का दायरा बढ़ा दिया गया।

कॉलेज जाने निकली थी पुष्पा, फिर कभी घर नहीं लौटी

पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र के खुंटाडीह गांव की रहने वाली गरीब मजदूर परिवार की बेटी पुष्पा महतो 21 जुलाई 2025 को कॉलेज में फॉर्म जमा करने के लिए घर से निकली थी। इसके बाद वह वापस नहीं लौटी। परिजनों ने जब थाने में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की तो उन्हें कथित तौर पर टाल दिया गया। मृतका की मां रेखा देवी को कई दिनों तक थाने और अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़े। एसपी के हस्तक्षेप के बाद केवल सनहा दर्ज किया गया, जबकि एफआईआर घटना के करीब 10 दिन बाद दर्ज की गई।

पुणे भेजी गई टीम और स्टेशन पर छूट गया पिता

दिसंबर 2025 में पुलिस को सूचना मिली कि पुष्पा पुणे में हो सकती है। इसके बाद पुलिस टीम मृतका के पिता को साथ लेकर पुणे पहुंची। आरोप है कि वहां पुलिसकर्मी उन्हें रेलवे स्टेशन पर छोड़कर चले गए। इस दौरान उनका मोबाइल फोन भी चोरी हो गया और उन्हें भीख मांगकर वापस घर लौटना पड़ा। इस घटना ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

हाईकोर्ट की फटकार के बाद बनी एसआईटी

स्थानीय पुलिस के रवैये से परेशान परिवार ने सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से झारखंड हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की। फरवरी 2026 में सुनवाई के दौरान खंडपीठ के जज सुजीत नारायण प्रसाद और संजय प्रसाद ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई। इसके बाद डीजीपी के निर्देश पर डीआईजी संध्या रानी मेहता के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया।

प्रेम संबंध बना हत्या की वजह

एसआईटी की पूछताछ में आरोपी दिनेश महतो ने स्वीकार किया कि वह पिछले तीन वर्षों से पुष्पा के साथ प्रेम संबंध में था। पुष्पा लगातार शादी का दबाव बना रही थी, जिससे छुटकारा पाने के लिए उसने हत्या की साजिश रची। 21 जुलाई 2025 को उसने पुष्पा को चास कॉलेज के पास बुलाया और बहाने से एक सुनसान जंगल में ले जाकर चाकू से उसकी हत्या कर दी। इसके बाद शव को झाड़ियों में छिपा दिया गया। आरोपी की निशानदेही पर करीब आठ से नौ महीने बाद पुष्पा का क्षत-विक्षत कंकाल और हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू बरामद किया गया।

परिवार को अब इंसाफ की उम्मीद

लंबे संघर्ष, पुलिस की कथित लापरवाही और न्यायिक हस्तक्षेप के बाद अब पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। दूसरी ओर इस मामले ने पुलिस की जवाबदेही, जांच प्रक्रिया और संवेदनशील मामलों में कार्यशैली को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।