न सड़क, न हेलीकॉप्टर... सिर्फ आस्था के सहारे होती थी केदारनाथ यात्रा, आनंद महिंद्रा ने शेयर की 1882 की दुर्लभ तस्वीर
महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने 1882 की केदारनाथ धाम की दुर्लभ तस्वीर साझा कर पुरानी तीर्थयात्रा की कठिनाइयों और अटूट आस्था को याद किया। उन्होंने कहा कि तब न सड़कें थीं, न हेलीकॉप्टर—सिर्फ श्रद्धा ही सहारा थी।
- , आनंद महिंद्रा बोले- तब सिर्फ विश्वास था सहारा
नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने केदारनाथ धाम की वर्ष 1882 की एक दुर्लभ तस्वीर साझा कर लोगों को उस दौर की कठिन तीर्थयात्रा और अटूट आस्था की याद दिलाई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर साझा की गई इस ऐतिहासिक तस्वीर ने श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों के बीच खास चर्चा पैदा कर दी है।
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Apparently, this is one of the earliest known photographs of the sacred Kedarnath Dham, taken in 1882.
— anand mahindra (@anandmahindra) April 26, 2026
Couldn’t take my eyes off it.
No roads. No railheads. No helicopters.
Just the abode of Lord Shiva, cradled by the Himalayas
Back then, the yatra demanded time, endurance,… pic.twitter.com/UfvWVsmLnf
आनंद महिंद्रा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि यह संभवतः केदारनाथ मंदिर की शुरुआती ज्ञात तस्वीरों में से एक है। उन्होंने कहा कि इस तस्वीर से नजरें हटाना मुश्किल है, क्योंकि यह उस समय की तीर्थयात्रा की कठिनाई और श्रद्धालुओं की अडिग आस्था को जीवंत रूप में दिखाती है।
तब न सड़क थी, न रेल, न हेलीकॉप्टर
उन्होंने कहा कि वर्ष 1882 में केदारनाथ यात्रा आज की तरह आसान नहीं थी। उस समय न सड़कें थीं, न रेल मार्ग और न ही हेलीकॉप्टर जैसी आधुनिक सुविधाएं। श्रद्धालुओं को दुर्गम पहाड़ी रास्तों, मौसम की मार और शारीरिक कठिनाइयों का सामना करते हुए केवल आस्था के भरोसे यात्रा पूरी करनी पड़ती थी। महिंद्रा ने लिखा कि उस दौर में यात्रा सिर्फ मंदिर तक पहुंचने का माध्यम नहीं थी, बल्कि वही तीर्थयात्रा का असली स्वरूप थी। हर कदम श्रद्धा, धैर्य और तपस्या का प्रतीक होता था।
आज सुविधाएं बढ़ीं, लेकिन अनुभव को महसूस करना जरूरी
आनंद महिंद्रा ने माना कि आज बेहतर सड़कें, आधुनिक परिवहन और हेलीकॉप्टर सेवाओं ने केदारनाथ यात्रा को काफी आसान बना दिया है। यह सकारात्मक बदलाव है, क्योंकि इससे अधिक लोगों को बाबा केदार के दर्शन का अवसर मिल रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यात्रा की रफ्तार को धीमा कर उसके हर पल को महसूस करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यात्राएं केवल मंजिल तक पहुंचने के लिए नहीं होतीं, बल्कि रास्ते में इंसान क्या बनता है, यह भी तय करती हैं।
5 दिन में 1.56 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के महज पांच दिनों के भीतर ही श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। रविवार तक कुल 1 लाख 56 हजार 913 श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर चुके हैं, जिससे इस वर्ष की यात्रा की शुरुआत बेहद उत्साहजनक मानी जा रही है। कपाट खुलने के पहले ही दिन करीब 38 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन कर नया रिकॉर्ड कायम किया, जो अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा बताया जा रहा है।
22 अप्रैल को खुले बाबा केदार के कपाट
केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। पहले दिन हजारों भक्त इस पावन क्षण के साक्षी बने। परंपरा के अनुसार मंदिर में पहली पूजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से संपन्न हुई। चारधाम यात्रा के इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ यह साबित कर रही है कि बाबा केदार के प्रति लोगों की आस्था आज भी उतनी ही मजबूत है, जितनी 1882 में थी—बस अब सफर के साधन बदल गए हैं।






