जामताड़ा में साइबर गैंग पर पुलिस का बड़ा प्रहार! 9 ठग गिरफ्तार, 27 मोबाइल-39 सिम और टैब बरामद
जामताड़ा पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया। 27 मोबाइल, 39 सिम कार्ड और एक टैब बरामद हुआ। आरोपी फोनपे कैशबैक और बैंक अधिकारी बनकर लोगों से ठगी करते थे। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
HighLights:
- जामताड़ा पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया
- छापेमारी में 27 मोबाइल फोन, 39 सिम कार्ड और एक टैब जब्त
- फोनपे कैशबैक और फर्जी बैंक अधिकारी बनकर लोगों से करते थे ठगी
- पश्चिम बंगाल का युवक वकालत की तैयारी के दौरान साइबर गिरोह से जुड़ा
- दो आरोपियों के खिलाफ पहले भी साइबर ठगी के मामले दर्ज, पुलिस नेटवर्क खंगालने में जुटी
जामताड़ा (Threesocieties.com Desk): देशभर में साइबर अपराध के गढ़ के रूप में पहचान बना चुके जामताड़ा में पुलिस ने एक बार फिर साइबर ठगों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए नौ अपराधियों को गिरफ्तार किया है। विशेष अभियान के तहत की गई छापेमारी में पुलिस ने 27 मोबाइल फोन, 39 सिम कार्ड और एक टैबलेट बरामद किया है, जिनका इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी के लिए किया जा रहा था। पुलिस अब जब्त उपकरणों की तकनीकी जांच कर पूरे नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश में जुट गई है।
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शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में पुलिस अधीक्षक शंभू कुमार सिंह ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर साइबर डीएसपी अमित रविदास के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया गया था। टीम ने करमाटांड़ थाना क्षेत्र के सियारसोल, मटटांड़ तथा जामताड़ा थाना क्षेत्र के मोहड़ा-पोसोई इलाके में एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान करमाटांड़ से पांच और जामताड़ा थाना क्षेत्र से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने इस मामले में साइबर थाना कांड संख्या 44/26 दर्ज करते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम तथा टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट-2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
फोनपे कैशबैक के नाम पर लोगों को बनाते थे शिकार
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी बेहद शातिर तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। वे मोबाइल पर संपर्क कर खुद को विभिन्न कंपनियों या बैंक का प्रतिनिधि बताते थे और PhonePe Cashback मिलने का झांसा देते थे। इसके बाद वे लोगों से कैशबैक रिक्वेस्ट स्वीकार (Accept) करने को कहते थे। जैसे ही पीड़ित रिक्वेस्ट स्वीकार करता, उसके बैंक खाते से रकम साइबर अपराधियों के फर्जी ई-वॉलेट में ट्रांसफर हो जाती थी।
बैंक अधिकारी बनकर चुराते थे गोपनीय जानकारी
पुलिस के अनुसार आरोपी सिर्फ कैशबैक ठगी तक सीमित नहीं थे। वे खुद को बैंक अधिकारी बताकर लोगों से एटीएम कार्ड नंबर, सीवीवी, ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी और अन्य गोपनीय विवरण हासिल करते थे। इन जानकारियों के आधार पर खातों से रकम निकाल ली जाती थी। पुलिस का कहना है कि आरोपी लंबे समय से इस तरह की साइबर ठगी को अंजाम दे रहे थे और कई राज्यों के लोगों को अपना शिकार बना चुके हो सकते हैं।
वकालत की तैयारी कर रहा युवक भी निकला साइबर गैंग का सदस्य
गिरफ्तार आरोपियों में अमृत रूईदास का नाम सबसे अधिक चर्चा में है। वह पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्दवान जिले का रहने वाला है और इन दिनों अपने ससुराल पोसोई में रह रहा था। पुलिस के मुताबिक अमृत वकालत की पढ़ाई और तैयारी कर रहा था, लेकिन इसी दौरान वह साइबर अपराधियों के संपर्क में आ गया और गिरोह का सक्रिय सदस्य बन गया। पुलिस अब उसके संपर्कों और पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।
दो आरोपी पहले भी जा चुके हैं जेल
एसपी शंभू कुमार सिंह ने बताया कि गिरफ्तार मुजाहिद अंसारी और सलामत अंसारी के खिलाफ पहले भी साइबर ठगी के मामले दर्ज हैं। दोनों के खिलाफ पूर्व में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। इसके बावजूद वे फिर से साइबर अपराध में सक्रिय हो गए थे।
तकनीकी जांच से खुलेंगे बड़े राज
बरामद मोबाइल फोन, सिम कार्ड और टैबलेट की फॉरेंसिक एवं तकनीकी जांच कराई जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि इससे साइबर गिरोह के अन्य सदस्यों, बैंक खातों, ई-वॉलेट, फर्जी सिम नेटवर्क और ठगी के पैसों के लेन-देन से जुड़े कई अहम सुराग मिल सकते हैं।
लोगों से पुलिस की अपील
पुलिस अधीक्षक ने आम लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी अनजान कॉल, कैशबैक ऑफर या बैंक से जुड़े फोन पर आंख बंद कर भरोसा न करें। किसी भी व्यक्ति के साथ ओटीपी, एटीएम नंबर, सीवीवी, यूपीआई पिन या बैंक खाते की गोपनीय जानकारी साझा न करें।उन्होंने कहा कि यदि किसी को साइबर ठगी का संदेह हो तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन या स्थानीय पुलिस से संपर्क करें, ताकि समय रहते कार्रवाई कर नुकसान को रोका जा सके।
साइबर अपराध के खिलाफ अभियान रहेगा जारी
जामताड़ा पुलिस का कहना है कि जिले में साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। आने वाले दिनों में भी ऐसे गिरोहों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और साइबर ठगी में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।




